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भारत को मिलेगी हॉवित्जर तोपें, कर देंगी दुश्मन का काम तमाम






बोफोर्स घोटाले के बाद पैदा हुए गतिरोध को तोड़ते हुए भारत और अमेरिका ने बुधवार को 145 एम 777 हल्के हॉवित्जर की खरीद के लिए 5000 करोड़ रुपये के सौदे पर हस्ताक्षर किए। इन्हें चीन के साथ सीमा के निकट तैनात किया जाएगा। 1980 के दशक में हुए बोफोर्स घोटाले के बाद से तोपों की खरीद के लिए यह पहला सौदा है।

हॉवित्जर तोप की खासियतें
- हॉवित्जर तोपें काफी हल्की हैं जो कि इसे दूसरी तोपों से बिल्कुल अलग बनाती है।
- इसको बनाने वाले मटेरियल पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसे बनाने में टाइटेनियम का इस्तेमाल किया गया है।
- इसकी मारक क्षमता जबरदस्त है। यह 25 किमी के अपने टारगेट को नेस्तानाबूद कर सकती हैं।
- चीन की तरफ से लगातर मिल रही चुनौती के कारण ये तोपें काफी अहम हैं। इनको चीन सीमा पर तैनात करने की तैयारी है।
- भारत यह तोपें अपनी 17 माउंटेन कॉर्प्स में तैनात कर सकता है।

बोफोर्स तोप को लेकर हो चुका है विवाद
भारत ने तीस साल पहले स्वीडन से बोफोर्स तोपें खरीदी थीं। जिसके कारण भारत में इसको लेकर तूफान खड़ा हो गया था। यूएस के साथ हो रही डील की सबसे अच्छी बात है कि हॉवित्जर तोपों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। इस डील के तहत जहां 25 तोप भारत में तैयार अवस्था में आएंगी, वहीं शेष तोपों को महिंद्रा के साथ भागीदारी में भारत में स्थापित किए जाने वाली हथियार प्रणाली के लिए असेंबली इंटिग्रेशन एंड टेस्ट फैसिलिटी में जोड़कर तैयार की जाएगी।

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