: "width=1100"' name='viewport'/> बदायूँ एक्सप्रेस | तेज रफ़्तार

कोतवाल को रिश्वत देने पहुंचा ठेकेदार गिरफ्तार, जेल भेजा



ठेकेदार के बेटे को कॉकटेल पार्टी में फायरिंग करते दबोचा था
बेटे को छुड़वाने के लिए कोतवाल को 80 हजार रुपये रिश्वत देने पहुंचे ठेकेदार को कोतवाल ने गिरफ्तार कर लिया। ठेकेदार कमलकांत शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे और उसके बेटे को जेल भेज दिया गया। कोतवाल को रिश्वत देने की कोशिश करने वाले ठेकेदार को छुड़वाने के लिए एक विधायक और सत्तारूढ़ पार्टी का एक नामचीन नेता भी कोतवाली पहुंचे। मामला हाईप्रोफाइल होने की वजह से पुलिस उसे कोतवाली से जमानत देने की हिम्मत नहीं जुटा सकी।
शहर के वैभव लॉन में शनिवार शाम एक कॉकटेल पार्टी चल रही थी। इसमें ठेकेदार कमलकांत का बेटा पुष्पांशु उर्फ मोना भी शामिल था। रात में शराब पीने के बाद लॉन में ठेकेदार के बेटे ने फायरिंग कर दी। किसी ने रात में कोतवाली पुलिस को सूचना दी। फोर्स के साथ शहर कोतवाल लोकेंद्र मौके पर पहुंच गए। यहां उन्होंने फायरिंग कर रहे पुष्पांशु उर्फ मोना को दबोच लिया। रात में ही उसे कोतवाली लाया गया। ठेकेदार कमलकांत रात से ही अपने बेटे को छुड़ाने में जुट गया। जब कोतवाली पुलिस पर उसका कोई दबाव नहीं चला तो ठेकेदार रविवार सुबह कोतवाली पहुंचा। उसने अपने बेटे मोना को छोड़ने के लिए शहर कोतवाल को प्रलोभन दिया। 2000-2000 रुपये के नोटों के 80 हजार रुपये निकाल कर बतौर रिश्वत कोतवाल की मेज पर रख दिए। ठेकेदार कमलकांत की यह पूरी हरकत सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई।
कोतवाल ने पूरे मामले में जानकारी उच्चाधिकारियों को दी। उन्होंने ठेकेदार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया। रविवार दोपहर को ठेकेदार कमलकांत और उसके बेटे को पुलिस ने एसीजेएम द्वितीय अमरजीत की कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने यहां से बाप-बेटे को जेल भेज दिया। पूरा मामला रविवार को पूरा दिन राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाओं में रहा। मामले में जांच सीओ सिटी अभिषेक यादव को दी गई है।

विधायक और सफेदपोश ठेकेदार को छुड़वाने कोतवाली पहुंचे
बदायूं। ठेकेदार कमलकांत शर्मा की गिरफ्तारी से राजनीतिक गलियारों में भी हड़कंप मच गया। एक विधायक भी उनको छुड़वाने कोतवाली पहुंचे। सत्तारूढ़ पार्टी का नामचीन एक नेता भी ठेकेदार को छुड़वाने के लिए कोतवाली पहुंचे। इसको लेकर मामला और भी सुर्खियों में आ गया। नेताओं को जब लगा कि वह गलत मामले में सिफारिश कर रहे हैं तो वहां से चले गए। मामला राजनीतिक सुर्खियों में आने के बाद पुलिस अधिकारी भी दिन भर पसोपेश में पड़े रहे।


मामले में जांच सीओ सिटी कर रहे हैं। रिश्वत देने के आरोपी ठेकेदार को जेल भेज दिया गया है। वैधानिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा रही है। अवैध रूप से कॉकटेल पार्टियां कराने वाले मैरिज लॉन की भी सूची तैयार कराई जा रही है। - अनिल कुमार यादव, एसपी सिटी

गायों को भी मिल सकता है आधार जैसा UID नंबर, सरकार ने SC को सौंपी रिपोर्ट



नई दिल्ली. भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर गायों की तस्करी रोकने के तरीकों पर मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट सौंपी है। जिसमें गायों के लिए भी आधार कार्ड की तरह यूआईडी नंबर (विशिष्ट पहचान संख्या) की सिफारिश की गई है। एक कमेटी ने की है इसकी सिफारिश...
  •  न्यूज एजेंसी के मुताबिक केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पेश अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वह गायों की तस्करी रोकने और उनकी रक्षा के लिए कोशिश कर रही है। सरकार ने कोर्ट को बताया है कि होम मिनिस्ट्री के ज्वाइंट सेक्रेटरी की अगुआई में एक कमेटी बनाई गई थी, जिसने सरकार को कई सिफारिशें दी हैं। इनमें से एक सिफारिश में गाय की पहचान तय करने के लिए UID नंबर की भी मांग की गई है।

गाय को ढूंढने में मदद मिलेगी

  •  रिपोर्ट में कहा गया है कि यूआईडी नंबर के जरिए यह पता लगाया जा सकेगा कि गाय किस वक्त कहां पर है, गायों को ढूंढने में भी मदद मिलेगी। केंद्र सरकार का कहना है कि हर गाय और उसके बछड़े का यूआईडी नंबर होना चाहिए, ताकि उसे आसानी से ट्रैक किया जा सके। गायों के UID नंबर में उम्र, नस्ल, सेक्स, ऊंचाई, रंग, सींग के प्रकार के अलावा किसी खास निशान की जानकारी होनी चाहिए।

शेल्टर होम भी होना चाहिए

  •  केंद्र सरकार का कहना है कि लावारिस पालतू जानवरों की सुरक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्य सरकार की है। हर जिले में ऐसे जानवरों के लिए 500 की क्षमता वाला एक 'शेल्टर होम' भी होना चाहिए। इससे जानवरों की तस्करी में काफी हद तक कमी आएगी। शेल्टर होम के लिए राज्य सरकार को फंडिंग करनी चाहिए।
  •  रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि किसानों के लिए ऐसी योजनाएं शुरू करनी चाहिए जिससे वे पशु बेचने के लिए मजबूर होने से बच सकें। सरकार का मानना है कि बढ़ती उम्र के कारण दूध देना बंद करने वाले जानवरों का खास ध्यान रखा जाना चाहिए, क्योंकि ऐसे जानवरों की भारत से बाहर तस्करी होती है।

टेक्नीशियंस को सौंपा गया है जिम्मा

  •  एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एनिमल हसबैंड्री डिपार्टमेंट ने टेक्नीशियंस को 12 डिजिट का यूनिक आईडी नंबर तैयार करने को कहा है, जिसे गाय के कान में लगाया जाएगा। इस काम में 1 लाख टेक्‍नीशियंस को लगाया गया है। ये लोग गायों के कानों के भीतर एक पीले रंग का टैग फिक्‍स करेंगे। इसी के जरिए बाद में इन गायों का यूआईडी तैयार किया जाएगा। इसकी मदद से उन्‍हें आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा।

क्या है मामला?

  •  भारत-बंगलादेश बॉर्डर पर गायों की तस्करी का मामला बहुत पेचीदा है। जानवरों की तस्करी बॉर्डर पर फायरिंग की भी एक अहम वजह है। केंद्र सरकार इस पर काफी सख्ती बरत रही है, जिससे इस तस्करी को पूरी तरह रोका जा सके।
  •  सुप्रीम कोर्ट भारत कृषि गोसेवा संघ की पिटीशन पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें कहा गया है कि बांग्लादेश बॉर्डर से गायों की बड़े पैमाने पर तस्करी होती है, जिस पर रोक लगाई जानी चाहिए।


योगी सरकार के रोड मैप को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी, यूपी में हर साल होगी 32000 पुलिसकर्मियों की भर्ती



नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश पुलिस में कैरियर बनाने का सपना देख रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। अब पुलिस में खाली पदों के पूरी तरह भरे जाने तक हर साल 32 हजार पुलिसकर्मियों की भर्तियां होंगी। सुप्रीम कोर्ट ने योगी सरकार के रोड मैप को मंजूरी दे दी है।

सरकार ने कहा है कि 11376 सब इंस्पेक्टर की भर्ती जनवरी 2018 से शुरू होगी और जनवरी 2023 तक पूरी होगी। हर साल 3200 सब इन्स्पेक्टर की भर्ती होगी। यही नहीं, 101619 सिपाहियों की भारतीय अगस्त 2017 से शुरू होगी जो कि सितंबर 2021 तक पूरी होगी। यानि हर साल 30 हजार सिपाहियों की भर्ती होगी।

तय हलफनामे के मुताबिक होगी भर्ती
सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से कहा है कि वह तय हलफनामे के मुताबिक ही भर्ती करे। अगर ऐसा नहीं किया गया तो प्रिंसिपल सेक्टरी होम निजी तौर पर जिम्मेदार होंगे। हर साल की भर्ती शुरू होने से और परिणाम घोषित होने तक पुलिस भर्ती बोर्ड का चेयरमैन नहीं बदला जायेगा। पुलिसकर्मियों की भर्तियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की और यह आदेश सुनाया। सुनवाई में 6 राज्य यूपी, बिहार, झारखंड, कर्नाटक, तमिलनाडू और पश्चिम बंगाल के बड़े अफसरों को रोडमैप के साथ सुप्रीम कोर्ट ने तलब किया था।

2013 से लंबित मामले पर हुई सुनवाई 
सीजेआई खेहर ने कहा था कि यह मामला 2013 से लंबित है लेकिन इन राज्यों में कुछ नहीं हुआ। नोटिस भेजने के बावजूद कोई कदम नहीं उठाया गया। अब कोर्ट इस मामले पर निगरानी करेगा और भर्तियों पर नजर रखेगा। सीजेआई ने यूपी सरकार से कहा कि है आप लोगों को रोजगार क्यों नहीं देते और इतने पद क्यों खाली हैं. हालांकि यूपी ने कहा कि इसके प्रयास जारी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक यूपी में 151679, बिहार में 34000, झारखंड में 26303, कर्नाटक में 24399, तमिलनाडू में 19803, बंगाल में 37325 पुलिसकर्मियों की रिक्तियां हैं।

भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों के रवैए पर जताई थी नाराजगी
देश में पुलिसकर्मियों की भर्ती का मामले में पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों के रवैए पर नाराजगी जताई थी। सीजेआई खेहर ने कहा था कि कानून व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए पुलिस के सभी पदों पर नियुक्तियां जरूरी हैं। सभी राज्यों के होम सेकेट्री तीन हफ्ते के भीतर हलफनामा दाखिल कर कोर्ट को बताएं कि पुलिसकर्मियों की नियुक्ति के लिए वो क्या कर रहे हैं? कितने पद खाली हैं? केंद्र सरकार एक हफ्ते के भीतर सभी राज्य सरकारों को कोर्ट का आदेश भेजे। कोर्ट ने चेतावनी दी कि जो राज्य हलफनामा दाखिल नहीं करेंगे उनके होम सेकेट्री कोर्ट में तलब होंगे।

देश में 4 लाख 33 हजार पुलिसकर्मियों की कमी 
जस्टिस खेहर ने कहा कि 2015 का रिकॉर्ड बताता है कि देश में 4 लाख 33 हजार पुलिसकर्मियों की कमी है। 2014 में छतीसगढ़ का कहना था कि उनके यहां 3800 पद खाली हैं और अब सरकार बता रही है कि 10000 पुलिसकर्मियों की नियुक्ति होनी है। ऐसे में अब सब राज्य कोर्ट को बताएं कि उनके यहां कितने पद खाली हैं और क्या हो रहा है? कोर्ट देश भर की पुलिस के लिए कल्याणकारी योजनाओं के लिए दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है।

पुलिस की कमी की वजह से दायर की गई थी याचिका
याचिका में कहा गया है कि सभी सरकारी विभागों के लिए कमिशन बनाए गए हैं और सुविधाएं दी जा रही हैं लेकिन पुलिस को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। देश में करीब 50 फीसदी पुलिसकर्मियों की कमी है और पुलिसवालों के लिए आवास और अन्य सुविधाएं भी नहीं हैं। इसकी वजह से कानून व्यवस्था को बनाए रखने में दिक्कत हो रही है। 

सुकमा में नक्सली हमला, 26 जवान शहीद; दिल्ली दौरा छोड़ CM रायपुर पहुंचे





सुकमा. यहां बुरकापाल और चिंतागुफा के बीच नक्सलियों ने सीआरपीएफ जवानों पर हमला किया। हमले में 26 जवान शहीद हो गए। घायल जवान शेर मोहम्मद ने बताया, "नक्सलियों की तादाद करीब 300 थी। उन्होंने पहले गांववालों को हमारी लोकेशन का पता करने के लिए भेजा और फिर हमला बोला।" इस हमले को नरेंद्र मोदी ने कायराना हरकत बताया है। उन्होंने ट्वीट किया, "जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।" हमले के बाद छत्तीसगढ़ के सीएम रमन सिंह ने अपना दिल्ली दौरा बीच में ही रोक दिया है और देर शाम रायपुर पहुंचे। उन्होंने इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है। घायलों को हेलिकॉप्टर से रायपुर भेजा गया...

 बुरकापाल में सड़क का काम लंबे अरसे से बंद था, लेकिन सीआरपीएफ की सिक्युरिटी में इसका काम फिर शुरू हुआ। सोमवार को सीआरपीएफ ने रोड ओपनिंग पार्टी भेजी थी। सीआरपीएफ के जवान जब खाना खा रहे थे, उस वक्त नक्सलियों ने घात लगाकर हमला कर दिया। जिसमें 26 जवान शहीद हो गए। कुछ जवानों की हालत सीरियस है, जिन्हें हेलिकॉप्टर से रायपुर भेजा गया।


  •  घायलों में एएसआई आरपी हेमबरम, एचसी राम मेहर, सिटी स्वरूप कुमार, सिटी मोहिंदर सिंह, सीटी जितेंद्र कुमार, सीटी शेर मोहम्मद, सिटी लाटो ओरोन शामिल हैं।


मुठभेड़ में नक्सली भी मारे गए

  •  घायल शेर मोहम्मद ने न्यूज एजेंसी से बताया, "सीआरपीएफ के जवानों की संख्या 150 थी और हमले के दौरान जवाबी फायरिंग भी की गई। जिसमें कई नक्सली मारे गए हैं। मैंने 3-4 नक्सलियों को सीने पर गोली मारी।" 
  •  इस बीच बस्तर के आईजी विवेकानंद सिन्हा और डीआईजी सुंदरराज सुकमा के लिए रवाना हो गए हैं। सीआरपीएफ की 74 वीं बटालियन के सभी जवानों को एंटी-नक्सल ऑपरेशन में तैनात कर दिया गया है। इसके अलावा आसपास के कैम्पों से भी मदद सुकमा पहुंच रही है।

घायलों से मिलेंगे रमन सिंह

  •  रमन सिंह ने रायपुर पहुंच कर कहा, "जिन डिस्ट्रिक्ट में हमले हो रहे हैं, वहां नक्सलियों पर काफी प्रेशर है। जवान पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। ये काफी गंभीर घटना है और अब ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। सीनियर ऑफिसर्स के साथ मीटिंग करने जा रहा हूं। इस मसले पर पीएम और होम मिनिस्टर से भी बात करूंगा।" बता दें कि रमन सिंह हॉस्पिटल में जाकर घायल जवानों से भी मिलेंगे।

जवानों की बहादुरी पर हमें फख्र- मोदी

  •  नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, "छत्तीसगढ़ में हुआ हमला दुखद और कायराना हरकत है। हम हालात पर नजर रख रहे हैं। CRPF जवानों की बहादुरी पर हमें फख्र है। उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। शहीद जवानों के परिवारों के लिए मैं संवेदना जाहिर करता हूं।"
  •  राजनाथ सिंह ने ट्वीट किया, "सुकमा में सीआरपीएफ जवानों के शहीद होने पर गहरा अफसोस है। शहीदों को मेरी श्रद्धांजलि और उनके परिवारों के लिए मैं संवेदना जाहिर करता हूं। मैंने इस मसले पर हंसराज अहीर से बात की है। वो हालात का जायजा लेने छत्तीसगढ़ जा रहे हैं।"
  •  केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा, "इस हमले से दुख पहुंचा है। जवानों का बलिदान बेकार नहीं जाना चाहिए। लोकतंत्र में इस तरह बिना कारण की गई हत्याओं के लिए जगह नहीं है।"
  •  राहुल गांधी ने कहा,"सुकमा अटैक में शहीद सीआरपीएफ जवानों के परिवारों के लिए संवेदना व्यक्त करता हूं। हम बहादुर जवानों के बलिदान को सलाम करते हैं।"

मार्च में भी किया था हमला, 12 जवान शहीद हुए थे

  •  सुकमा में 11 मार्च को भी नक्सलियों ने सीआरपीएफ जवानों पर हमला किया था। इस हमले में 12 जवान शहीद हो गए थे। नक्सली जवानों के हथियार भी लूट ले गए। नक्सलियों ने सुबह 9:15 AM बजे तब हमला बोला, जब CRPF के 219th बटालियन के जवान रोड ओपनिंग टास्क के लिए जा रहे थे। आईजी सुंदर राज ने बताया कि सिक्युरिटी पर्सनल्स इलाके में रोड ओपनिंग एक्सरसाइज कर रहे थे, उसी वक्त माओवादियों ने उन पर फायरिंग की। बता दें कि ये वही इलाका है, जहां 2010 में नक्सली हमले में 76 जवान शहीद हो गए थे।

यूपी के इन नेताओं को आतंकी बना सकते हैं अपना निशाना, हाई अलर्ट



लखनऊ. /खुफिया एजेंसियों ने यूपी में आतंकी हमला होने की आशंका जताई है। आतंकी संगठनों ने किशोर उम्र के आतंकियों को साधु और तांत्रिक के वेश में प्रशिक्षित कर सूबे में उतार दिया है। यह प्रशिक्षित आतंकी प्रमुख धार्मिक स्थलों के अलावा प्रतिष्ठित संस्थानों को भी अपना निशाना बनाने की तैयारी में हैं। एमपी पुलिस की इंटेलिजेंस यूनिट से जानकारी मिलने के बाद यूपी की सुरक्षा शाखा ने सभी जोन के आईजी, रेंज के डीआईजी, जिलों के एसपी व एएसपी रेलवे को अलर्ट कर दिया है। इसके अलावा रात से खुफिया एजेंसियों को भी चौकन्ना कर दिया गया है। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और पीएम नरेंद्र मोदी दोनों आतंकवादियों की हिट लिस्ट में हैं। वहीं बीजेपी के बड़े नेताओं को भी आतंकी अपना निशाना बना सकते हैं।इसकी सनसनीखेज खुफिया सूचना मिलने के बाद प्रदेश में पुलिस को अलर्ट जारी कर दिया गया है। पुलिस के साथ आतंकविरोधी एजेंसियां भी अलर्ट हैं जो तमाम सूचनाएं जुटाने में जुटी हैं। शनिवार को पद ग्रहण करने के बाद इस मामले में डीजीपी सुलखान सिंह ने बताया कि भगवा भेष में आतंकियों के हमले की सूचना मिलने के बाद सूबे की पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को बेहद अलर्ट कर दिया गया है। इस अलर्ट के अंतर्गत पुलिस को सभी स्थानों पर सघन चेकिंग के अलावा सोशल मीडिया पर नजर रखने के भी आदेश दिए गए हैं। दो दर्जन से अधिक आतंकी पहुंचे सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यूपी में दो दर्जन से अधिक आतंकवादी विभिन्न जिलों में पहुंच चुके हैं। 17-18 साल की उम्र के इन आतंकवादियों को हिंदू धर्म के साधु संतों के वस्त्र पहनने का भी प्रशिक्षण दिया गया है। यह आतंकी भारत-नेपाल की सीमा से दाखिल हुए हैं और लोगों से घुल-मिल भी गए हैं। बताया जा रहा है कि इन आतंकवादियों के निशाने पर लखनऊ, मथुरा, अयोध्या, हाईकोर्ट बिल्डिंग, आगरा, इलाहाबाद, काशी, सचिवालय सहित कई भीड़भाड़ वाले स्थान भी निशाने पर हैं। इन आतंकवादियों की संख्या दो दर्जन से अधिक बताई जा रही है। हालांकि सूचना मिलने के बाद से सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस पूरी तरह से सतर्क है। भगवा भेष में हमला कर सकते हैं सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यूपी में आतंकवादी भगवा भेष में हमला कर सकते हैं इसका उन्हें इनपुट मिला है। यूपी के कई जिलों में आतंकी संगठन के सदस्यों के छिपे होने की भी आशंका जतायी जा रही है। इसको देखते हुए प्रदेश में हाई अलर्ट जारी किया गया है और जिलों के सभी पुलिस अधीक्षकों को सघन चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।</div><div>डीजीपी के निर्देश के बाद पूरे प्रदेश के होटल, रेस्टोरेन्ट, सराय, रेलवे स्टेशन के साथ ही सार्वजानिक स्थलों पर पुलिस सघन चेकिंग अभियान चलायेगी। बताया जा रहा है कि होटल में ठहरने वाले लोगों का भी पुलिस ने विजटर रजिस्टर चेक करके शक होने पर उनसे पूछताछ भी की जाएगी। प्रदेश में खुफिया व आर्मी इंटेलीजेंस सक्रिय हो गई है।  मारा गया था संदिग्ध आतंकी बतादें कि विधानसभा चुनाव के आखिरी चरण के मतदान के एक दिन पहले मध्य प्रदेश में पैसेंजर ट्रेन में ब्लास्ट हो गया। इस वारदात को लेकर उत्तर प्रदेश के कानपुर व इटावा में आंतकियों को गिरफ्तारी की गई। लखनऊ के ठाकुरगंज इलाके में आंतकी व एटीएस के बीच हुई मुठभेड़ के मद्देनजर आशंका जताई जा रही थी कि यह लोग कोई बड़ी साजिश के लिए विभिन्न जनपदों में फैले थे।
सूत्रों की सटीक जानकारी पर वारदात को अंजाम देने से पहले ही एटीएस ने कार्रवाई करके संदिग्ध आतंकी सैफुल्ला को मुठभेड़ में मार गिराया था। इसके बाद कई ताबड़तोड़ छापेमारी में एटीएस और पुलिस ने दर्जनों संदिग्धों को हिरासत में भी लिया, कुछ के खिलाफ एटीएस और पुलिस ने कार्रवाई भी की है।  क्या हैं इनपुट्स इंटेलिजेंस से मिले इनपुट के मुताबिक, आतंकी वारदात के लिए यूपी में भेजे गए युवा 17-18 साल के हैं। इन लोगों को हिंदू धर्म के रीति-रिवाजों की ट्रेनिंग दी गई है। यह लोग साधु संतों व तांत्रिकों के वेश में रहते हैं। इसी साल फरवरी में 20-25 युवाओं को आतंकी संगठनों ने भारत-नेपाल बॉर्डर से यूपी में भेज दिया है। यूपी में घुसने के बाद इन लोगों ने हिंदू बहुल शहरों में हिंदू बस्तियों में ठिकाना बना लिया है। पुलिस-सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए आतंकी अपना हिंदू नाम रखकर किराए के मकान में रहने की योजना लेकर दाखिल हुए हैं।</div><div>पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई ने हिंदू रीति रिवाजों का प्रशिक्षण देकर एजेंटों को हिंदू आबादी में प्रवेश करवाने के लिए ऑपरेशन कृष्णा इंडिया शुरू

फिर क्यों भाजपा को वोट नहीं देते मुसलमान?



नई दिल्ली, । केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने शुक्रवार को एक नए विवाद को जन्म दे दिया। एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, मुसलमान भाजपा को वोट नहीं करते फिर भी पार्टी उनका ख्याल रखती है। रविशंकर के बयान का जहां उनकी पार्टी के सदस्य और समाज के कुछ लोग समर्थन कर रहे हैं। वहीं कुछ लोगों को उनके बयान से आपत्ति भी है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, देश के 15 राज्यों में हमारी सरकार है, 13 राज्यों में हमारी पार्टी के मुख्यमंत्री हैं और हम लोग देश की सत्ता भी संभाल रहे हैं। क्या हमारी सरकार ने अब तक किसी भी मुस्लिम को परेशान किया? क्या हमने किसी मुसलमान से उसकी नौकरी छीनी है? उन्होंने कहा 'मुझे पता है कि हमें मुसलमानों का वोट नहीं मिलता, लेकिन क्या हमारी सरकार उन्हें उचित सुविधा नहीं दे रही?

रविशंकर के बयान के क्या मायने
कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद जो कहना चाहते थे वह यह कि उनकी पार्टी की छवि एक साम्प्रदायिक पार्टी के तौर पर बनाई गई है। तमाम विपक्षी दल मुसलमानों को भाजपा का डर दिखाकर उनका वोट हासिल करते हैं। मुसलमानों में भाजपा के प्रति डर की भावना भरी जाती है। जबकि पार्टी वैसी है नहीं। भाजपा मुस्लिमों के लिए भी काफी कुछ करती है। पार्टी कभी यह सोचकर काम नहीं करती कि मुस्लिमों ने हमें वोट नहीं दिया तो हम उनके लिए क्यों करें?
                                     मुस्लिमों के लिए केंद्र सरकार की योजनाएं
छात्रवृत्ति योजनाएं

  • 10वीं से पहले और 10 के बाद छात्रवृत्ति
  • मौलाना आजाद नेशनल फैलोशिप
  • नई उड़ान - यूपीएससी, एसएससी, राज्यों की पीसीएस आदि परीक्षाएं पास करने वाले छात्रों को मेन्स की तैयारी में मदद के लिए योजना।

कौशल विकास

  • सीखो और कमाओ - कौशल विकास कार्यक्रम
  • उस्ताद - पारंपरिक कला और शिल्प कौशल के विकास के लिए योजना
  • नई मंजिल - युवाओं में शिक्षा और कौशल विकास ट्रेनिंग के लिए योजना

महिलाओं के लिए

  • नई रोशनी - महिलाओं में नेतृत्व क्षमता के विकास के लिए योजना
  • तीन तलाक का मुद्दा - तीन तलाक के मुद्दे पर भी भाजपा मुस्लिम महिलाओं के साथ खड़ी है

स्पेशल नीड्स

  • हमारी धरोहर - अल्पसंख्यकों की समृद्ध विरासत और संस्कृति को सजने के लिए योजना
  • सबका साथ सबका विकास - समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने और उनकी विकास की योजना

फिर भी मुस्लिम वोट नहीं, क्यों?

  • माना जाता है कि मुसलमान भाजपा पर भरोसा नहीं करते और वे भाजपा को छोड़कर किसी को भी वोट कर सकते हैं। यही कुछ रविशंकर के बयान से भी झलकता है। सरकार इतनी सारी योजनाएं अल्पसंख्यकों के लिए चला रही है। केंद्र में भाजपा के लगभग तीन साल के कार्यकाल में कोई ऐसा कार्य भी नहीं दिखा, जिसकी वजह से मुस्लिम सीधे तौर पर प्रभावित हुए हों। तो फिर मुस्लिम भाजपा को वोट क्यों नहीं करते?

पार्टी में मुस्लिमों की भागीदारी सवालों में

  • भाजपा में मुसलमान नेताओं की भागीदारी बहुत कम है। यह भी कहा जा सकता है कि मुख्तार अब्बास नकवी, एमजे अकबर, शहनवाज हुसैन, शाजिया इल्मी जैसे कुछ ही गिने-चुने नेता भाजपा में नजर आते हैं। इसके अलावा मुस्लिमों को टिकट देने के मामले में भी भाजपा अन्य पार्टियों से पीछे ही रहती है। हाल में यूपी विधानसभा चुनावों के दौरान पार्टी ने एक भी मुस्लिम नेता को टिकट नहीं दिया। पार्टी ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि मुस्लिम नेता जिताऊ नहीं होते।

यूपी में मिलावट करने वालों की अब खैर नहीं



लखनऊ: खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों की अब खैर नहीं। उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार एेसा करने वालों के खिलाफ अभियान चलाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ निर्देश दिये हैं कि मिलावट करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। योगी ने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के प्रस्तुतिकरण के दौरान कल देर रात कहा, ‘‘खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वाले अराजक तत्वों के विरुद्घ अभियान चलाकर नियमों के तहत कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करायी जाये।’’

उन्होंने कहा, ‘‘खाद्य पदार्थों में मिलावट मानवता के विरुद्घ जघन्य अपराध है। खाद्य पदार्थों के नमूनों के विश्लेषण के लिये प्रदेश के समस्त जिलों में प्रयोगशालायें स्थापित करायी जायेंगी। प्रथम चरण में प्रत्येक मण्डल में खाद्य पदार्थों के विश्लेषण की प्रयोगशालायें प्राथमिकता से स्थापित करायी जायें। वर्तमान में प्रदेश के मात्र छह जिलों लखनउ, आगरा, गोरखपुर, वाराणसी, झांसी एवं मेरठ में प्रयोगशालायें स्थापित हैं।  इन प्रयोगशालाआें से प्रतिवर्ष मात्र लगभग 18 हजार खाद्य नमूनों के विश्लेषण किये जाने पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुये योगी ने कड़े निर्देश दिये कि खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के विरुद्घ अभियान चलाकर अधिक से अधिक खाद्य नमूनों का विश्लेषण करने हेतु मासिक लक्ष्य निर्धारित किया जाये।

उन्होंने कहा कि थोक एवं फुटकर औषधि लाइसेंस ऑनलाइन प्रणाली का सु़दृढ़ीकरण पारदर्शिता के साथ आगामी 100 दिन में क्रियान्वित कराया जाये। ऑनलाइन सेिपल मैनेजमेंट सिस्टम को विकसित कर प्रयोगशालाआें में लागू कराया जाना सुनिश्चित कराया जाये। योगी ने कहा कि लाइसेंस शुल्क को ई-पेमेण्ट के माध्यम से ही जमा कराया जाना सुनिश्चित कराया जाये। दूध में मिलावट की मौके पर जांच हेतु मोबाइल लैब के माध्यम से जन-जागरूक कर दूध में मिलावट करने वालों के विरुद्घ विशेष अभियान चलाया जाये।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच के तरीकों का व्यापक प्रचार-प्रसार कराकर आम नागरिकों को जागरूक किया जाये।  उन्होंने कहा कि खाद्य कारोबारियों को अपने प्रतिष्ठानों में जांच उपकरण लगाने हेतु प्रेरित किया जाये। सार्वजनिक स्थलों के आसपास के खाद्य कारोबारियों को स्वच्छता के प्रति प्रशिक्षित एवं जागरूक कराने हेतु विशेष अभियान चलाया जाये। योगी ने निर्देश दिये कि संभावित असुरक्षित नमूनों का फास्ट ट्रैक विश्लेषण तथा प्रयोगशालाआें में 31 मार्च तक के सभी नमूनों का विश्लेषण यथाशीघ्र कराने हेतु विशेष कार्य योजना बनायी जाये। 

सरकारी डॉक्टरों ने प्राइवेट प्रैक्टिस बंद नहीं की तो सरकार उठायेगी कठोर कदम: स्वामी प्रसाद मौर्य




सुल्तानपुर: उतर प्रदेश के श्रम सेवायोजन नगरीय रोजगार और गरीबी उन्मूलन मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बार-बार निर्देशों के बाद भी सरकारी डॉक्टरों ने यदि प्राइवेट प्रैक्टिस बंद नहीं किया तो सरकार उनके खिलाफ कठोर कदम उठाएगी।

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार गठन के बाद पहली बार सुल्तानपुर पहुंचे मौर्य ने संवाददाताओं से कहा कि अवैध खनन पर उच्चतम न्यायालय के आदेश पर लगी रोक पर प्रदेश सरकार गंभीर है। जनता की जरूरतों पर न्यायालय की अनुमति से ही खनन की वैध प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।

श्रमिकों के खाने पीने ठहरने और उनके इलाज के लिए दवाओं की नि:शुल्क व्यवस्था सरकार शीघ्र करेगी। श्रमिकों के मेधावी छात्रों को शिक्षा सहायता योजना से मदद जल्द ही शुरू ही जाएगी। मौर्य ने सुल्तानपुर में नव निर्मित ट्रामा सेंटर के निर्माण के दो वर्षो बाद भी शुभारम्भ न होने के मामले की जांच के निर्देश दिए।

मेरठ में लगे बैनर, कश्मीरियों उत्तर प्रदेश छोड़ो वर्ना....




मेरठ: कश्मीर में सुरक्षा बलों पर पथराव की घटनाओं के बाद जिले में एेसे बैनर लगाए गए हैं जिनमें कश्मीरियों का बहिष्कार करने और घाटी के लोगों को उत्तर प्रदेश छोड़कर जाने को कहा गया है। इसे गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने बैनर लगाने वाले संगठन उत्तर प्रदेश नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष अमित जानी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है।

जानी ने बताया कि उन्होंने कश्मीरियों के बहिष्कार संबंधी बैनर और होर्डिंग मेरठ के परतापुर बाईपास स्थित मार्ग पर उन कॉलेजों के बाहर लगाए हैं जहां कश्मीरी छात्र पढ़ते हैं। जानी ने कहा कि यह तो पहला कदम है। इसके बाद अगर कश्मीरी प्रदेश छोड़ कर नहीं गए तो अगला कदम हल्ला बोल होगा। इसके तहत 30 अप्रैल से कश्मीरियों को जबरन प्रदेश से खदेड़ा जाएगा। परतापुर पुलिस थाने के एसएचआे दिनेश शर्मा ने कहा कि बैनर हटा लिए गए हैं।

उप निरीक्षक विपिन कुमार ने कहा कि ‘धर्म, जाति, जन्मस्थल, निवास स्थान, भाषा, समुदाय के आधार पर सौहार्द बिगाड़ने या एेसी कोशिश करने’ संबंधी भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पिछले दिनों सोशल मीडिया पर जम्मू-कश्मीर में सेना के साथ बदसलूकी और मारपीट का एक वीडियो सामने आया। इस वीडियो में दिखाई दे रहा है कि कुछ युवक सीआरपीएफ के जवानों के साथ मारपीट और बदसलूकी कर रहे हैं। कश्मीर में जवानों के साथ बदसलूकी की इस घटना का पूरे देश में विरोध हो रहा है।

यूपी के 2000 मस्जिदों-मदरसों पर ATS की पैनी नजर, खुफिया एजेंसियों के रडार पर हैं संदिग्ध



लखनऊ: पुलिस ने गुरुवार को 5 राज्यों में संयुक्त अभियान में कथित आतंकी साजिश में शामिल होने की शक में पांच युवकों को हिरासत में लिया था। इसके बाद से यूपी पुलिस और एटीएस को हाई एलर्ट पर रखा गया है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश की तकरीबन दो हजार मस्जिदों और मदरसों पर खुफिया एजेंसियों की नजर है।

यूपी पुलिस ने अलग-अलग इलाकों से जिन पांच युवकों को गिरफ्तार किया था उनमें से चार को तो पूछताछ के बाद 21 अप्रैल को ही रिहा कर दिया गया और केवल एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया गया। मोहम्मद फैजान नाम के जिस शख्स को गिरफ्तार किया गया है जो बिजनौर की एक मस्जिद का इमाम है।

क्या युवाओं को गुमराह करने की साजिश हो रही है?
मोहम्मद फैजान की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियों को जो जानकारी हाथ लगी है, इससे इस बात का शक गहरा हो रहा है कि युवाओं को गुमराह करने की साजिश रची जा रही है। बिजनौर के पुलिस अधीक्षक अजय सहनी ने कहा है कि “सुरक्षा एजेंसियों की नजर बिजनौर के आस-पास के इलाकों के मजहबी इदारों पर है। पुलिस ने यहां जाने वाले जिम्मेदार नागरिकों से भी सहायता देने की अपील की है, ताकि किसी भी युवक को गलत रास्ते पर जाने से पहले ही रोका जा सके”।

बताया जा रहा है कि खुफिया एजेंसियों को ऐसा शक है कि इन मस्जिद-मदरसों में युवकों को गुमराह करने की साजिश की जा रही है। इसके लिए आतंकी संगठनों के स्लीपर सेल काम कर रहे हैं. दरअसल मोहम्मद फैजान से पूछताछ में कई अहम सुराग सुरक्षा एजेंसियों के हाथ लगे हैं और इन सुरागों के आधार पर सुरक्षा एजेंसियां करीब 20 संदिग्धों पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं।

पहले भी हो चुका है आतंकियों से आमना-सामना
एमपी के शाजापुर में 7 मार्च की सुबह भोपाल-पैसेंजर ट्रेन में IED ब्लास्ट हुआ था। इसमें 10 लोग जख्मी हुए थे। ब्लास्ट के बाद एमपी पुलिस ने पिपरिया के एक टोल नाके से बस रोककर चार संदिग्ध पकड़े थे.इनकी गिरफ्तारी के बाद यूपी एटीएस ने कानपुर से दो और इटावा से एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया था। इन संदिग्धों से मिली जानकारी के आधार पर एटीएस ने लखनऊ के ठाकुरगंज इलाके में संदिग्ध आतंकी सैफुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई की थी। सैफुल्लाह एक घर में छुपा हुआ था। एटीएस ने पहले सैफुल्लाह को सरेंडर करने के लिए कहा था लेकिन उसके सरेंडर से इनकार करने के बाद घंटों तक चले एनकाउंटर में उसे ढ़ेर कर दिया गया था।
ISI का खतरनाक प्लान!
दरअसल पाकिस्तान की बदनाम खुफिया एजेंसी आईएसआई ने एक खतरनाक प्लान बनाया है। बताया जा रहा है कि ‘कृष्णा इंडिया’ नाम से बनाए गए इस खौफनाक ऑपरेशन में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ पर हमला करने की फिराक में आईएसआई जुटा है।आईएसआई के इस खतरनाक मंसूबे को लेकर मध्य प्रदेश इंटेलिजेंस ने यूपी पुलिस को अलर्ट किया है। आतंकी संगठनों ने आतंकियों को साधू और तांत्रिक के वेश में ट्रेनिंग देकर यूपी में उतार दिया है।

वहीं खतरे को देखते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ की सुरक्षा बढ़ाने का फैसला लिया गया है। बताया जा रहा है कि इस साजिश के तार लंदन से जुड़े हैं। 'द एशियन एज' अखबार ने खुफिया एजेंसियों के हवाले से खबर दी थी कि लंदन में बैठे कुछ कश्मीरी आतंकी पीएम मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ की हत्या की साजिश रच रहे हैं। खुफिया एजेंसियों से मिले इस इनपुट के बाद सिक्योरिटी अलर्ट जारी कर दिया गया है। इस खबर में बताया गया कि करीब एक दर्जन से अधिक प्रशिक्षित आतंकी यूपी में दाखिल हो चुके हैं। स्लीपर सेल की मदद से फिलहाल वह अंडरग्राउंड हैं। इस खतरे को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां बेहद सतर्क नजर आ रही हैं।

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