: "width=1100"' name='viewport'/> बदायूँ एक्सप्रेस | तेज रफ़्तार : 12/15/16

मंदिर से ज्यादा मजार में आस्था रखते हैं अखिलेश यादव




मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मां कामाख्या के दरबार में आकर भी मां के दर्शन नहीं कर सके। वह बिना दर्शन के ही लौट गए। जिससे मंदिर समिति सहित अन्य लोगो में निराशा हुई। मंदिर समिति को उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री मंदिर में जरूर आएंगे। लेकिन वह आशा उस वक्त निराशा में बदल गई जब उनका काफिला मुख्य गेट के सामने से ही गुजर गया।

मंदिर के पुजारी बृज किशोर मिश्र कहते हैं कि मंदिर में तैयारी भी की गई थी। जब पुलिस ने बैरिंगकटिंग लगाकर दर्शनार्थियों को रोका तब उम्मीद और प्रबल हुई कि शायद मुख्यमंत्री दर्शन करने आए। पर ऐसा नहीं हो सका। मुख्यमंत्री की सभा के मद्देनजर पुलिस व प्रशासन ने मां कामाख्या भवानी मंदिर जाने वाले रास्ते को बंद कर दिया।

अफसरों की चाटुकारिता के चलते श्रद्धालु पूरे दिन हलकान रहे। बताते चले कि मंदिर से चंद कदमों की दूरी पर ही मुख्यमंत्री की सभा थी। बैरिंगकटिंग कराकर रास्ते को अवरुद्ध कर दिया गया। कई जिलों से आए श्रद्धालुओं को मुख्यमंत्री की सभा में पुलिस ने बैठा दिया। उनको दो बजे के बाद दर्शन करने की बात कही गई। जिससे श्रद्धालुओं में आक्रोश के साथ ही मंदिर समिति में नाराजगी व्याप्त है।

बताते चले कि कामाख्या धाम में माता रानी के दर्शन को प्रत्येक सोमवार को भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। यहां कई जिलों के श्रद्धालु आते हैं। सोमवार का दिन होने के कारण दूरदराज से दर्शन करने आए तमाम श्रद्धालु बिना दर्शन किए ही वापस हो गए।वही आज मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बुंदेलखंड के ललित पुर में एक जन सभा को संबोधित करने के लिए गये थे .

सीएम ने बाबा सदन शाह मजार पर पहुंचकर चादर चढ़ाई और देश-प्रदेश की तरक्की और पार्टी की कामयाबी के लिए दुआ की.इससे तो एक बात साफ होती नजर आ रही है कि मुख्यमंत्री जी मंदिर की चौखट पर माथा टेकना पसंद ही नही करते है और वे मजार और मस्जिदों पर माथा टेकना पसंद करते है .इस बात को लेकर क्षेत्रिये लोंगो में काफी नाराजगी है लोंगो का कहना  है कि मां कामख्या का अपमान हुआ है और मां इसका फल 2017 में जरुर देंगी

यह बांग्लादेश का है सलमान खान, मरती है इस पर लड़कियां




इन दिनों सोशल मीडिया और यूट्यूब पर एक ऐसा हीरो छाया हुआ है जिसकी लोकप्रियता रजनीकांत, अमिताभ बच्चन और सलमान खान जैसे दिगग्जों को परेशान कर सकती है। ये हीरो इन दिग्गजों की तरह कोई बड़ी फिल्में नहीं करता और ना ही खूबसूरत जगहों पर हीरोइन के साथ रोमांस करता है, फिर भी ये इतना लोकप्रिय है कि इसे बंग्लादेश का सुपरस्टार कहा जाता है क्योंकि बंग्लादेश में ये हीरो काफी मशहूर है।



अब आप सोच रहे होंगे कि भला ये हीरो है कौन ? ये हैं अशरफ्फुल अलोम सईद यानि हीरो अलोम जो आलम बोगरा के नाम से जाने जाते हैं। आलम ने कई फिल्मों में काम किया है और 500 से ज्यादा गाने प्रोड्यूस किए हैं। आलम की लोकप्रियता का आलम ये है कि फैंस ने इनके नाम से फेसबुक पर कई पेज बना रखे हैं और तो और उनके गानों को भी चंद मिनटों में लाखों व्यूज मिल जाते हैं।

बंग्लादेश में लोग आलम को लेकर इस हद तक पागल हैं कि वो उनके साथ सेल्फी तक लेने के लिए आतुर रहते हैं। जिस तरह बॉलीवुड में शाहरुख को रोमांस का बादशाह कहा जाता है, ठीक उसी तरह बंग्लादेश में आलम बोगरा को किंग ऑफ रोमांस माना जाता है। आपको आलम की इस लोकप्रियता पर अचरज हो रहा होगा क्योंकि बाकी कलाकारों की तरह आलम ना तो खूबसूरत हैं और ना ही उनके सिक्स पैक हैं बावजूद उनमें ऐसा हुनर है कि लोग उन्हें देखते ही पागल हो जाते हैं।



बंग्लादेश में लोग आलम को लेकर इस हद तक पागल हैं कि वो उनके साथ सेल्फी तक लेने के लिए आतुर रहते हैं। जिस तरह बॉलीवुड में शाहरुख को रोमांस का बादशाह कहा जाता है, ठीक उसी तरह बंग्लादेश में आलम बोगरा को किंग ऑफ रोमांस माना जाता है। आपको आलम की इस लोकप्रियता पर अचरज हो रहा होगा क्योंकि बाकी कलाकारों की तरह आलम ना तो खूबसूरत हैं और ना ही उनके सिक्स पैक हैं बावजूद उनमें ऐसा हुनर है कि लोग उन्हें देखते ही पागल हो जाते हैं।

अगर यूं कहा जाए कि उनके गाने सिर्फ उनके नाम पर भी चल जाते हैं तो गलत नहीं होगा। हर गाने में आलम के साथ आप एक से एक खूबसूरत हीरोइन को देख सकते हैं जो बिंदास होकर उनके साथ नाचती भी हैं और रोमांस भी करती हैं।

बेटी की शादी पर एक बिजनेसमैन ने बेघर लोगों को तोहफे में दिए 90 मकान




जहां एक तरफ हम अक्सर सुनते हैं कि इस व्यापारी ने और इस राजनेता ने अपने बेटे या बेटी की शादी में करोड़ो खर्च किए वहीं दूसरी तरफ औरंगाबाद के रहने वाले एक व्यापारी ने जो किया है वो वाकई काबिलेतारीफ है।महाराष्ट्र के औरंगाबाद में उद्योगपति मनोज मुनोत ने अपनी बेटी श्रेया की शादी पर करोड़ों खर्च करने के बजाए उन पैसों से बेघर लोगों के लिए 90 मकान बनाकर उन्हें तोहफे में दे दिए।

मनोज ने पहले अपनी बेटी की शादी पर 70 से 80 लाख रुपए खर्च करने का विचार किया था लेकिन बाद में एक दोस्त की सलाह पर उन्होंने शादी में फिजूल खर्च करने की बजाए गरीब लोगों के लिए घर बनाने का फैसला किया। उन्होंने अपनी बेटी की शादी साधारण तौर पर की।वन रूम किचन वाले इन घरों को दो एकड़ जमीन पर दो महीने के अंदर तैयार किया गया, जिसमें करीबन 1.5 करोड़ रुपयों का खर्चा आया। मनोज ने लासूर स्थित अपनी 60 एकड़ जमीन में से 2 एकड़ जमीन पर बेघर लोगों के लिए कॉलोनी तैयार की।


  • अपने इस कदम पर मनोज का कहना है-

“इतिहास में ये एक नए अध्याय की तरह है और मुझे उम्मीद है कि इसी तरह से अन्य लोग भी आगे आएंगे। समाज के प्रति हमारी कुछ जिम्मेदारी है और हमने उसका पालन करने की एक कोशिश की है।”

दुल्हन बनी श्रेया ने भी अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वह अपने पिता के इस फैसले से खुश हैं और ये उनकी शादी का सबसे बेहतरीन तोहफा है।

सर्वे : मुसलमानों से आगे निकले हिन्दू, अयोध्या में सिर्फ राम मंदिर ही बनेगा!





अयोध्या में बाबरी मस्जिद को कारसेवकों की बेकाबू भीड़ ने छह दिसंबर 1992 के दिन गिरा दिया था| तब से इस दिन को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक काला दिन कहा जाता है|

इस घटना को बहुत समय बीत चुका है| मस्जिद गिराए जाने के बाद यूपी में अब नई पीढ़ी जवान हो चुकी है| लेकिन आज भी उत्तर प्रदेश का कोई भी चुनाव इसके जिक्र के बिना पूरा नहीं होता| यानी कि राजनीति के लिहाज से पश्चिम भारत में ये मुद्दा आज भी उतना ही असरदार है, जितना तब था|

साल 2014 के लोक सभा चुनाव की मतदाता सूची पर गौर करें तो यूपी के लगभग 30 प्रतिशत वोटर इस घटना के बाद पैदा हुए हैं| चूँकि, उत्तर प्रदेश में इन दिनों विधानसभा चुनाव का शंखनाद होने ही वाला है, इसलिए फिर एक बार ये सवाल उठ रहे हैं कि इस बार ये मुद्दा कितना प्रभावी होगा? क्या इस घटना के बाद पैदा हुए वोटर इस मुद्दे को उतनी ही तरजीह देंगे, जितना कि पुराने वोटर देते हैं? क्या इस बार भी वोटरों पर इस मुद्दे का वही पुराना जादू चलेगा?

इस मुद्दे पर सेंटर ऑफ डेवलपिंग सोसाइटी (सीएसडीएस) के लिए लोकनीति-सेंटर ने एक सर्वे किया है| पिछले दो दशकों से ज्यादा समय तक इस संस्था ने मंदिर-मस्जिद मुद्दे पर अपनी नजर बनाए रखी है|

इस संस्था ने 1996 में अपने सर्वे में लोगों से पहली बार ये सवाल किया था कि वो गिराई गई मस्जिद की जगह किस चीज का निर्माण चाहते हैं, मंदिर या मस्जिद?

साल 1996 के सर्वे में शामिल 58 प्रतिशत हिंदुओं ने इस जगह पर सिर्फ मंदिर का निर्माण कराने की बात कही थी| जबकि, सर्वे में शामिल करीब 56 प्रतिशत मुसलमानों ने केवल मस्जिद बनाने की बात कही थी|

इसके बाद साल 2002 में हुए एक अन्य सर्वे में भी कुछ इसी तरह के आंकड़े देखने को मिले थे| लेकिन इसके बाद मंदिर-मस्जिद मांग को लेकर यूपी के वोटरों की संख्या कम होने लगी जो साल 2009 तक आते आते काफी कम हो गयी| वोटरों की राय बदलने के साथ ही इससे इतर भी कुछ मुद्दे सामने आए|

साल 2012 के यूपी विधान सभा चुनाव पोस्ट-पोल सर्वे में इस मुद्दे पर सबसे खराब स्थिति रही| इस साल हुए सर्वे में एक-तिहाई से भी कम हिंदुओं और मुसलमानों ने विवादित स्थल पर केवल मंदिर या केवल मस्जिद बनाए जाने की मांग की|

लेकिन साल 2014 से परिस्थितियाँ अचानक बदलने लगीं| इस साल केंद्र में सत्तापरिवर्तन के बाद बीजेपी की सरकार आई| इसके बाद साल 2016 में किए गए ताजा सर्वे में केवल मंदिर की मांग करने वाले हिंदुओं की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, जबकि केवल मस्जिद की मांग करने वाले मुसलमानों की संख्या जस की तस रही है|

यूपी में हुए इस सर्वे में करीब 49 प्रतिशत हिंदुओं ने विवादित स्थल पर सिर्फ मंदिर बनाने की बात की है| जबकि विवादित स्थल पर केवल मस्जिद बनाने की बात करने वाले मुसलामानों की संख्या सिर्फ 28 प्रतिशत रही है|

इसकी मुख्या वजह पिछले कुछ सालों में यूपी के अन्दर हुआ तीखा सांप्रदायिक ध्रुवीकरण है| यूपी में जनवरी 2010 से अप्रैल 2016 के बीच 12000 से अधिक सांप्रदायिक हिंसा के मामले हुए हैं| इन घटनाओं के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश बिंदु रहा है|

साल 2013 में मुजफ्फरनगर दंगों के बाद पचिमी यूपी लगातार सांप्रादायिक राजनीति का गढ़ रहा है| इस दंगे की वजह से कई बार साम्प्रदायिक उन्माद भड़क चुका है| लव जिहाद का मुद्दा भी हिन्दू और मुसलमान के बीच खाई पैदा करने के लिए बड़ा कारण रहा है| इसके बाद दादरी में गोहत्या पर रोक को लेकर अभियान और कैराना से सैकड़ों हिन्दुओं का मुसलमानों के डर से पलायन करना भी बड़ा कारण रहा है| ऐसी घटनाओं का मकसद हिंदुओं में सांप्रदायिक डर बढ़ाना होता है| लगता है कि इसी वजह से मंदिर-मस्जिद मुद्दे पर उनकी राय का ध्रुवीकरण हुआ है|

अब असल मुद्दा ये है कि क्या यूपी में मुसलमान मंदिर-मस्जिद के मुद्दे पर धर्मनिरपेक्ष तरीक से सोचने लगे हैं?

जी नहीं, तमाम तरह की मीडिया रिपोर्ट्स पर गौर करें तो यह बात निकल कर सामने आती है कि मुसलमानों की राय में अचानक आया ये परिवर्तन लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए और भी ज्यादा खतरनाक है| यूपी के मुसलमानों का एक बड़ा तबका इस बात की उम्मीद छोड़ चुका है कि अयोध्या में कभी मस्जिद भी बनेगी| इसका दूसरा कारण केंद्र में सत्तासीन बीजेपी की सरकार का होना भी हो सकता है जो विशुद्ध रूप से हिंदुत्व वादी विचारधारा पर चलती है|

मंदिर-मस्जिद मुद्दे पर एकएक बदले रुझान का एक पहलू ये भी है कि शिक्षित हिंदू नौजवानों में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण बड़ी ही तेजी के साथ हुआ है| क्योंकि, साल 2014 के लोक सभा चुनाव में बीजेपी ने भले ही विकास और सुशासन को चुनावी मुद्दा बनाया हो लेकिन अंदरखाने हिंदुत्ववादी भावनाओं के आधार पर ही वोटों की गोलबंदी हुई थी| 2016 के आंकड़ों से पता चलता है कि बीजेपी के वोटरों में ज्यादातर केवल मंदिर निर्माण की चाहत रखते हैं|

कुछ भी हो लेकिन बीजेपी और केंद्र की राजनीति के लिए सबसे अहम माना जाने वाला मंदिर-मस्जिद मुद्दा क्या कमाल दिखाएगा ये तो समय आने पर ही पता चलेगा| लेकिन सरकार को सभी वर्गों और तबकों के हितों की सुरक्षा पर जरूर ध्यान देने की जरूरत है| क्योंकि देश के अन्दर रहने वाला प्रत्येक नागरिक एक समान है|

बीजेपी ने खरीदी टीवीएस कंपनी की 248 बाइक




यूपी के गोरखपुर जिले के जंगल चंवरी में बीजेपी के स्टीकर लगी टीवीएस कंपनी की 248 बाइक खड़ी हैं, जिस बारे में बीजेपी नेताओं से पूछे जाने पर उन्होंने इस मामले से अपना पल्ला झाड़ लिया है। जबकि सूत्रों के मुताबिक, करीब 188 बाइकों का पंजीयन बीजेपी के क्षेत्रीय कार्यालय गोरखपुर के बेनीगंज नाम पर किया गया है।
बीजेपी बेनीगंज के नाम पर 188 टीवीएस स्पोक बाइक का पंजीयन कराया गया है। गाड़ियों की कुल संख्या 248 है, जिनमें से 188 बेनीगंज के पार्टी कार्यालय के नाम पंजीकृत हैं। वहीँ बीजेपी नेताओं ने पूरे मामले पर अपना पल्ला झाड़ लिया है। सभी 245 बाइक और 3 स्कूटी गोरखपुर में खोराबार इलाके में पड़ने वाले जंगल सिकरी गांव में रखी गयी हैं। यह जगह जंगल और फोरलेन के किनारे स्थित है। एक बिल्डर के खाली पड़े प्लाट में टेंट लगाकर गाड़ियों को रखा गया है। सभी गाड़ियां सफ़ेद कलर की हैं, साथ ही उनकी पेट्रोल टंकी पर कमल के फूल का निशान है।

वहीँ जिन लोगों ने गाड़ियों पर स्टीकर लगाये हैं, उन्हें भी ये अंदाजा नहीं है कि, गाड़ियाँ किसकी हैं। वहीँ सूत्रों की मानें तो इन बाइक का इस्तेमाल आगामी विधानसभा चुनाव में किया जायेगा।जंगल सिकरी में खड़ी सभी 248 बाइक्स का रजिस्ट्रेशन गोरखपुर आरटीओ से किया गया है। सभी गाड़ियों को बाइक गोरखपुर प्राइवेट लिमिटेड बशारतपुर शाहपुर से लिया गया है। वहीँ एक गाड़ी के रजिस्ट्रेशन की कीमत 2668 रुपये है। सभी बाइक्स को आरटीओ से यूपी 53 सीएच सीरीज का नंबर मिला है।सभी 248 बाइक्स की कुल कीमत 92 लाख रुपये है। एक बाइक की कीमत 37105 रुपये है।

एक ओर जहाँ देश की जनता नोटबंदी की वजह से परेशान है।वहीँ भाजपा द्वारा इतनी बड़ी संख्या में बाइक्स खरीदना बेहद संदेहास्पद है। इतना ही नहीं सभी भाजपा नेताओं द्वारा इस मामले में पूरी तरह से पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। आखिर क्या है सच इस मामले का?

संसद के दोनों सदनों में हंगामा जारी होने से आडवाणी दे सकते है इस्तीफा





हम आपको बता दे की संसद का शीतकालीन सत्र समाप्ति के करीब पहुंच गया है, और शुक्रवार को ही खत्म होने जा रहा है, लेकिन नोटबंदी के चलते राज्यसभा और लोकसभा से पूरे सत्र के दौरान सिर्फ हंगामा ही सुर्खियों में रहा है इस बात से को लेकर संसद में जारी गतिरोध पर लालकृष्ण आडवाणी ने दूसरी बार नाराजगी जाहिर की है। बीजेपी के सीनियर लीडर गुस्से का इज़हार करते हुए कहा, “यदि शुक्रवार को लोकसभा नोटबंदी के मुद्दे पर चर्चा किए बिना अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गई तो संसद हार जाएगी और हम सबकी बहुत बदनामी होगी…” यही नहीं, इसके बाद उन्होंने यहां तक कहा कि ”ऐसा महसूस हो रहा है कि मैं सांसद की पोस्ट से रिजाइन कर दूं।

कम उम्र में ही मां बनना चाहती थी ये हॉट एक्ट्रेस




हॉलीवुड अभिनेत्री निकोल किडमैन का कहना है कि वह बहुत कम आयु में ही बच्चे के बारे में सोचने लगी थीं। वेबसाइट ‘मिरर डॉट कॉ डॉट यूके’ के मुताबिक, 49 वर्षीया अभिनेत्री का कहना है कि कम आयु में ही मातृत्व की भावना उनके अंदर जागने लगी थी और वह जानती थीं कि जल्द ही उनके बच्चे होंगे।पूर्व पति अभिनेता टॉम क्रूज से शादी के बाद निकोल किडमैन ने दो बच्चों इजाबेला और कॉनर को गोद लिया था और गायक पति कीथ अर्बन से उनकी दो बेटियां फेथ और संडे रोज हैं।

अभिनेत्री ने पत्रिका ‘वोग’ (ऑस्ट्रेलिया) को बताया कि मैं हमेशा से जानती थीं कि मैं गोद लूंगी क्योंकि मैं बस बच्चा चाहती थी। मुझे लगता है कि बहुत कम आयु से ही मैं बच्चे चाहती थी।किडमैन के मुताबिक, वह इस बात को लेकर सुनिश्चित नहीं थी कि वह बच्चों को जन्म देंगी और कम आयु में ही बच्चे गोद ले लिए।

कहीं भारत के नक्शे से गायब न हो जाए उत्तराखंड !





देहरादून। उत्तराखंड में पहले आग ने जंगलों को खाक कर दिया। उसके बाद भारी बारिश ने लोगों की जान ली, और अब खबर आ रही है कि प्रदेश में भयानक भूकंप आने वाला है। ये Earthquake इतना तेज़ होगा कि शायद भारत के नक्शे से पूरा प्रदेश की गायब हो जाए। इसका खुलासा एक रिपोर्ट में किया गया है।

Earthquake से पूरा देश होगा प्रभावित
उत्तराखण्ड भूकंपीय क्षेत्र में स्थित है और किसी भी समय बेहद शक्तिशाली Earthquake की चपेट में आ सकता है। हालांकि इन रिपोर्ट्स में निश्चित समय का जिक्र नहीं किया गया है। लेकिन आशंका है कि यह भूकंप जनवरी में आ सकता है।

विज्ञान प्रौद्योगिकी और भू विज्ञान राज्य मंत्री वाइएस चौधरी ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में बताते हुए कहा कि उत्तराखण्ड के हिमालयी क्षेत्र पर सिंगापुर की भू वेधशाला ने कई शोध पत्र जारी किए हैं। जो बताते हैं कि यह केंद्रीय भूकंपीय क्षेत्र में स्थित है और पिछले 500 सालों के दौरान इस इलाके में कोई भी बड़ा भूकंप नहीं आया है। ऐसे में बड़ी संभावना है कि हाल के सालों में किसी बेहद शक्तिशाली भूकंप का सामना करना पड़ जाए।
वहीं अमेरिकी वैज्ञानिक साइमन क्लैम्परर ने कहा कि बड़ा भूकंप 80 से सौ साल के बाद आता है। मध्य हिमालय क्षेत्र में बड़ा भूकंप आए 213 साल बीत चुके हैं। वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के शोध में Earthquake पट्टियों के सक्रिय होने की पुष्टि हुई है। पट्टियों की सक्रियता हिमालय क्षेत्र में बड़े भूकंप की आशंका बढ़ा रही है।

हिमालय क्षेत्र में बड़ा Earthquake 1803 में आया था

इस क्षेत्र में आए भूकंपों का अध्ययन हो रहा है। इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग ने स्थिति का अध्ययन और आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन के संबंध में काम शुरू कर दिया है। वैज्ञानिकों के अनुसार मध्य हिमालय क्षेत्र में बड़ा भूकंप 1803 साल में आया था। इसके झटके से दिल्ली में कुतुब मीनार का ऊपरी हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ था। इसके साथ ही मथुरा  और आसपास के क्षेत्र में नुकसान हुआ था। इस भूकंप का केंद्र उत्तरकाशी के पास था। इसके बाद इस क्षेत्र में कोई बड़ा भूकंप नहीं आया। इसी वजह से वैज्ञानिक एक और बड़े भूकंप को लेकर आशंकित हैं।

CM अखिलेश का बड़ा तोहफा, सूबे में चलेंगी एयर एंबुलेंस हेलिकॉप्टर से अस्पताल पहुंचाए जाएंगे मरीज





सीएम अखिलेश यादव सूबे को एक और तोहफा देने वाले हैं। उत्तर प्रदेश में मेट्रो की शुरुआत उन्होंने पहले ही कर दी है। अब वह यूपी में मरीजों के लिये एयर एंबुलेंस की शुरुआत करने जा रहे हैं। यह एयर एंबुलेंस बड़ी बीमारियों पर तत्काल हवा में उड़कर अस्पताल पहुंचा देगी। इससे मरीजों को समय रहते इलाज मिलेगा और उन्हें बचाय जा सकेगा।

इलाहाबाद पहुंचे सूबे के स्वास्थ्य मंत्री शिवकांत ओझा ने बताया कि प्रदेश की अखिलेश सरकार यूरोप और अमेरिका की तर्ज पर स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ावा देने के मिशन पर काम कर रही है। यह पूरे देश में केवल उत्तर प्रदेश में हो रहा है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग को सुसज्जित और उत्कृष्ठ बनान के लिये सरकार कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर काम कर रही है। इन योजनाओं के पूरा होने पर निश्चित ही सूबे की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरे देश में सबसे अच्छी होगी
निशुल्क होगी एयर एंबुलेंस सेवास्वास्थ्य मंत्री शिवकांत ओझा ने बताया कि मेट्रो रेल के तोहफे के बाद अब सीएम अखिलेश यादव सरकार उत्तर प्रदेश की जनता को एयर एंबुलेंस की सौगात देगी। हवा में उड़ता हुआ यह एंबुलेंस दुनिया के आधुनिक एयर एंबुलेंस को टक्कर देने वाला होगा। इसका इस्तेमाल बड़ी और गंभीर बीमारियों के मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिये किया जाएगा। इसक चलते अब इलाज के अभाव में गंभीर बीमारियों के केस बिगड़ने का चांस कम होगा। उन्होंने बताया कि एयर एंबुलेंस उत्तर प्रदेश सरकार विदेशी कंपनियों के साथ मिलकर संचालित करेगी। इसमें एक डॉक्टर की तैनाती रहेगी। डॉक्टर के अलावा एयर एंबुलेंस में इलाज के लिये भी पूरी व्यवस्था होगी। यह सेवा आम लोगों के लिये है इसलिये यह बिल्कुल निशुल्क होगी।

डॉक्टर ऑन कॉल सेवा की होगी शुरुआतउन्होंने बताया कि अब सूबे में इलाज के अभाव में मौतों की संख्या तेजी से कम करने की कोशिश में यूपी की सरकार जुटी है। इसके लिये डॉक्टरों की कमी को पूरा करने की कोशिश की जा रही है। इसी सिलसिले से दूर दराज और शहरी क्षेत्रों के लिये सरकार डॉक्टर ऑन कॉल सेवा का शुभारंभ करने जा रही है। फिलहाल 115 मोबाइल वैन के साथ इस सेवा की शुरुआत होगी। इसके माध्यम से एक फोन कॉल पर डॉक्टर आपके पास उपलब्ध होगा।

नाबालिग ने लिखा खत, मम्मी को मेरे मामा ने गायब कर दिया और निर्दोष पापा जेल में





बनारस। ‘ पुलिस अंकल मेरी मम्मी को मेरे मामा ने गायब कर दिया है और मेरे निर्दोष पापा पिछले 10 महीने से जेल में है। हमारा अब कोई सहारा नहीं है इसलिए मुझे इच्छा मृत्यु की इजाज़त दे दीजिये।’ ये इबारत लिखकर बुधवार को आई जी ज़ोन एस के भगत के ऑफिस पर चंदौली जनपद की रहने वाली 13 वर्षीय आकांक्षा पाण्डेय पहुंची तो प्रशासनिक अमले में खलबली मच गयी। मामले को तुरंत संज्ञान में लेते हुए डीआईजी विजय भूषण ने एक राजपत्रित अधिकारी जांच के लिए नियुक्त कर जांच के आदेश दे दिए है।

चंदौली के बर्थारा ग्राम निवासी ओमप्रकाश पाण्डेय की बड़ी पुत्री आकांक्षा पाण्डेय (13 वर्ष) बुधवार सुबह अपने लिए इच्छा मृत्यु की मांग के साथ आई जी ज़ोन कार्यालय पहुंची। इतनी छोटी सी उम्र में इच्छा मृत्यु की मांग आखिर क्यों ? इस सम्बन्ध में आकांक्षा ने बताया कि ‘ हमारे पिता ओमप्रकाश पाण्डेय को पिच्च्ले साल दिसंबर माह में पुलिस पकड ले गयी और तब से वो जेल में हैं। जिस दिन वो जेल में गये उसके दो दिन पहले मम्मी गुडिया देवी भी घर से नाना की तबियत खराब होने और उन्हें देखने जाने की बात कहकर मामा के साथ गयी तो आज तक नहीं लौटी। बाद में पता चला कि पापा को मम्मी के अपहरण के मामले में जेल भेजा गया है। जबकि मम्मी हमसे कहकर हमारे मामा चंद्रशेखर तिवारी के साथ नाना के घर गयी थी। जिसकी मै चश्मदीद हूं। मेरा इस सम्बन्ध में 5 बार बयान थाना चंदौली में दर्ज होने कि तारीख़ दी गयी पर एक बार भी थाने पर हमारा बयान दर्ज नहीं किया गया।

पिछले 10  महीने से हम और मेरी छोटी बहन और छोटा भाई दादी के पास रहते है। वो किसी तरह हमें दो वक़्त की रोटी दे रही है। पैसे के अभाव में हमारी पढ़ाई भी छूट चुकी है। हम आज यहां आई जी ज़ोन से मिलकर अपने पिता के लिए न्याय या अपने लिए इच्छा मृत्यु की मांग करने आयें है। आकांक्षा के साथ आये वकील मयंक कुमार सिंह ने बताया कि 14 नवम्बर 2015 को आकांक्षा की मम्मी गुडिया देवी आकांक्षा के अनुसार अपने मामा के साथ गयी थी, लेकिन आकांक्षा के मामा चंद्रशेखर ने ओमप्रकाश पाण्डेय के ऊपर दहेज़ प्रताड़ना का मुकदमा 15 दिसंबर को लिखवा दिया। जिसमे बाद में अपहरण की धारा 364 बढ़ा दी गयी है। जबकि आकांक्षा के अनुसार उसकी मम्मी मामा के साथ गयी थी। अतः आज हम यहां न्याय की आस में आयें है।

इस सम्बन्ध में डीआईजी विजय भूषण ने बताया कि ‘ एक नाबालिग लड़की अपनी इक्छा मृत्यु के लिए आई जी ज़ोन के ऑफिस पहुंची थी। जिसकी समस्या को सुनकर एसपी चंदौली से बात हुई है। प्रारंभिक जांच के बाद एक राजपत्रित अधिकारी को इस प्रकरण की जांच के लिए नियुक्त किया गया है। जांच के बाद दोषियों के ऊपर सख्त कार्यावाही होगी।

सपा सरकार का यह मंत्री रहता है झोपड़ी में…





उत्तर-प्रदेश के बहराइच जिले के एक राज्य मंत्री एेसे भी हैं जो किसी आलीशान बंगला नहीं घासफूस से बनी झोपड़ी में रहते हैं। एमएलए बेमिसाल का खिताब जीत चुके इस मंत्री का नाम है बंशीधर बौद्ध।
बंशीधर बौद्ध बहराइच के बलहा में हुए उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार को हराकर विधायक बने थे। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अक्टूबर में अपनी कैबिनेट का विस्तार करते हुए 21 नए मंत्रियों को कैबिनेट में शामिल किया था। इसमें साफ छवि के बलहा से विधायक बंशीधर बौद्ध भी थे जिन्हें उनकी ईमानदारी से प्रभावित होते हुए सीएम अखिलेश ने अपनी कैबिनेट में जगह दी थी।

दैनिक राशिफल 15/12/2016



मेष
भाग्यवश लाभ होगा। व्यापार में आपकी कल्पना के अनुसार परिणाम आएंगे। यात्रा सफल होगी। सोच-समझकर लिए गए निर्णय शुभ फल देंगे।


  वृष
व्यापार अच्छा चलेगा। ख्याति भी मिलेगी। खान-पान में अनियमितता से कष्ट हो सकता है। साहित्य पठन व सृजन में रुचि बढ़ेगी।

  मिथुन
व्यापार में उन्नति के योग हैं। व्यापारिक या निजी कार्य से की गई यात्रा लाभदायक हो सकती है। संतान के भविष्य की चिंता रह सकती है।


 कर्क
विवाह के प्रस्ताव आएंगे। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। स्वजनों, मित्रों से मतभेद हो सकते हैं। जीवनसाथी की भावनाओं का अपमान न करें।


  सिंह
आजीविका के क्षेत्र में आपकी योजना कारगर होगी। प्रयास करने से रुका धन मिलेगा। प्रतिष्ठित व्यक्तियों की उदारता कार्यक्षमता में वृद्धि करेगी।
 

  कन्या
साझेदारी में नवीन प्रस्ताव भविष्य में लाभदायक रहेंगे। बुरी आदतों पर नियंत्रण रखें। जीवनसाथी के सहयोग से पारिवारिक समस्याएं हल हो सकेंगी।

  तुला
आजीविका के क्षेत्र में योजनाएं सफल होंगी। खर्चों में आवश्यकता से अधिक बढ़ोतरी न करें। धन लाभ होगा। संतान की तरक्की से मन प्रसन्न रहेगा।
 
वृश्चिक
कार्यक्षेत्र में लाभदायक सौदे होंगे। सामाजिक दायरा बढ़ेगा। धार्मिक रुचि बढ़ेगी। दिनचर्या व्यस्त एवं व्यवस्थित रहेगी। हर क्षेत्र में सम्मान मिलेगा।

   धनु
गुस्से पर काबू रखना होगा। मकान की समस्या का समाधान संभव है। व्यापार में लाभदायी अनुबंध होंगे। अपनी वस्तुओं को संभालकर रखें।


  मकर
पारिवारिक जीवन संतोषप्रद रहेगा। नौकरी में हालात सुधरेंगे। सुख-साधनों में वृद्धिकारक योग हैं। अपने काम से काम रखें। अनायास लाभ के योग हैं।


  कुंभ
व्यवहारकुशलता कार्य में सफलता देगी। अपनी बुद्धि से प्रयत्न करेंगे तो लाभ होगा। किसी सूचना से प्रसन्नता मिलेगी। आवश्यक खरीदी होगी।


  मीन
इच्छाओं की पूर्ति हो सकेगी। खर्च अधिक होंगे लेकिन आमदनी से पूरे पड़ते रहेंगे। स्वास्थ्य खराब हो सकता है। दूसरों की देखादेखी नहीं करें।

zhakkas

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