: "width=1100"' name='viewport'/> बदायूँ एक्सप्रेस | तेज रफ़्तार : बदायूँ एक्सप्रेस | तेज रफ़्तार | गुम हो गई है शासन से मिली मुआवजे की राशि

बदायूँ एक्सप्रेस | तेज रफ़्तार | गुम हो गई है शासन से मिली मुआवजे की राशि




बदायूँ | दैवीय आपदा से फसल नष्ट होने से डरे किसानों ने फसल बोने के साथ बमुश्किल फसल बीमा की प्रीमियम राशि इस उम्मीद से जमा की थी कि उन्हें फसल बर्बाद होने पर मुआवजा मिलेगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। किसानों की बर्बाद फसल के लिए मुआवजा शासन की ओर से भेजा गया। 6,601 किसानों का करीब 4.16 करोड़ रुपये का मुआवजा कहां है? इसकी खबर किसी को नहीं है। कृषि विभाग में आकर किसान मुआवजे के बारे में पूछ रहे हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी उन्हें बैंक में जाकर पता करने को कहकर टरका दे रहे हैं।

रबी सत्र 2015-16 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत हजारों किसानों ने फसलों का बीमा कराया था। दैवीय आपदा के चलते तमाम किसानों का गेहूं बर्बाद हो गया था। इसमें निरीक्षण के बाद 6,601 किसानों को मुआवजा देने का तय किया गया। बीमा कंपनियों ने इन किसानों को दी जाने वाली धनराशि करीब 4.16 करोड़ रुपये सितंबर में ही भेज दिए थे। इसमें किसानों के बैंक खातों में मुआवजे की धनराशि नहीं पहुंची है। इस वजह से किसान लगातार कृषि विभाग के अधिकारियों से शिकायत कर रहे हैं। इस माह के किसान दिवस में भी कई किसानों ने फसली मुआवजा न देने की शिकायत की थी, लेकिन किसी भी अधिकारी ने किसानों की इस समस्या की ओर ध्यान नहीं दिया। दिवाली आ रही है, इस साल रबी की बुवाई भी की जानी है, सो किसानों को पैसे की दरकार है। वह मुआवजा राशि पाने को भटक रहे हैं, लेकिन राहत कहीं से नहीं मिल रही।

फसली मुआवजे की जो धनराशि नोडल बैंकों को प्राप्त हुई है, उसे किसानों के बैंक खातों में भेज दिया गया है, जिन बैंकों से धनराशि नहीं भेजी गई है। इसकी जानकारी करके मंगलवार को कार्यालय पहुंचकर ही दे पाऊंगा।
अनुराग रमन, लीड बैंक मैनेजर

रबी 2015-16 में जिन किसानों ने फसल बीमा कराया था, इसमें 6601 किसानों को मुआवजा के 4.16 करोड़ रुपये मिला है। शासन से धनराशि नोडल बैंकों में भेजे जाने की सूचना एक माह पहले मिल चुकी है, लेकिन किसानों के बैंकों खातों में धनराशि पहुंचने की अब तक सूचना नहीं मिल पाई है, जबकि किसान लगातार मुआवजे के बारे में पूछने के लिए आ रहे हैं। हम खुद जानकारी जुटा रहे हैं।
आरपी चौधरी, उप कृषि निदेशक

No comments:

Post a Comment

zhakkas

zhakkas