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झंझट नहीं मोबाइल बैंकिंग आसान





बदायूं : बैंकों की लाइन में लगने के बजाय अपने मोबाइल को ही बैंक बनाना आसान है। झिझक को त्याग कर ई-बैं¨कग अपनाना अब समय की जरूरत बन गई है। इससे न कहीं लुटने का डर, न कहीं ठगे जाने की ¨चता। जेब में एक भी रुपये कैश नहीं फिर भी लाखों रुपये की खरीददारी कर घर वापस लौट सकते हैं। दैनिक जागरण की ओर से जीजेएस आइटीआइ कॉलेज में लगाई गई ई-बैं¨कग पाठशाला में छात्र-छात्राओं को कुछ इसी तरह का पाठ पढ़ाया गया।
कॉलेज की निदेशक पूनम भारती ने समझाया कि मोबाइल अथवा इंटरनेट बैं¨कग के माध्यम से लेन-देन करना बहुत आसान है। यह कोई नई चीज नहीं है, पहले से चल रही है। बड़े शहरों में नई पढ़ी इसका खूब उपयोग कर रही है। बस झिझक दूर करने की जरूरत है, फिर हमें अपने ही रुपये जमा करने और निकालने के लिए बैंकों पर लाइन नहीं लगानी पड़ेगी। ई-बैं¨कग के विशेषज्ञ गिरीश कुमार ने डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डेबिट कार्ड में बैलेंस होता है, कहीं कोई खरीदारी करने पर स्वाइप मशीन से स्क्रैच कर पैसे कटवा दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि कैशलेस होने में तो अभी समय लगेगा लेकिन हम लेसकैश होकर अपनी दिनचर्या को आसान बना सकते हैं। ई-बैं¨कग से न तो कैश का झंझट रहता है और न ही छुट्टे की कोई समस्या रहती है। बिजली का बिल, टेलीफोन का बिल जैसे भुगतान भी घर बैठे कंप्यूटर अथवा स्मार्टफोन से किए जा सकते हैं। इस मौके पर सेंटर हेड गिरीश कुमार, अशोक कुमार, लुबना सल्तनत, बेबी तरन्नुम, अवधेश कुमार, प्रमोद कुमार समेत कॉलेज के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
लेसकैश बनने पर दिया गया जोर
ई-बैं¨कग पाठशाला में चर्चा के दौरान मोबाइल और इंटरनेट के माध्यम से लेन-देन करने पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने बैंकों के एप की जानकारी देते हुए कहा कि जितना कम कैश पास रहेगा, उतना ही हम निर्भीक होकर जीवन जी सकेंगे। लेसकैश पर सभी ने जोर दिया। यह भी बताया गया कि किस तरह आवेदन कर इंटरनेट बैं¨कग शुरू कर सकते हैं और कैसे मोबाइल में एप डाउनलोड कर लेन-देन कर सकते हैं।
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