: "width=1100"' name='viewport'/> बदायूँ एक्सप्रेस | तेज रफ़्तार : ..दिया हूं प्यार का हिम्मत से जल रहा हूं मैं

..दिया हूं प्यार का हिम्मत से जल रहा हूं मैं







बदायूँ | शहर की संस्था स्मृति वंदन की ओर से आयोजित तीन दिवसीय स्मृति वंदन महोत्सव का समापन अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा के साथ हो गया। यूनियन क्लब में आयोजित कवि सम्मेलन में रविवार की रात काव्य, हास्य और व्यंग्य की बयार बही। कवियों के काव्यपाठ पर श्रोताओं ने खूब तालियां बजाईं। रविवार रात शुरू हुआ हुआ कवि सम्मेलन सोमवार भोर तक जारी रहा।

अध्यक्षता कर रहे डॉ. वसीम बरेलवी ने सुनाया
सहारा लेना ही पड़ता है मुझको दरिया का, मैं एक कतरा हूं तन्हा तो बह नहीं सकता।
संचालन कर रहे मशहूर व्यंग्यकार डॉ. अशोक चक्रधर ने सुनाया
शेर ने कहा बकरी मैया नमस्ते
बकरी हैरान, बोली ताअज्जुब है भला ये शेर किसी पर रहम खाने वाला है,
लगता है जंगल में चुनाव आने वाला है।
गीतकार डॉ. विष्णु सक्सेना के तरन्नुमी अंदाज को श्रोताओं ने खूब पसंद किया। उन्होंने सुनाया जमीन जल रही है फिर भी चल रहा हूं मैं, खिजा का वक्त है और फूल फल रहा हूं मैं।
हर तरफ आंधियां हैं नफरतों की मैं फिर भी, दिया हूं प्यार का हिम्मत से जल रहा हूं मैं।
एकमात्र कवियित्री अनामिका अंबर ने सुनाया
जहां पर सच, दया, सम्मान और ईमान रहता है, वहीं जाकर वो अल्लाह और वो भगवान रहता है। अगर तूने निकाला है किसी के पांव का कांटा, तो ये तय है तेरे दिल में कोई इंसान रहता है।
विशाल गाफिल ने कुछ इस तरह सियासत पर तंज कसा-
सभी के हाथ में तलवारो खंजर आ गए हैं, सियासी जंग में सारे सिकंदर आ गए हैं।
शुरू होने को ही अब हैं तमाशे बस्तियों में, मदारी लेके अपने-अपने बंदर आ गए हैं।
शायर अकील नोमानी ने फरमाया
बिछड़ने वाले किसी दिन यह देखने आजा, चराग कैसे हवा के बगैर जलता है।
ये वहम मुझको किसी रोज मार डालेगा, कि एक शख्स मेरे साथ-साथ चलता है।
डॉ. अजय अटल ने कहा
नयन में सागर है वरना आंसू नमकीन नहीं होते, कंठ में करुणा है वरना गीत गमगीन नहीं होते।
कवि कमलेश शर्मा ने सुनाया
पहले से ही देश फंसा है उल्टी सीधी चालों में, इन चालों से ही झगड़ा है, मस्जिद और शिवालों में।
आग लगाना बहुत सरल है, लेकिन मेरी चाहत है, मेरा नाम लिखा जाए बस आग बुझाने वालों में।
डॉ. सुरेश अवस्थी ने व्यवस्थाओं पर कटाक्ष करते हुए सुनाया-
जीभों पर कांटे उगे, मन में उगे बबूल, रिश्ते कोई प्यार के कैसे करे कबूल।
डा.अशोक चक्रधर के अनुरोध पर डीएम पवन ने अपनी एक गजल सुनाई। इस पर श्रोताओं की भरपूर दाद मिली। इस मौके पर एसएसपी महेंद्र यादव, सीडीओ अच्छेलाल यादव, एडीएम वीके श्रीवास्तव, अनुपम गुप्ता, हाजी नूरउद्दीन, एम सगीर, महबूब सकलैनी, भानुप्रकाश भानु, अमित यादव, चंद्रपाल सरल, सोमेंद्र यादव, वसीम अहमद अंसारी मौजूद रहे।

डॉ.अशोक और वसीम को स्मृति वंदन सम्मान
बदायूं। कवि सम्मेलन में पहले नूर ककरालवी के गजल संग्रह 'चराग पलकों पर' का विमोचन मुख्य अतिथि विधि आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह और विशिष्ट अतिथि यासीन उस्मानी ने किया। इसके साथ ही फानी शकील स्मृति वंदन सम्मान वसीम बरेलवी और डॉ. ब्रजेंद्र अवस्थी उर्मिलेश स्मृति वंदन सम्मान पद्मश्री डॉ.अशोक चक्रधर को प्रदान किया गया। शायर पुत्तन खां फहमी, डॉ.अरविंद धवल को सम्मानित किया गया। युवा साहित्यकार का पुरस्कार विशाल गाफिल को दिया गया।

शायर-कवियों ने किया सांसद का गुणगान
बदायूं। कवि सम्मेलन और मुशायरे में बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित किए गए सांसद धर्मेंद्र यादव के न आने के बाद भी कवि-शायरों की बातों में उनकी उपस्थिति बनी रही। लगभग सभी मंचासीन महानुभावों ने सांसद के प्रति आभार प्रदर्शित करते हुए ये समझाने की कोशिश की, वह उनके बुलावे पर आए हैं। उन्होंने (सांसद) यहां न आने के बाद भी उनकी कैफियत जानी। डॉक्टर अशोक चक्रधर, वसीम बरेलवी और विष्णु सक्सेना ने तो यहां तक कह दिया कि समाजवादी पार्टी ही साहित्यकारों को अहमियत देना जानती है। इस बात पर पत्रकार दीर्घा में बैठे खबरनवीस खुसपुसाए कि स्थानीय मीडिया से तो सांसद मोबाइल पर भी बात करने से गुरेज करते हैं और साहित्यकारों से पल-पल की जानकारी...बात कुछ समझ नहीं आई।

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