: "width=1100"' name='viewport'/> बदायूँ एक्सप्रेस | तेज रफ़्तार : सरकारी बैन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा NDTV इंडिया

सरकारी बैन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा NDTV इंडिया







हिंदी न्यूज चैनल NDTV इंडिया ने सोमवार को केंद्र सरकार द्वारा लगाए विवादास्पद बैन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इसकी जानकारी एनडीटीवी की मैनेजिंग डायरेक्टर सुपर्णा सिंह ने ट्विट के जरिए दी है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा गठित एक अंतर-मंत्रालयी समिति की सिफारिश के बाद एनडीटीवी को आदेश दिया गया कि वह एक दिन यानि 9 नवंबर को प्रसारण रोके। सरकार ने पठानकोट वायुसेना अड्डे पर इस साल जनवरी में हुए आतंकी हमले की कवरेज के संदर्भ में चैनल पर कार्रवाई की सिफारिश की थी।

सरकार ने NDTV इंडिया पर इसी साल जनवरी में पठानकोट एयरफोर्स बेस पर हुए आतंकवादी हमले के दौरान संवेदनशील जानकारी का प्रसारण करने का आरोप लगाया है। ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी चैनल पर राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर कार्रवाई की गई है। सरकार के इस आदेश के बाद विपक्ष, बुद्धिजीवियों और मीडिया से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकार अभिव्यक्ति की आजादी का गला घोंट रही है।

इस प्रतिबंध का बचाव करते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा कि यह प्रतिबंध 'देश की सुरक्षा के हित में है', तथा इस मुद्दे पर की जा रही सरकार की आलोचना 'राजनीति से प्रेरित' लगती है।
अपने जवाब में चैनल ने कहा कि यह चीजों को अलग तरह से देखने का मामला है तथा जो सूचना उसने दीं, उनमें से अधिकांश पहले से ही सार्वजनिक रूप से प्रिंट, इलेक्ट्रानिक और सोशल मीडिया पर उपलब्ध हैं।

क्या है पूरा मामला
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने केबल टीवी नेटवर्क (नियमन) अधिनियमन के तहत शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि एनडीटीवी इंडिया को आदेश दिया जाता है कि वह 9 नवंबर, 2016 के दिन की शुरूआत (आठ नवंबर की देर रात 12:01 मिनट) से लेकर 10 नवंबर, 2016 के दिन के खत्म होने (नौ नवंबर की देर रात 12:01 बजे) तक के लिए प्रसारण पूरे भारत में हर प्लेटफॉर्म पर बंद रखेगा।

आतंकी हमले की कवरेज के संदर्भ में यह किसी चैनल के खिलाफ इस तरह का पहला आदेश है। इससे जुड़े नियम पिछले साल अधिसूचित किए गए थे। यह मामला पठानकोट हमले की कवरेज से जुड़ा हुआ है। समिति ने माना कि ऐसी महत्वपूर्ण सूचना को आतंकवादियों के आका तत्काल लपक सकते थे और इससे न सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा को बड़ा नुकसान पहुंचता, बल्कि नागरिकों और रक्षा कर्मियों की जान की भी क्षति हो सकती थी।

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