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December 31, 2016

EXCLUSIVE-गजब मुलायम के धोबी पछाड़ से शिवपाल चित, बसपा बैकफुट पर


सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के धोबी पछाड़ से शिवपाल यादव चित हो चुके हैं। सपा की बगावत से बसपा अब बैकफुट पर आ जायेगी। मुलायम सिंह यादव को यू ही नहीं जमीनी नेता माना जाता है उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जिसका जलवा कायम हो उसका नाम मुलायम हो का नारा क्यों लगता है। फिलहाल मुलायम सिंह की रणनीति ने सीएम अखिलेश की सारी बाधा दूर कर दी है। सपा में सीएम अखिलेश व शिवपाल यादव के बीच के बीच जो मनमुटाव था वह 21 जून 2016 को सतह पर आ गया। इसी दिन बाहुबली मुख्तार अंसारी की पार्टी कौएद का सपा में विलय हुआ था जिसका सीएम अखिलेश ने विरोध किया था। इसके बाद सीएम अखिलेश यादव ने विलय की मध्यस्था कराने वाले मुलायम के करीबी नेता बलराम यादव को पार्टी से बाहर कर देते है। इसी के बाद से सपा में वर्चस्व को लेकर सीएम अखिलेश व शिवपाल यादव खुल कर सामने आ गये थे। अभी तक मुलायम सिंह यादव को अधिक दिक्कत नहीं थी लेकिन 15 अगस्त 2016 को मुलायम को तगड़ा झटका लगा था जब उन्हें विवश होकर प्रेस कांफ्रेंस में कहना पड़ा था कि यदि शिवपाल ने इस्तीफा दे दिया तो पार्टी की ऐसी-तैसी हो जायेगी। मीडिया के सामने मुलायम सिंह यादव ने शिवपाल को सबसे खास बताया और सीएम अखिलेश यादव को फटकार लगायी। यहीं से मुलायम सिंह यादव ने धोबी पछाड़ दांव चलना शुरू किया था जिसका अंतिम दांव शनिवार को खेला गया और शिवपाल यादव चित हो गये। जानिए कैसे बेटे के लिए मुलायम सिंह यादव ने बनाया चक्रव्यूह और फंस गये शिवपाल मुलायम सिंह यादव ने सार्वजनिक रूप से सीएम अखिलेश को ही फटकार लगायी और शिवपाल यादव का साथ दिया। एक तरफ सीएम अखिलेश यादव को अपने ढंग से काम करने की छूट थी तो दूसरी तरफ शिवपाल यादव का साथ मुलायम सिंह यादव निभाते गये। इससे संदेश गया कि मुलायम सिंह ने बेटे के लिए अपने भाई को नहीं छोड़ा। अंत में टिकट वितरण को लेकर जब सीएम अखिलेश यादव को सपा से निष्कासित किया गया तो भी मुलायम ने यह साबित किया कि शिवपाल के साथ मुलायम व सपा पार्टी है। शनिवार की सुबह जब शक्ति प्रदर्शन की बात आयी तो भी मुलायम सिंह यादव ने शिवपाल यादव का साथ दिया। भीष्म पितामह की तरह मुलायम सिंह यादव का आशीर्वाद अपने बेटे को मिल रहा था और वह साथ अपने भाई का दे रहे थे। शक्ति प्रदर्शन में सीएम अखिलेश ने साबित कर दिया कि अधिकांश पार्टी के नेता, विधायक व एमएलसी उनके साथ है। मुलायम सिंह का साथ मिलने के बाद भी शिवपाल यादव अपनी ताकत नहीं दिखा पाये। मुलायम सिंह यादव के इसी धोबी पछाड़ से शिवपाल यादव चित हो गये। जिस शिवपाल यादव के इस्तीफे की धमकी देने के बाद मुलायम सिंह यादव ने पार्टी की ऐसी-तैसी होने की बात कही थी वही शिवपाल यादव बिना सपा को छोड़े हुए अपनी ताकत नहीं दिखा पाये। जबकि सीएम अखिलेश ने बड़ा समर्थन जुटा कर साबित किया कि वही मुलायम सिंह यादव व सपा के उत्तराधिकारी है। शिवपाल यादव को उनकी ताकत का अहसास हो गया। मुलायम ने भाई के लिए बेटे को पार्टी से निकाल कर एक संदेश दिया है अब बेटे के लिए शिवपाल यादव अपने भाई मुलायम सिंह यादव का साथ नहीं छोड़ पायेंगे। जानिए कैसे बीएसपी आयेगी बैकफुट पर मुलायम सिंह यादव ने मुस्लिम वोटरों को पार्टी से दूर होने से रोकने के लिए भी खास दांव चला। सपा परिवार का कलह आजम खा के सामने आने के बाद खत्म हुआ। आजम खा पहले मुलायम सिंह से मिले और फिर सीएम अखिलेश से भेंट की। इसके बाद सीएम अखिलेश की वापसी हो गयी। इससे समाज में संदेश दिया कि मुस्लिमों के बड़े नेता आजम खा की सपा पर सबसे अधिक पकड़ है और सपा में ही मुसलमानों की सुनी जाती है, ऐसे में सपा कुनबे की लडाई से नाराज मुस्लिम वोटर जो बीएसपी की तरफ जाने की सोच रहे थे उन्हें अब आजम खा के जरिए रोक कर बीएसपी को झटका दिया जा सकता है। क्या कहते हैं राजनीति विज्ञान के जानकर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के राजनीति विज्ञान के पूर्व हेड प्रो.नंदलाल ने कहा कि सारी घटनाओं को देखे तो साफ हो जाता है कि मुलायम सिंह यादव ने अपने बेटे को हीरो बना कर सपा का सबसे बड़ा नेता बना दिया है। भाई को भी उसकी ताकत दिखायी और संदेश दिया कि सपा में रह कर वह विधायक नहीं जुटा पाये तो पार्टी से बाहर जाकर क्या कर लेते। फिलहाल सपा के नये नेता सीएम अखिलेश बन चुके हैं और अब सपा में मुलायम सिंह के बाद सीएम अखिलेश का ही डंका बजेगा।



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