: "width=1100"' name='viewport'/> बदायूँ एक्सप्रेस | तेज रफ़्तार : बदायूँ,पांच सौ और हजार का नोट लेकर दौड़े लोग

बदायूँ,पांच सौ और हजार का नोट लेकर दौड़े लोग







बदायूँ, | मंगलवार को टेलीविजन पर पांच सौ और हजार के नोट पर प्रतिबंध की खबर खलबली मचा दी। एक तरफ तो लोगों ने काला धन को बाहर लाने को लेकर प्रधानमंत्री मोदी के इस कदम की सराहना की। दूसरी ओर अपने पांच सौ और हजार के नोट को बदलने को लेकर चिंतित हो गए। पेट्रोल पंप पर लोगों की भीड़ लग गई।

बड़ें नोटों पर प्रतिबंध को लेकर देर रात तक अफरातफरी का माहौल रहा। लोगों की दो तरह की चिंताएं रहीं। नौ को होने की खबर के चलते एटीएम से पैसा निकालने वालों की भीड़ रही। दूसरी तरफ वे लोग हैरान रहे, जिनके पास पांच सौ और हजार की नगदी ज्यादा रही। क्योंकि लोगों ने इन नोटों का तुरंत लेना बंद कर दिया। सोशल साइट्स पर जैसे ही यह खबर वायरल हुई तो तमाम लोगों ने अखबार के दफ्तरों में इसकी पुष्टि करने के लिए बार-बार कॉल करते रहे। बैंक की ई-लॉबी में रुपये जमा करने वालों की भारी भीड़ रही, जिससे कि रुपयों को जमा कर सकें। पेट्रोल पंप पर तो यह हालत हुई कि पैसा वापस करने के चक्कर में कई पंप समय से पहले बंद कर दिए गए। सराफा मार्केट में इसे लेकर खासी चर्चा रही। उन लोगों ने भी चिंता जताई, जिनके यहां शादी होनी वाली है।
‘पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट पर प्रतिबंध लगाने की जानकारी टेलीविजन से मिली है। आधिकारिक सूचना नहीं है। पीएम मोदी के इस फैसले से काला धन बाहर आएगा। नौ नवंबर को बैंक बंद होने की जानकारी है और कल विस्तृत जानकारी हो सकेगी।’
 अनुराग रमन, लीड बैंक मैनेजर
विपक्षी बोले, तुगलकी है फरमान  
‘पीएम मोदी का फैसला सही है, लेकिन इससे गांवों और गरीब किसानों को बहुत परेशानी होगी, क्योंकि उन लोगों तक समय से जानकारी नहीं पहुंच पाएगी। वक्त देना चाहिए था।’
 साजिद अली, कांग्रेस जिलाध्यक्ष 
‘यह पीएम मोदी का तुगलकी फरमान है। इससे गरीब लोगों के रुपये जल्द जमा नहीं हो सकेंगे। इससे लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ेगा। बाकी जनता खुद बता देगी।’
 हेमेंद्र गौतम, बसपा जिलाध्यक्ष
‘यह तुगलकी फरमान है, लोकतंत्र में आम सहमति से फैसले लिए जाते हैं। प्रधानमंत्री को अन्य दलों से विचार विमर्श कर निर्णय लेना चाहिए था। एकदम फैसला थोपने से देश में अस्थिरता फैलेगी।’
 सुरेशपाल सिंह तोमर, सपा जिला महासचिव

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