: "width=1100"' name='viewport'/> बदायूँ एक्सप्रेस | तेज रफ़्तार : 09/13/16

बदायूं में अवैध खनन ने मोड़ दी गंगा की धारा

जिले में बड़े पैमाने पर चल रहा था अवैध खनन_मुख्यमंत्री सख्त हुए तो हरकत में आया प्रशासन



बदायूँ : जिले में लंबे समय से अवैध खनन चल रहा है। इस पर कभी सख्ती से रोक नहीं लगी। कोर्ट ने अवैध खनन की सीबीआई जांच का आदेश दिया तो सूबे की सरकार दबाव में आ गई। जांच शुरू होने के साथ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने खनन मंत्री गायत्री प्रजापति को ही मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया। सीएम के सख्त रुख के बाद प्रशासन भी हरकत में आया है। अवैध खनन के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया गया है। गौर करने वाली बात यह है कि जिले में अवैध खनन की वजह से गंगा की धारा तक मु़ड़ने लगी है।
बदायूं में बालू खनन का एक प्वाइंट कछला में था। अवधि पूरी होने के बाद इसे भी बंद कर दिया गया है। प्वाइंट बंद होने के बाद भी कछला, कादरचौक, उसहैत, हजरतपुर समेत कई थाना क्षेत्रों में अवैध खनन होता रहा। जिले में नरौरा से हजरतपुर तक गंगा करीब 135 किलोमीटर का की दूरी तय करती हैं। गौर करने वाली बात यह है कि अवैध खनन की वजह से गंगा की धारा कासगंज जिले की ओर हट गई है। करीब 200 मीटर तक धारा बदायूं से दूर हुई है। जिले में खनन के प्वाइंट की अवधि पूरी होने के बाद इसे बंद करने के बाद भी खनन होता रहा। बालू की जो ट्रॉली 1000 रुपये की मिलती थी वह अब 3000 रुपये तक पहुंच गई है।
सूबे के खनन मंत्री की बर्खास्ती के बाद प्रशासन ने खनन माफिया के खिलाफ अभियान तो शुरू किया है, लेकिन अभियान कितना कारगर होता है यह देखना बाकी है।

दो नए खनन प्वाइंटर को नहीं मिली मंजूरी

 कछला के खनन प्वाइंट की अवधि पूरी होने के बाद इसे बंद कर दिया गया था। हालांकि, इसकेबाद भी यहां खनन होता रहा। इसके बाद प्रशासन की ओर से शासन को जिले में दो नए खनन प्वाइंट एक कादरचौक और एक उसहैत में खोले जाने का प्रस्ताव भेजा था। शासन ने अब तक इसे स्वीकृति नहीं दी है।
अवैध खनन के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। खनन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वर्तमान में जिले में खनन का कोई प्वाइंट नहीं है। दो प्वाइंट के लिए शासन में प्रस्ताव लंबित हैं।-एके श्रीवास्तव, एडीएम प्रशासन/प्रभारी अधिकारी खनन


हेडमास्टर के खिलाफ गैरजमानती वारंट





बदायूँ : अपहरण के दौरान दुष्कर्म पीड़ित छात्रा की आयु का पता लगाने के लिए कोर्ट द्वारा तलब किए जाने के बाद भी संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक पंजीकरण रजिस्ट्रर के साथ हाजिर नहीं हुए। इस पर कोर्ट ने गैरजमानती वारंट जारी किया है। साथ ही इस मामले में अवमानना का नोटिस जारी करते हुए गुन्नौर के खंड शिक्षाधिकारी और संभल के बीएसए को भी 16 सितंबर को तलब किया गया है।
यह घटना संभल जिले के रजपुरा थाना क्षेत्र में घटी थी। एक प्राथमिक स्कूल की छात्रा का अपहरण कर लिया गया था। अपहरणकर्ताओं ने उसके साथ दुष्कर्म भी किया था। यह मामला बदायूं एसीजेएम द्धितीय अमरजीत के न्यायालय में चल रहा है। कोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद उसकी सुपुदर्गी के बारे में आयु निर्धारण के लिए संबंधित प्राथमिक स्कूल के प्रधानाध्यापक को नौ सितंबर को स्कूल का पंजीकरण रजिस्टर सहित हाजिर होने का आदेश दिया। प्रधानाध्यापक यह कहते हुए कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ कि उसके पास कोर्ट में हाजिर होने संबंधित कोई आदेश नहीं है। ऐसा ही रजपुरा के खंड शिक्षाधिकारी और बीएसए संभल ने भी दोहराया। पंजीकरण रजिस्टर नहीं आने के कारण छात्रा की आयु का निर्धारण नहीं हो सका। जिसकी वजह से उसकी सुपुदर्गी के बारे में भी फैसला नहीं हो पाया। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए प्राथमिक स्कूल मुटैना के प्रधानाध्यापक के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है। साथ ही विवेचक को आदेश दिया है कि वह स्वयं गैरजमानती वारंट का निष्पादन कराए। कोर्ट ने इस मामले में रजपुरा के खंड शिक्षाधिकारी और बीएसए संभल को भी कोर्ट की अवमानना का नोटिस देते हुए 16 सितंबर को व्यक्तिगत कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया है।

दस साल की कड़ी कैद दुष्कर्म के आरोपी को





दातागंज : इलाके में दो साल पहले एक दलित बालिका से हुए दुष्कर्म के किए गए प्रयास में कोर्ट ने आरोपी को दोषी मानते हुए दस साल की कड़ी कैद के साथ ही उस पर 20 हजार का जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माने की धनराशि में से 15 हजार पीड़िता को दिए जाने का आदेश भी सुनाया है।
घटना थाना दातागंज क्षेत्र में घटी थी।  पांच मई 2014 को क्षेत्र के एक व्यक्ति ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि दिन में दोपहर करीब दो बजे जब वह खेत पर था तो गांव के कुछ बच्चों ने खबर दी थी कि उसकी नाबालिग पुत्री को गांव का ही जगपाल पुत्र ब्रजपाल ठाकुर ने पकड़कर अपने घर में ले गया है और उसे बंद कर लिया है। उसने मौके पर पहुंचकर जगपाल का घर खुलवाया तो देखा कि उसकी नाबालिग बेटी बिना कपड़ों के खड़ी थी। जब उसने बेटी से पूछा तो उसने सारी हकीकत बता दी।
स्पेशल जज एससी एसटी एक्ट पंकज कुमार अग्रवाल ने पत्रावली का अवलोकन कर एडीजीसी रईस अहमद और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद दोषी जगपाल को दस साल की कड़ी कैद की सजा सुनाई। साथ ही उस पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला है। इसमें से 15 हजार रुपये पीड़िता को दिए जाने का आदेश है।

रोडवेज चालक को पुलिस ने पीटा

भड़के रोडवेज कर्मियों ने बसें आड़ी-तिरछी करके लगाया जाम 


बदायूँ : शहर को जाम से मुक्त कराने के लिए एसएसपी की मुहिम को अंजाम दे रहे पुलिस कर्मियों ने रोड पर बस खड़ी करने पर चालक को पीट दिया। इसके बाद उसे सिविल लाइंस थाना ले गए। इससे भड़के रोडवेज चालकों और परिचालकों ने बसें आड़ी-तिरछी खड़ी करके जाम लगा दिया। बसों का संचालन करीब तीन घंटे तक बाधित रहा। मामला बढ़ने पर सीओ सिटी और सिटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में फैसला करा दिया गया।
सोमवार को सुबह 10 बजे पुलिस लाइंस चौराहा से रोडवेज चौराहा तक जाम लगा होने पर टीएसआई योगेंद्र यादव ने रोडवेज बस चालक को बस अस्पताल रोड की ओर बढ़ाने के लिए कहा, तो उसने कहा कि वह बस रोडवेज डिपो ले जाएगा, लेकिन डिपो में जगह न होने से बस उसने आगे नहीं बढ़ाई। इसे लेकर बस चालक सगीर अहमद और टीएसआई की बहस होने लगी। इस पर रोडवेज चौकी इंजार्च कामेश कुमार ने भी उसे बस आगे बढ़ाने के लिए कहा। न मानने पर पुलिस कर्मियों ने उसके दो-चार थप्पड़ मार दिए और सिविल लाइंस थाने ले गए।
जानकारी होने पर रोडवेज कर्मी भड़क गए और बसें आड़ी-तिरछी खड़ दीं। इससे जाम लग गया। मामला बिगड़ते देख सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ सिटी की मध्यस्थता में समझौता करा दिया। इससे दोपहर करीब दो बजे से बसों का संचालन शुरू हो सका। इस दौरान यात्रियों को परेशानी हुई।
परेशान रहे महिला, वृद्ध और विकलांग यात्री
बदायूं। रोडवेज चालकों के जाम लगाने की वजह से वहां से रिक्शा तक नहीं गुजर पा रहा था। इस वजह से वृद्ध, विकलांग और महिला यात्रियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। यही नहीं, रोडवेज में विकलांग यात्रियों को छूट होने की वजह से उन लोगों को निजी वाहनों से यात्रा करने में नुकसान होता है। इस वजह से इन यात्रियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा।

रोडवेज को हजारों रुपये का नुकसान 
बकरीद से एक दिन पहले रोडवेज डिपो में करीब तीन घंटे तक कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से बसों का संचालन पूरी तरह से बंद रहा। इससे तमाम बसें समय से संचालित नहीं हो सकीं। इससे परिवहन निगम को कई हजार रुपये का नुकसान हुआ।


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