: "width=1100"' name='viewport'/> बदायूँ एक्सप्रेस | तेज रफ़्तार : अखिलेश और मुलायम की ‘तीन-पांच’ के बीच सरकार और संगठन की शक्ति परीक्षा

अखिलेश और मुलायम की ‘तीन-पांच’ के बीच सरकार और संगठन की शक्ति परीक्षा






मुख्यमंत्री अखिलेश यादव 3 नवंबर से विकास से विजय की ओर रथ यात्रा लेकर निकल रहे हैं. दूसरी ओर समाजवादी पार्टी 5 नवंबर को अपने स्थापना की रजत जयंती जयंती समारोह को सफल बनाने के लिए जुटी है.
जहां एक ओर मुख्यमंत्री रथ यात्रा के जरिए शक्ति प्रदर्शन करेंगे, वहीं मुलायम और शिवपाल रजत जयंती के जरिए, जहां लोहियावादी और चौधरी चरणसिंह वादियों का जमावड़ा लगेगा.
रथ यात्रा को लेकर सपा कार्यकर्ताओं में असमंजस
हालांकि, अखिलेश ने साफ़ कर दिया है कि वह भी पार्टी के रजत जयंती समारोह में शिरकत करेंगे, लेकिन शिवपाल और मुलायम अखिलेश की रथ यात्रा के शुभारम्भ के मौके पर मौजूद होंगे की नहीं, इस पर सस्पेंस बरकरार है.
इस बीच मुलायम दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं और कहा जा रहा है कि वह रजत जयंती के अवसर पर ही आएंगे. दूसरी तरफ शिवपाल भी कह चुके हैं कि निमंत्रण मिलेगा तो जरूर जाएंगे.
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अब देखना यह है कि अखिलेश उन्हें आमंत्रित करते हैं कि नहीं, क्योंकि रजत जयंती के लिए सभी जिला इकाइयों को निमंत्रण भेजा गया है लेकिन रथ यात्रा को लेकर जिला इकाइयों में उहापोह की स्थिति बनी हुई है.
उन्हें इस संदर्भ में पार्टी संगठन की ओर से कोई पत्र नहीं गया है. ऐसे में 3 नवंबर को कौन और कितने लोग रथ यात्रा में शिरकत करते हैं देखना दिलचस्प होगा.
समर्थकों ने सड़कों को पोस्टरों से पाटा    
इस बीच राजधानी लखनऊ की सड़कों पर अखिलेश और शिवपाल समर्थकों के बीच पोस्टर वार छिड़ी है. अखिलेश और शिवपाल समर्थकों ने रथ यात्रा और रजत जयंती को लेकर पोस्टर लगाए हैं. इन पोस्टरों को देखकर साफ़ अंदाजा लगाया जा सकता है कि दोनों की बीच की दूरियां अभी भी बरक़रार है.
जहां एक ओर अखिलेश समर्थकों के लगाए पोस्टरों में शिवपाल गायब हैं तो रजत जयंती समारोह की पोस्टरों में अखिलेश भी नजर नहीं आ रहे हैं. जिसे लेकर राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह लड़ाई साफ़ तौर पर सरकार और संगठन में सर्वोपरि कौन है अब इसकी है.
दो खेमों में बंटी सपा से जनता लेगी हिसाब
बीजेपी के महामंत्री विजय बहादुर पाठक ने कहा कि समाजवादी पार्टी दो धडों में बंटी है. एक तरफ अखिलेशवादी हैं तो दूसरी तरफ शिवपालवादी. आपसी लड़ाई में जनता पिस रही है. अब वक्त जनता का है. चुनावों में वह हिसाब लेगी.
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उन्होंने कहा, 'पूरा शहर रथयात्रा के पोस्टरों से पटा है लेकिन किसी भी पोस्टर में प्रदेश अध्यक्ष की फोटो नहीं है. इससे क्या पता चलता है? सरकार और संगठन का शक्ति प्रदर्शन चल रहा है.'
सपा में किसी तरह का शक्ति प्रदर्शन नहीं
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता मोहम्मद शाहीद ने बीजेपी के आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा, 'सपा में किसी तरह का शक्ति प्रदर्शन नहीं और न ही पार्टी में किसी तरह का कोई बंटवारा है.'
उन्होंने कहा कि साम्प्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए महागठबंधन जरूरी है. शाहिद ने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी को अपने विकास कार्यों पर पूरा भरोसा है जिसकी बदौलत वह दोबारा सत्ता में वापसी करेगी.
झगड़ा ख़त्म नहीं हुआ तो जनता सोचने को मजबूर होगी
दूसरी तरफ वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हेमंत तिवारी ने कहा कि अगर समाजवादी पार्टी में झगड़ा ख़त्म नहीं हुआ तो जनता सोचने को मजबूर होगी. उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव मझे हुए राजनेता हैं उनको आगे की रणनीति पता है.
महागठबंधन पर तिवारी ने कहा कि अगर कांग्रेस इसमें शामिल नहीं होती तो उसे बड़ा. नुकसान होगा. समाजवादी पार्टी से गठबंधन करना कांग्रेस के लिए फायदे की बात है.

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