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बदायूँ एक्सप्रेस | तेज रफ़्तार | बिसौली,राम ने तोड़ा शिव का धनुष, गरजे परशुराम







बिसौली | बिसौली प्राचीन रामलीला मंच पर जैसे ही प्रभु श्रीराम ने शिव के धनुष को उठाया वैसे ही आकाश से पुष्पवर्षा होने लगी। पूरे जनकपुर में श्रीराम के जयकारे के गूंजने लगे हर कोई हर्षित हो गया।
रामलीला मंच पर प्रभु श्रीराम के पराक्रम का प्रदर्शन हुआ। जनक की प्रतिज्ञा के बाद हर एक की जुबान पर यही प्रश्न था कि अब सीताजी अविवाहित रह जाएगी। भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम ने शंकरजी के धनुष को उठाया तो तीनों लोक मे जय जयकार होने लगी। इस आवाज को सुनकर परशुराम जी भी सभा मे आ गए। परशुराम ने राजा जनक से पूछा कि मेरे इष्ट शिव के धनुष को तोड़ने वाला कौन है। तब प्रभु श्रीराम ने खड़े होकर कहा कि यह गुनाह उन्होंने ही किया है। यह सुनकर तो परशुराम जी की भौहें तन गईं। उन्होंने अपनी वीरता की गाथा गायी तो लक्ष्मण जी ने कटाक्ष किए। इन कटाक्षों ने आग में घी का काम किया लेकिन प्रभु श्रीराम के सौम्य स्वभाव के सामने परशुराम जी भी नतमस्तक हो गए। मंच पर प्रभु श्रीराम के पात्र का विनायक, लक्ष्मण का पात्र आदित्य, वाणासुर का विनोद राजौरिया और रावण के पात्र का ज्ञानेश शंखधार ने मंचन किया। इस मौके पर मंगली शर्मा, चंद्रपाल शर्मा, शेषमणि शर्मा, नीलेश मिश्र, राजेंद्र मिश्र, केके मिश्र, कमेटी के सदस्य और क्षेत्र के गणमान्य आदि मौजूद रहे।

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