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बदायूँ एक्सप्रेस | तेज रफ़्तार | ककोड़ा मेला: सुविधाएं कम ,दुकानों का टैक्स भी बढ़ा






बदायूँ | मिनी कुंभ के नाम से विख्यात ककोड़ा मेले में इस बार रौनक फीकी रहने के आसार नजर आ रहे हैं। एक तरफ जहां दुकानों के टैक्स में बढ़ोतरी की गई है, वहीं सुविधाओं में कमी की जा रही है। जबकि साफ-सफाई, सड़क, टेंट आदि के ठेकों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। मनोरंजन के नाम पर भी कुछ खास नहीं है।
दुकानदारों की माने तो आठ से दस फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दस फीट की जगह के लिए पांच से छह हजार रुपये देने होंगे। ग्रामीणों ने बताया कि थिएटर सर्कस के मेन गेट की सजावट, नखासा दौड़ तथा प्रदर्शनी का स्तर भी गिरता जा रहा है। जबकि गंगा के पास तक रोड बन गया है। जिला पंचायत को अब कोई पुलिया भी बनवानी नहीं पड़ती है। मेले की बढ़ोतरी में जिला पंचायत के संजीदा न दिखाई देने पर लोगों में मायूसी है।
नूरपुर निवासी मुहम्मद ने बताया मेरे पिता झम्मन मियां ने मेला ककोड़ा की शान की खातिर इलाहबाद हाईकोर्ट में जाकर मुकदमा लड़ा था। आज के दौर में मेले को बद से बदतर कर दिया। अगर जिला पंचायत मेले को गंगा स्नान तक सीमित करना चाहती है तो लोग कही भी स्नान कर लेंगे। मेला ककोड़ा ही क्यों आएंगे। मेले से मनोरंजन की सुविधाएं खत्म कर दी है।
ककोड़ा के ग्राम प्रधान अनिल द्विवेदी का कहना है कि जिला पंचायत वीआईपी के लिए सांकृतिक पांडाल लगाकर इतिश्री कर लेती है। इस तरह से मेला टूट जाएगा। मेला में मनोरंजन के साथ सभी सुविधाएं भी आम आदमी को नहीं मिलती।
 परमात्मादास का कहना है कि मेला की रौनक ही मेन गेट से शुरू होती थी। लेकिन अब फीकी नजर आ रही है। पूर्णिमा के बाद मेला राम भरोसे छोड़ दिया जाता है।
सेवानिवत प्रधानाचार्य प्रमोद उपाध्याय ने बताया कि मेला के उस दौर में और आज के दौर में भारी कमी आई है। प्रचार प्रसार की भी कमी है। पुल बनने के बाद मेला बढना चाहिए। लेकिन मेला गंगा स्नान तक सीमित करने की मंसा से मेला का ह्रास हुआ है। लोगों में मेला के प्रति उत्साह भी कम होता जा रहा है।



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