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अब फर्जीवाड़ा नहीं चलेगा इंटरनेट पर दिखेंगी सरकारी चल-अचल संपत्तियां





बदायूं : ग्राम पंचायत स्तर पर होने वाले विकास कार्यों में अब फर्जीवाड़ा नहीं चलेगा। सरकारी चल-अचल संपत्तियां पहले से ही इंटरनेट पर सचित्र मौजूद रहेंगी जो नया काम होगा उसे भी फोटो सहित केंद्र सरकार की वेबसाइट पर डालना होगा। मसलन किसी पुराने भवन की मरम्मत या नवनिर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार करने से पहले ग्राम पंचायत स्तर पर भी इंटरनेट को टटोलना होगा ताकि कहीं कोई गड़बड़ी न हो जाए। सरकार ने इसके लिए विशेष मोबाइल एप तैयार किया है, जिसके जरिये ग्राम पंचायत अधिकारी ग्राम पंचायत स्तर की स्थिति वेबसाइट पर अपडेट करेंगे।
जिला मुख्यालय से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक पेपरलेस वर्किंग पर जोर दिया जा रहा है। केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार गांवों के विकास के लिए धन सीधे ग्राम पंचायतों को दे रही हैं। किस मद में कितना धन मिला और उसका कहां उपयोग हुआ यह सब फोटो समेत केंद्र सरकार की वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगी। मसलन गांव में क्या हो रहा है यह किसी से पूछने की जरूरत नहीं है। नेट खोलकर कोई भी व्यक्ति देख सकेगा। इसके लिए जीपीडीपी यानी ग्राम पंचायत डेवलपमेंट प्रोग्राम शुरू किया गया है। इसमें सबसे पहले ग्राम पंचायत स्तर पर उपलब्ध सरकारी चल-अचल संपत्तियों का सचित्र ब्योरा मोबाइल एप के जरिये नेट पर डालने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसमें सरकारी स्कूल, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र के अलावा खाली पड़ी भूमि भी शामिल रहेगी। ग्राम पंचायत अधिकारियों को अक्षांश और देशांतर के साथ यह ब्योरा वेबसाइट पर अपलोड करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, इसके बाद जो भी धन मिलेगा उसका प्रस्ताव बनाकर अनुमोदन कराना होगा। कार्य पूर्ण होने पर फोटो समेत ब्योरा नेट पर डालना होगा।
ग्राम पंचायतों में सरकारी चल-अचल संपत्ति किस दशा में है, यह नेट पर पता किया जा सकेगा। सभी एडीओ पंचायत और ग्राम पंचायत अधिकारियों को प्रशिक्षण देकर काम शुरू करने के निर्देश दे दिए गए हैं। गांवों में होने वाले विकास कार्यों में पारदर्शिता आएगी। नए कार्यों की फोटो भी नेट पर डालनी होगी, इसलिए धन का दुरुपयोग नहीं होने पाएगा।

 अच्छे लाल ¨सह यादव, मुख्य विकास अधिकारी।

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