: "width=1100"' name='viewport'/> बदायूँ एक्सप्रेस | तेज रफ़्तार : बदायूँ,जिला अस्पताल है जहां इलाज नहीं मिलता इलाज

बदायूँ,जिला अस्पताल है जहां इलाज नहीं मिलता इलाज





बदायूं : यह कैसा अस्पताल है जहां इलाज नहीं मिलता। यह सवाल अब मरीज स्टाफ से पूछने लगे हैं। वजह है कि पिछले कुछ समय से हालात इस तरह के बने हैं कि मरीजों को न तो डॉक्टर मिलते हैं और न ही दवाई मिल पाती है। संक्रामक रोगों से जूझ रहे लोग मुफ्त इलाज के लालच में अस्पताल आते हैं तो सुबह से शाम तक लाइन में लगने के बाद भी उन्हें कुछ हासिल नहीं होता। थक हारकर वह बीमारी से जूझते हुए अपने घर लौट जाते हैं। हैरानी की बात तो यह है कि इस वक्त जिले में संक्रामक रोग फैला हुआ है इसके बाद भी जिले के सबसे बड़े अस्पताल में व्यवस्थाएं सुधारने को कोई खास इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। जिम्मेदारों की लापरवाही से हेकड़ी पर उतरे डॉक्टर निजी नर्सिंग होमों के अलावा यहां पर किसी भी मरीज को देखने तक नहीं आ रहे हैं।
संक्रामक रोगों से जूझ रहे मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा दिलाने का दावा करने वाले अधिकारियों पर ही सवाल खड़े होने लगे हैं। सुबह आठ बजे से ओपीडी खुलती है तो उससे पहले ही मरीजों की लाइन लगना शुरू हो जाती है। सुबह के वक्त ओपीडी में सिर्फ एक फिजीशियन और आर्थों सर्जन के अलावा कोई भी दिखाई नहीं देता। बाल रोग विशेषज्ञ हो या फिर चर्म रोग विशेषज्ञ सभी के कमरों में ताला लटका रहता है। बुखार के जो मरीज आते हैं उन्हें भी परेशानियों से ही दवाई मिल पाती है। एक डॉक्टर और सैकड़ों मरीज इस वजह से दोपहर दो बजे तक कुछ ही मरीजों को इलाज मिल पाता है।
अस्पताल की कहानी, मरीजों की जुबानी
हम तीन दिन से चक्कर लगा रहे हैं। एलर्जी होने पर निजी डॉक्टरों ने बताया कि जिला अस्पताल में मुफ्त इलाज मिल जाएगा, इसलिए यहां आ रहे हैं लेकिन इलाज नहीं मिल पा रहा है।
- रियासत
लोग कहते हैं सरकारी अस्पताल की दवाई अच्छी होती है इस वजह से यहां इलाज कराने आए थे। मगर, यहां तो डॉक्टर ही नहीं है अब किसको अपनी नब्ज दिखाएं। प्राइवेट अस्पताल में ही दवाई लेनी पड़ेगी।
- शिशुपाल ¨सह
जिला अस्पताल में पहले दवाई मिल जाती थी इस वजह से यहां चले आए। चार घंटे से पड़े हैं डॉक्टर ही नहीं है तो दवाई कौन देगा। डीएम से शिकायत करेंगे शायद कुछ सुधार हो जाए।
- मोहित
बाहर इलाज कराने पर मोटी रकम ऐंठी जाती है। इस वजह से सरकारी इलाज कराने के लिए चक्कर लगा रहे हैं। हमको क्या पता था कि यहां पर डॉक्टर आते ही नहीं है। कराया खर्च करके आए हैं अब इलाज कहां कराएं।
  लियाकत
सभी उच्चाधिकारियों को डॉक्टरों के गायब रहने की रिपोर्ट दे दी गई है। रोजाना यह शिकायतें मिल रही हैं कि मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। सीएमएस से कई बार कहा जा चुका है। उच्चाधिकारी जो भी निर्णय लेते हैं उस आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
  डॉ. सुनील कुमार, सीएमओ ।

No comments:

Post a Comment

zhakkas

zhakkas