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December 15, 2016

मंदिर से ज्यादा मजार में आस्था रखते हैं अखिलेश यादव




मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मां कामाख्या के दरबार में आकर भी मां के दर्शन नहीं कर सके। वह बिना दर्शन के ही लौट गए। जिससे मंदिर समिति सहित अन्य लोगो में निराशा हुई। मंदिर समिति को उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री मंदिर में जरूर आएंगे। लेकिन वह आशा उस वक्त निराशा में बदल गई जब उनका काफिला मुख्य गेट के सामने से ही गुजर गया।

मंदिर के पुजारी बृज किशोर मिश्र कहते हैं कि मंदिर में तैयारी भी की गई थी। जब पुलिस ने बैरिंगकटिंग लगाकर दर्शनार्थियों को रोका तब उम्मीद और प्रबल हुई कि शायद मुख्यमंत्री दर्शन करने आए। पर ऐसा नहीं हो सका। मुख्यमंत्री की सभा के मद्देनजर पुलिस व प्रशासन ने मां कामाख्या भवानी मंदिर जाने वाले रास्ते को बंद कर दिया।

अफसरों की चाटुकारिता के चलते श्रद्धालु पूरे दिन हलकान रहे। बताते चले कि मंदिर से चंद कदमों की दूरी पर ही मुख्यमंत्री की सभा थी। बैरिंगकटिंग कराकर रास्ते को अवरुद्ध कर दिया गया। कई जिलों से आए श्रद्धालुओं को मुख्यमंत्री की सभा में पुलिस ने बैठा दिया। उनको दो बजे के बाद दर्शन करने की बात कही गई। जिससे श्रद्धालुओं में आक्रोश के साथ ही मंदिर समिति में नाराजगी व्याप्त है।

बताते चले कि कामाख्या धाम में माता रानी के दर्शन को प्रत्येक सोमवार को भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। यहां कई जिलों के श्रद्धालु आते हैं। सोमवार का दिन होने के कारण दूरदराज से दर्शन करने आए तमाम श्रद्धालु बिना दर्शन किए ही वापस हो गए।वही आज मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बुंदेलखंड के ललित पुर में एक जन सभा को संबोधित करने के लिए गये थे .

सीएम ने बाबा सदन शाह मजार पर पहुंचकर चादर चढ़ाई और देश-प्रदेश की तरक्की और पार्टी की कामयाबी के लिए दुआ की.इससे तो एक बात साफ होती नजर आ रही है कि मुख्यमंत्री जी मंदिर की चौखट पर माथा टेकना पसंद ही नही करते है और वे मजार और मस्जिदों पर माथा टेकना पसंद करते है .इस बात को लेकर क्षेत्रिये लोंगो में काफी नाराजगी है लोंगो का कहना  है कि मां कामख्या का अपमान हुआ है और मां इसका फल 2017 में जरुर देंगी

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