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December 20, 2016

डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व मे अमेरिका बनेगा भारत का अहम साझेदार




डोनल्ड ट्रंप अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति होंगे। डेमोक्रैट उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन को पटकनी देकर रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी ऐतिहासिक जीत सुनिश्चित की है। परिणामों में डोनाल्ड ट्रंप ने बड़े अंतर से हिलरी को मात दी है। विभिन्न विवादों में घिरे रहे रिपब्लिकन कैंडिडेट डोनाल्ड ट्रंप की जीत ने सभी पोल सर्वे को गलत साबित कर दिया। क्योंकि अधिकतर पोल सर्वे उनके खिलाफ थे। डोनाल्ड ट्रंप ने जीतकर अमेरिका और भारतीय अमेरिकियों के बीच अपनी लोकप्रतिया साबित की है। डोनाल्ड ट्रंप के पक्ष में पड़े वोट लोगों में सत्ता विरोधी लहर की ओर संकेत करते हैं, जो वास्तव में बदलाव के मूड में थे। जीत के बाद ट्रंप ने अपने समर्थकों को आभार जताया। हिलेरी क्लिंटन ने भी राजनीति से ऊपर उठकर डोनल्ड ट्रंप को फोन पर बधाई देकर आपसी समरसता का परिचय दिया। इसके जवाब में डोनल्ड ट्रंप ने भी हिलेरी क्लिंटन की तारीफ की। हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी डोनाल्ड ट्रंप को अमेरीका का राष्ट्रपति चुने जाने पर बधाई दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने बयान में कहा,  अपने प्रचार अभियान के दौरान आपने (डोनल्ड ट्रम्प) भारत के प्रति जो मित्रता जताई वह सराहनीय है। मोदी ने गर्मजोशी दिखाते हुए कहा कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊँचाई पर ले जाने को आपके (डोनल्ड ट्रम्प) साथ काम करने लिए हम तत्पर हैं। इससे लगता है कि आने वाले समय में अमेरिका के साथ भारत के सम्बन्ध नए आयाम स्थापित करेंग।

70 वर्षीय डोनल्ड ट्रम्प ने भी अपने चुनाव अभियान के समय भारतीय मूल के मतदाताओं को लुभाने की कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी। इसका लाभ चुनावों में डोनल्ड ट्रम्प को पूर्णरुप से मिला है।  डोनल्ड ट्रम्प ने अपने चुनाव अभियान में अपने आप को हिंदुओं का बड़ा फैन बताया इससे अधिकतर भारतीय मूल के हिंदुओं का रुझान डोनल्ड ट्रम्प कि तरफ था। और नतीजों में यह देखने को भी मिला।  डोनल्ड ट्रम्प ने अपने चुनाव अभियान के दौरान कहा था कि अगर वे राष्ट्रपति बने तो भारतीय और हिंदू समुदाय व्हाइट हाउस के सच्चे दोस्त होंगे। इससे हिन्दू समुदाय और भारतीय लोगों में डोनल्ड ट्रम्प की लोकप्रियता बढ़ी है। डोनल्ड ट्रम्प ने भारत के प्रधानमंत्री के बारे में भी कहा था कि वह प्रधानमंत्री मोदी के साथ काम करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लोकप्रिय और महान शख्स बताया था और मोदी की नीतियों की तारीफ भी की थी। अब आने वाले समय में देखने वाला होगा कि मोदी के नेतृत्व में भारत के साथ डोनल्ड ट्रम्प के सम्बन्ध किन ऊंचाइयों पर पहुँचते हैं।
डोनल्ड ट्रम्प ने भारतीय मूल के मतदाताओं का दिल जीतने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मशहूर नारे ाअबकी बार, मोदी सरकारस की तर्ज पर अपना नारा बनाया, 'अबकी बार, ट्रम्प सरकार' क्योंकि डोनल्ड ट्रम्प को भी पता था कि नरेंद्र मोदी भारतीय अप्रवासियों खासकर हिंदुओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। डोनल्ड ट्रम्प ने हिंदुओं के बारे में कहा था कि दुनिया और अमेरिका की संस्कृति के विकास में हिंदू समुदाय का उल्लेखनीय योगदान रहा है। इससे पूरे विश्व के हिंदुओं के बीच डोनल्ड ट्रम्प कि लोकप्रियता बढ़ी है। इसका असर अमेरिका में भी देखने को मिला।
डोनल्ड ट्रम्प ने अपने चुनाव अभियान के दौरान कहा था कि अगर वे राष्ट्रपति बनते हैं तो 'भारत के साथ अमेरिका का व्यापार बढ़ाएंगे'। उन्होंने 'भारत' को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और अमेरिका का सबसे बड़ा सहयोगी बताया था। उन्होंने कहा था कि ट्रंप सरकार के तहत अमेरिका और भारत बेहतर मित्र बनने जा रहे हैं और आने वाले समय में अमेरिका और भारत पक्के दोस्त होंगे। उन्होंने अपने आप को मुक्त व्यापार का पक्षधर बताया था। उन्होंने भारत के साथ अपने अभूतपूर्व भविष्य की कामना करते हुए कहा था कि हम भारत के साथ बहुत व्यापार करेंगे। इससे अमेरिका के साथ भारत के व्यापार के क्षेत्र में भी संभावनाएं प्रबल होंगी। इससे लगता है कि ट्रम्प भारत को चीन को रोकने के लिए अपना अहम साझेदार बनाएंगे।

डोनल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति बनते ही रूस के साथ भी अमेरिका के सम्बन्ध सुधरेंगे। इसका पूरा-पूरा फायदा विश्व स्तर पर भारत को मिलेगा। क्योंकि रूस चुनाव अभियान के समय से ही डोनल्ड ट्रम्प की तारीफ और समर्थन करता रहा है। ट्रंप ने चुनाव प्रचार के समय आर्थिक सुधारों और नौकरशाही में सुधारों के साथ भारत को तेज विकास के मार्ग पर ले जाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा की थी और कहा था कि ऐसा अमेरिका के लिए भी जरूरी है। उन्होंने कहा था कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ काम करने का इंतजार कर हैं। डोनल्ड ट्रंप ने भारत में अपना पूरा यकीन बताया था। उन्होंने भारत और भारत के लोगों को अदभुत बताते हुए अपनी 19 महीने पहले की भारत यात्रा को उल्लेखित करते हुए कहा था कि वो कई बार भारत आना चाहते हैं।
ट्रम्प का चीन के प्रति सख्त रुख भी भारत के पक्ष में जाएगा। ट्रम्प ने अपनी चुनावी सभाओं में कहा था कि वह चीन को अपने पर्यावरण और मजदूरी स्तर को सुधारने के लिए मजबूर करेंगे। चीन को नतीजे भुगतने होंगे। चीन हमेशा से एनएसजी समेत तमाम मसलों पर बार-बार भारत पर दबाव बनाता रहता है। ट्रम्प का राष्ट्रपति चुना जाना एशिया में अपना दबदबा बनाने की कोशिश में जुटे चीन पर शिकंजा कसने के लिहाज से भारत के लिए अच्छा होगा। क्योंकि ट्रम्प चीन को रोकने के लिए भारत के हर रुख का समर्थन करेंगे। वैसे भी ट्रम्प को चीन का धुर विरोधी कहा जाता है।
डोनल्ड ट्रम्प ने अपने प्रचार अभियान के दौरान पाकिस्तान के प्रति भी अपना कड़ा रुख दिखाया था। उन्होंने पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को लेकर चिंता जाहिर करते हुए कहा था कि पाकिस्तान एक अस्थिर देश है और वहां मौजूद परमाणु हथियारों से पूरी दुनिया खतरे में है। ट्रम्प ने कहा था कि  पाकिस्तान ने 9/11 के बाद अमेरिका को कई बार धोखा दिया है। उन्होंने अपने राष्ट्रपति बनने पर पाकिस्तान को हर गलती के लिए सजा देने की बात भी कही थी। इससे लगता है कि पाकिस्तान की तुलना में भारत के प्रति अमेरिका रुख सकारात्मक रहेगा। और इसमें पाकिस्तान से निपटने के लिए भारत अमेरिका का अहम साझीदार बन सकता है। ट्रम्प के रुख को देखकर यही लगता है कि पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए हमेशा उनका भारत को समर्थन रहेगा। डोनल्ड ट्रम्प आने वाले समय में अमेरिका की तरफ से पाकिस्तान को मिलने वाले अनुदान में भी भारी कटौती कर सकते हैं।
डोनल्ड ट्रंप ने आतंकवाद के विरुद्ध अपने चुनाव अभियान के दौरान भारत की मुहिम का भी समर्थन किया था। उन्होंने इस्लामी आतंकवाद शब्द का इस्तेमाल न करने को लेकर अपनी प्रतिद्वंद्वी हिलेरी क्लिंटन की आलोचना करते हुए कहा था कि, 'हम इस बात की सराहना करते हैं कि हमारा अच्छा दोस्त भारत चरमपंथी इस्लामी आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका के साथ रहा है। भारत मुंबई धमाकों समेत आतंकवाद की क्रूरता देख चुका है'। उन्होंने कहा था कि, 'वह एक ऐसी जगह है, जिसे मैं प्यार करता हूं और मैं समझता हूं'। डोनल्ड ट्रंप ने अपने चुनाव अभियान के दौरान आईएसआईएस जैसे क्रूर आतंकवादी संगठन पर भी हमला बोला था। इससे लगता है कि डोनल्ड ट्रंप की नीतियों में आतंकवाद पहले पायदान पर रहेगा। ट्रम्प आतंकवादी संगठन आईएसआईएस के खात्मे के लिए भी अहम कदम उठा सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो आतंकवाद के प्रति भारत की लड़ाई और मजबूत होगी। और इससे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खात्मे के भी आसार बढ़ेंगे। जो कि पूरे विश्व में शान्ति स्थापित करने के लिए अहम होगा।
डोनल्ड ट्रम्प का व्यक्तित्व बेहद मुखर है। वो किसी भी मसले पर अपनी बेबाक राय रखते हैं और दुश्मन के सामने डटकर खड़ा रहना उनकी खासियत है। एशिया में चीन और पाकिस्तान की तुलना में डोनल्ड ट्रम्प और उनकी नीतियां भारत के ज्यादा नजदीक रह सकती हैं।  
आने वाले समय में अमेरिका का एशिया में क्षेत्रीय सुरक्षा पर कड़ा रुख रह सकता है। इसका पूरा फायदा भारत को मिलेगा। चीन को रोकने के लिए डोनल्ड ट्रम्प संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में भारत को स्थायी सदस्यता दिलाने की भरपूर कोशिश करेंगे और एनएसजी पर भी उनका ओबामा की तरह पूरा समर्थन रहेगा। कुल मिलकर कहा जाए तो भारत के प्रति डोनल्ड ट्रम्प का रुख सकारात्मक और मित्रवत रहने की सम्भावना हैं। क्योंकि अमेरिका का हित भी इसी में है। आने वाले समय में भारत के साथ डोनल्ड ट्रम्प का रवैया एक मजबूत मित्र का रहने की है। ऐसा खुद डोनल्ड ट्रम्प भी कह चुके हैं।

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