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December 31, 2016

LIVE: सपा के दंगल में अब अखिलेश के दांव पर नजर, CM आवास पर 210 से ज्यादा MLA, MLC पहुंचने का दावा




यूपी की सत्ताधारी समाजवादी पार्टी में सियासी घमासान लगातार जारी है और सभी की निगाहें अब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के अगले दांव पर टिकी हैं. सपा से निकाले जाने के बाद अखिलेश सीएम आवास पर अपने समर्थक विधायकों के साथ मीटिंग कर रहे हैं. इस बैठक में शामिल होने के लिए सपा से निष्कासित रामगोपाल यादव और धर्मेंद्र यादव भी पहुंच चुके हैं.

इस बीच अखिलेश समर्थकों का दावा है कि इस बैठक के लिए अब तक 210 से 220 एमएलए व एमएससी पहुंच चुके हैं और यह संख्या अभी बढ़ने की उम्मीद है. इस बैठक में शामिल विधायकों से हस्ताक्षर लिए जा रहे हैं और उनके मोबाइल फोन बाहर ही रख लिए जा रहे हैं. सूत्रों के हवाले से खबर है कि अखिलेश इस बैठक में सपा का दामन छोड़ अपनी अलग पार्टी बनाने का ऐलान कर सकते हैं.

मुलायम की मीटिंग में 55 विधायकों के पहुंचने का दावा
वहीं दूसरी तरफ सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह ने भी पार्टी दफ्तार में राज्य संसदीय बोर्ड की बैठक बुलाई है. मुलायम समर्थकों ने इस बैठक के लिए 55 विधायकों के पार्टी दफ्तर पहुंचने का दावा किया है. इस बैठक में शिवपाल यादव के अलावा कमाल यूसुफ, मधुकर जेटली, अशोक वाजपेयी, नारद राय और राजकिशोर सिंह जैसे अहम चेहरे शामिल हुए हैं. वहीं संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद मुलायम पार्टी के मौजूदा विधायकों और उम्मीदवारों के साथ मीटिंग करेंगे. इस बीच वरिष्ठ सपा नेता आजम खान पार्टी अध्यक्ष मुलायम के घर पहुंचे हैं.

अखिलेश और मुलायम समर्थकों में धक्का-मुक्की
इस बीच अखिलेश समर्थक भी नारेबाजी करते हुए सपा दफ्तर की तरफ पहुंच गए, जहां मुलायम समर्थकों के साथ उनकी हल्की झड़प भी हुई. हालांकि पुलिस ने तुरंत बीचबचाव कर उन्हें रोक लिया. वहीं रामगोपाल यादव ने रविवार 1 जनवरी को लखनऊ स्थित आरएमएल लॉ यूनिवर्सिटी में सपा कार्यकर्ताओं की जो आपात बैठक बुलाई थी, उसमें शनिवार को अचानक बदलाव किया गया. बदले हुए कार्यक्रम के तहत अब यह बैठक जनेश्वर मिश्र पार्क में होगी.

अखिलेश को कांग्रेस और आरएलडी का समर्थन
सपा में दो-फाड़ के बीच पिता-पुत्र की अलग-अलग बुलाई इस बैठक को शक्ति परिक्षण के तौर पर देखा जा रहा है और इन बैठकों में शामिल नेताओं की संख्या ही यूपी में आगे की राजनीतिक बिसात तय करेगी. यहां अखिलेश अगर अपनी अलग पार्टी का ऐलान करते हैं, तो गेंद राज्यपाल के पाले में चली जाएगी कि वह विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के लिए कहेंगे. अगर ऐसा होता है तो कांग्रेस, आरएलडी और कुछ निर्दलीय विधायक सीएम अखिलेश यादव का समर्थन करेंगे. सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश और मुलायम की ओर से बुलाई गई विधायकों की बैठक पर कांग्रेस पैनी नजर रखेगी. कांग्रेस यह देखेगी कि अखिलेश के साथ कितने विधायक हैं.

राहुल, अखिलेश और जयंत की बनी तिकड़ी
अब सपा में मुलायम सिंह, कांग्रेस में सोनिया गांधी और आरएलडी में अजीत सिंह नहीं बल्कि अखिलेश, राहुल और जयंत फैसले ले रहे हैं. बताया जाता है कि तीनों आपस में संपर्क में हैं. राहुल और जयंत ने अखिलेश को सपोर्ट करने का भरोसा दिया है. जयंत ने राहुल से बात करने के बाद अखिलेश को संदेश दिया कि हम सब साथ हैं.

सपा के दंगल में अखिलेश-रामगोपाल चित 
बता दें कि यूपी में तेजी से बदलते सियासी घटनाक्रम के तहत सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और अपने भाई रामगोपाल यादव को पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया. अखिलेश द्वारा उम्मीदवारों की अपनी लिस्ट जारी करने, तो वहीं रामगोपाल द्वारा पार्टी का सम्मेलन बुलाने पर मुलायम सिंह ने अनुशासनहीनता करार देते शुक्रवार को यह कार्रवाई की.

बेटे अखिलेश और भाई रामगोपाल के तेवरों से गुस्साए सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने लखनऊ में आनन-फानन में बुलाए गए प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि रामगोपाल अखिलेश यादव को गुमराह कर उनका भविष्य खत्म कर रहे हैं. साथ ही मुलायम ने कहा कि रामगोपाल के बुलाए अधिवेशन में पार्टी नेताओं और मंत्रियों के शामिल होने को भी अनुशासनहीनता माना जाएगा.

अखिलेश ने जारी की थी अपनी अलग लिस्ट
गौरतलब है कि अखिलेश यादव ने गुरुवार को 235 उम्मीदवारों की अपनी अलग लिस्ट जारी कर दी थी, जिसके बाद शिवपाल यादव ने 68 और नाम घोषित कर 403 में से 393 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया. रामगोपाल का कहना है कि शिवपाल की अगुवाई में ऐसे तमाम नेताओं को उम्मीदवार बनाया गया है, जिनकी कोई जमीनी पकड़ नहीं है और चुनाव में उनकी जमानत तक नहीं बचेगी. इसी के खिलाफ आवाज उठाने से निष्कासन का ये गलत कदम उठाया गया है.

वहीं मुख्यमंत्री अखिलेश के करीबी सूत्रों से जो खबरें आ रही हैं, उससे पार्टी के टूट की खबरों को बल मिलता है. मुख्यमंत्री के करीबी सूत्रों के मुताबिक अखिलेश यादव ने कहा, 'हम ही असली समाजवादी पार्टी हैं. नेताजी अभी भी 

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