: "width=1100"' name='viewport'/> बदायूँ एक्सप्रेस | तेज रफ़्तार : 12/19/16

आप और कांग्रेस अय्याशों की पार्टियां



भाजपा सांसद और बीसीसीअाई के अध्‍यक्ष अनुराग ठाकुर ने कहा कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस अय्याशों की पार्टियां हैं। पंजाब में ‘आप’ के चार सासंदों में से दो साथ छोड़ गए। एक कुछ बोलता नहीं, दूसरा पीकर ही बोलता है। जो पीकर बोलता है, वह तो संसद में भी पीकर चला जाता है। उसे कुछ पता ही नहीं होता।
उन्‍होंने यहां भाजयुमो की रैली में आम आदमी पार्टी के सांसदों पर जमकर कटाक्ष किए। उन्‍होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पंजाब प्रदेश कांग्रंस प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह को भी आड़े हाथ लिया। उन्होंने ‘आप’ और कांग्रेस को अय्याशों की पार्टी करार दिया।
पाखंडों से पाप बनता है, ‘आप’ नहीं
अनुराग ने कहा कि केजरीवाल पहले दिल्ली को डुबो चुके हैैं और अब पंजाब को डुबाने की कोशिश कर रहे हैैं। उनके आधे से ज्यादा विधायकों पर भ्रष्टाचार और अन्य मामलों के आरोप में केस दर्ज हैैं। ‘आप’ के नेताओं को पाखंडी करार देते हुए उन्होंने कहा कि पाखंडों से पाप बनता है, ‘आप’ नहीं।
कैप्टन को बताया शराबी
उन्‍होंने कहा कि यही हाल कैप्टन का है। जब हमारी दोपहर होती है, तब उनकी सुबह होती है। शाम को जब हम अपना काम खत्म करके लौटने की तैयारी करते हैैं, तो कैप्टन साहब की महफिल सजनी शुरू होती है। कैप्टन के लोकसभा की सदस्‍यता से इस्तीफे पर अनुराग ने कहा कि वह कभी संसद आते ही नहीं थे। जब वह विधायक थे, तो विधानसभा नहीं आते थे। ढाई साल से अमृतसर के सांसद हैैं, लेकिन न गए और न ही कभी कोई काम किया। अमृतसर की काया तो अकाली-भाजपा सरकार ने ही बदली है।
राहुल गांधी को किया चैलेंज
उन्‍होंने कहा कि नोटबंदी के बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि उनके पास प्रधानमंत्री के खिलाफ घोटाले हैैं, जिसका वह खुलासा करेंगे। अनुराग ने राहुल को चुनौती देते हुए कहा कि उनमें दम हैै तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक भी आरोप लगाकर दिखाएं। वह तो संसद में भी बहस से भाग खड़े हुए। उनके पास जब कुछ नहीं था, तो पीएम के खिलाफ सबूत पेश करने का शिगूफा छोड़ दिया।
अनुराग ने कहा कि वह तो अाधे से अधिक समय संसद में नहीं होते और यदि उपस्थित होते हैैं, तो सोते रहते हैैं। उन्हें कुछ पता ही नहीं होता। कांग्रेस और ‘आप’ दोनों ही कालाधन वालों के समर्थन में हैैं। प्रधानमंत्री जो भी कालाधन निकलवाएंगे, वह गरीब कल्याण कोष के मार्फत गरीबों पर खर्च होगा।

हैदराबाद बम ब्‍लास्‍ट : यासीन भटकल सहित 5 आतंकियों को सजा-ए-मौत




2013 में हुए हैदराबाद बम ब्‍लास्‍ट मामले में इंडियन मुजाहिद्दीन (आईएम) के आतंकवादी यासीन भटकल सहित चार अन्‍य आतंकियों को सजा-ए-मौत की सजा सुनाई गई है|

सोमवार को राष्‍ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के स्‍पेशल कोर्ट ने इन लोगों को यह सजा सुनाई है| भटकल के अलावा अन्‍य चार लोग जिन्हें यह सजा मिली है वो भी आईएम से जुड़े हुए हैं| एनआईए कोर्ट 13 नवंबर को इन लोगों को मामले में दोषी पाया था|
हैदराबाद के दिलसुखनगर में 21 फरवरी 2013 को दो बम ब्‍लास्‍ट हुए थे। इसमें लगभग 17 लोगों की जान गई थी और 131 से ज्यादा लोग घायल हुए थे|

भूल जाईये 2G, 3G और 4G अब जल्द आ रहा है 5G





चीन ने लगभग 100 शहरों में दूरसंचार की 5वीं पीढ़ी यानी 5G टैक्नोलॉजी के दूरसंचार उपकरणों का परीक्षण शुरू किया है। हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मोर्निंग पोस्ट ने बर्नस्टेन रिसर्च की रिपोर्ट के आधार पर इस आशय की खबर प्रकाशित की है। चीन ग्राहकों की संख्या के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ा दूरसंचार बाजार है और वह सेल्यूलर फोन प्रणालियों में अगली पीढ़ी की दौड़ में आगे रहना चाहता है। चीन में 1.3 अरब फोन यूजर में से 30% 4G टैक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं।

दूरसंचार की 5G टैक्नोलॉजी मौजूदा 4G टैक्नोलॉजी की तुलना में 20 गुना तेज होगी और इसमें ‘डेटा लोस’ बहुत कम होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि 5G टैक्नोलॉजी के परीक्षण के साथ अधिक उपयोक्ता व हाइस्पीड डेटा में सक्षम एंटीना प्रणाली का भी परीक्षण किया जा रहा है।

इंडस्ट्री एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मिनिस्ट्री (MIIT) के मुताबिक, चीन में 1.3 अरब मोबाइल फोन यूजर्स हैं। करीब 30 फीसद यूजर्स 4G नेटवर्क यूज करते हैं। हाई स्पीड 5G नेटवर्क 1 सेकेंड में 20 गीगाबाइट्स तक की स्पीड पकड़ सकेगा। यह 4G की मौजूदा स्पीड से 1 Gbps ज्यादा है। इसके अलावा, एप को क्लिक करने के बाद मिलने वाले रिस्पॉन्स टाइम में भी कमी आएगी। 5G में यह टाइम 1 मिली सेकेंड या उससे भी कम होगा, जबकि 4जी पर यह 10 मिली सेकेंड है।
चाइना मोबाइल पहले ही यह एलान कर चुकी है कि 2020 तक वह देश में 5G नेटवर्क सर्विस लॉन्च कर देगी। मिनिस्ट्री 5G से जुड़े रिसर्च और जांच का काम 2018 तक पूरा कर लेगी।

भारत में कब आएगा 5G –  दूरसंचार सचिव जेएस दीपक ने हाल ही में कहा था कि हम इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) में प्रवेश कर रहे हैं, ऐसे में इस बात की संभावना है कि देश को 5G शेष दुनिया के साथ मिले। दीपक ने कहा, “हमें 2G शेष दुनिया से 25 साल बाद मिला, कम से कम विकसित दुनिया से। इसी तरह हमें 3G उस समय मिला जबकि एक दशक पहले यह अमेरिका और यूरोप पहुंच चुका है। इसी तरह 4G उसे वैश्विक रूप से पेश किए जाने के पांच वर्ष बाद हमारे पास पहुंचा। 5जी के मामले में ऐसी संभावना है कि यह हमें शेष दुनिया के साथ ही मिलेगा।”

BSNL ने पेश किया 149रु. में अनलिमिटेड वॉयस कॉल और फ्री डेटा प्लान




बीएसएनएल के इस 149 रु. के ऑफर में फ्री वॉयस कॉल और डेटा की सुविधा दी जा रही है। बीएसएनएल का यह नया मंथली ‘टैरिफ प्लान’ एक जनवरी से पेश किए जाने की उम्मीद है। इससे बीएसएनएल को रिलायंस इंडस्ट्रीज की टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो से मुकाबला करने में मदद मिलेगी, जिसकी एंट्री से देश की टेलीकॉम कंपनियों के लिए चुनौती बढ़ गई है रिलायंस जियो को टक्कर देने के लिए सार्वजनिक कंपनी बीएसएनएल ने नया अनलिमिटेड वॉयस कॉल प्लान ऑफर किया है। इससे पहले अन्य मौजूद टेलीकॉम कंपनियों ने अनलिमिटेड वॉइस कॉल और फ्री डेटा प्लान लॉन्च किया था।

वेबसाइट के रिपोटर के अनुसार, श्रीवास्तव ने कहा कि बाजार में उनके 10 प्रतिशत ग्राहक है जिसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य है। उन्होंने यह भी कहा कि एक समय था जब हम पहले नंबर पर हुआ करते थे, जो आज खिसक कर 6ठे नंबर पर पहुंच गए हैं।
 इससे पहले कंपनी ने बीएसएनएल से बीएसएनएल नेटवर्क पर बात करने के लिए सिर्फ 99 रुपए में अनलिमिटेड कॉल का प्लान लॉन्च किया था। हालांकि यह प्लान कोलकाता टीडी, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, असम, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र और राजस्थान में नेटवर्क के अंदर किए जाने वाले कॉल्स के लिए ही उपलब्ध है।

देश की राजनीति की दु:खद स्थिति




विपक्ष की पीड़ा को और उसके 'मन की बात' को मोदी को समझना ही होगा, अन्यथा इतिहास उन्हें वैसे ही समीक्षित करेगा-जैसे कई मुद्दों पर आज नेहरू को लोग समीक्षित करते हैं। यह उचित नहीं कहा जा सकता कि भारत का प्रधानमंत्री विदेशों में भी अपने विपक्ष पर हमला बोले या उसके लिए तीखी बात कहें, माना कि पीएम दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल, बसपा सुप्रीमो मायावती, उत्तर प्रदेश के एक मंत्री आजमखान और ऐसे ही कई अन्य नेताओं के 'बिगड़े हुए बोलों' का जवाब न देकर अपनी गरिमा और धैर्य का परिचय दे रहे हैं, परंतु उनसे यह भी अपेक्षा है कि वे संसद का कीमती समय नष्ट न हो इसके लिए विपक्ष का सहयोग और साथ लेने के लिए भी गंभीर दिखने चाहिए थे। अब अगस्ता में सोनिया गांधी को लपेटने की तैयारी है-हमारा इस पर भी यह कहना है कि यदि सोनिया वास्तव में इस प्रकरण में फंस रही हैं तो ही उन्हें फंसाया जाए, परंतु यदि बोफोर्स की भांति उन्हें केवल फंसाने के लिए फंसाया जा रहा है तो लोकतंत्र की मर्यादा का पालन आवश्यक है, अर्थात सरकार ऐसी परिस्थिति में अपने कदम पीछे हटाये।

अब कांग्रेस पर आते हैं। इसके वर्तमान नेता चाहे खडग़े हों या चाहे सोनिया अथवा मनमोहन हों, पर इन तीनों के बारे में यह सत्य है कि अब ये शरीर से चाहें संसद में बैठे हैं पर भाजपा के लालकृष्ण आडवाणी की भांति अब ये तीनों ही बीते दिनों की बात हो चुके हैं। अब कांग्रेस में राहुल गांधी का युग है। यह दुख का विषय है कि कांग्रेस का यह युवा चेहरा देश के युवाओं को अपने साथ नही लगा पाया है। लोग इस चेहरे से निकलने वाले शब्दों को सुनते तो हैं पर उन्हें सुनकर उन पर हंस पड़ते हैं, अपेक्षित गंभीरता यदि राहुल में होती तो संसद की मर्यादाओं का इतना हनन नहीं होता जितना हमें देखने को मिल रहा है। वह कांग्रेस को संभालने की दिशा में कोई ठोस कार्य करते जान नहीं पड़ते। जिससे संसदीय लोकतंत्र पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। राहुल को चाहिए कि वह अपने पिता के नाना पंडित नेहरू के संसदीय आचरण को पढ़ें और उनकी लोकतंत्र के प्रति निष्ठा को भी अपनायें-तो कोई बात बने। अब शोर मचाते रहने से सत्ता में वापिसी हो जाने की आशा को पालना राहुल के लिए चील के घोंसलों में मांस ढूंढऩे वाली बात होगी। जहां तक देश के अन्य विपक्षी दलों की बात है तो उनकी भी स्थिति दयनीय है। शरद यादव जैसे लोग विपक्ष के पास है जिनके संसदीय आचरण को इन सभी में उच्च माना जाता रहा है। मुलायम सिंह यादव जैसे नेता भी विपक्ष के पास हैं, जिनकी उपस्थिति संसद का महत्व बढ़ाती है परन्तु ये दोनों नेता भी 'भीष्म पितामह' की भांति कभी विराट की गऊओं का हरण करने में दुर्योधन का साथ देते दीखते हैं तो कभी उचित समय पर मौन साध जाते हैं। इससे ममता को उत्पात मचाने और माया को उल्टा-सीधा बोलने का अवसर मिल जाता है। ये दोनों नेता सोच रहे हैं कि 'मोदी का वध' महिलाओं के हाथ ही करा दिया जाए। पर उन्हें याद रखना चाहिए कि 'मोदी वध' के लिए इन्हें किसी महिला की आवश्यकता न होकर किसी 56 इंची सीने वाले की आवश्यकता है। यह दुख का विषय है कि ये दोनों कृष्णवंशी नेता इस समय हथियार न उठाने की कसम खाये बैठे हैं। देखते हैं इन्हें अपने 'सुदर्शन' की कब याद आती है और आती भी है या नही? केवल हथियार उठाकर भागने से तो काम चलेगा नही-देश चिंतन के धरातल से निकलने वाले उन तीरों की अपेक्षा कर रहा है जो मोदी के 'सबका साथ सबका विकास' की काट कर सकें। कुछ भी हो फिलहाल मोदी ने अपने इस नारे के चक्रव्यूह में विपक्ष के योद्घाओं को फंसा रखा है। विपक्ष को संभलना भी होगा और सुधरना भी होगा।

सरकार ने बताया मो. अली हरिज को छोड़कर बिपिन रावत को इसलिए बनाया सेना प्रमुख




 दिल्ली। सीबीआई के कार्यकारी निदेशक के बाद नए सेनाध्यक्ष के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत की नियुक्ति को लेकर सियासी बवाल पैदा हो गया है। कुछ स्तरों पर इसे धार्मिक रंग दिए जाने की कोशिशों की आशंका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

कांग्रेस और वामदल ने दो वरिष्ठ अफसरों को नजरअंदाज कर रावत की नियुक्ति पर प्रधानमंत्री से जवाब मांगा है। वहीं, भाजपा ने सेना पर सियासत करने की आलोचना करते हुए कहा कि विपक्षी दल अपनी हताशा का परिचय दे रहे हैं। शनिवार को सरकार ने अगले सेनाध्यक्ष के रूप में ले. जन. रावत की नियुक्ति की जानकारी दी थी।

सूत्र भी मानते हैं कि पूर्वी कमांडर ले.ज. प्रवीण बख्शी और दक्षिणी कमान के प्रमुख ले.ज. पीएम हरिज भी रावत के मुकाबले सीनियर थे। हालांकि उनका कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया के अनुसार हुई है और उसमें भारत के सामने मौजूद चुनौतियों का ख्याल रखा गया है।

वरिष्ठता की कड़ी तोड़ी - कांग्रेस

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि ले.जन. रावत की योग्यता पर शक नहीं है, लेकिन सेना में वरिष्ठता का महत्व होता है। सेना जैसे संवेदनशील अंग में भी मोदी सरकार मनमर्जी से किसी को भी नहीं चुन सकती।

भाकपा के डी. राजा ने कहा कि सीबीआई के कार्यकारी निदेशक, न्यायपालिका, सीवीसी जैसे पदों पर नियुक्ति भी विवादित हो गई है और इसकी जिम्मेदार सरकार है।

कांग्रेस नेता शहजाद पूनावाला ने ट्वीट कर कहा कि मोदी सरकार ने यह फैसला इसलिए किया ताकि हरिज सेनाध्यक्ष न बन सकें, जो कि मुस्लिम हैं। लेकिन पार्टी प्रवक्ता मनीष तिवारी ने पूनावाला के बयान पर सख्ती से असहमति जताई।

10 जनपथ से नियुक्ति का दौर खत्म

केंद्रीय राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कांग्रेस पर तंज करते हुए कहा कि अब 10 जनपथ से नियुक्तियों का दौर खत्म हो चुका है।

सरकार ने बचाव में बताई वजह

1. लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी (सबसे वरिष्ठ पूर्वी कमांडर) इसलिए खारिज

- आर्म्ड कोर अधिकारी बख्शी के कॅरिअर का अधिकांश समय जोधपुर में बीता।

- कश्मीर में सिर्फ दो पोस्टिंग रहीं।

2. लेफ्टिनेंट जनरल पीएम हरिज (पदानुक्रम में दूसरे दक्षिणी कमान के प्रमुख) इसलिए खारिज

- हरिज के पास नियंत्रण रेखा या आतंकवाद के खिलाफ अभियानों का ऑपरेशनल अनुभव नहीं है।

3. लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत (पदानुक्रम में तीसरे उप-सेनाध्यक्ष) इसलिए चुने गए

- रावत को मौजूदा परिदृश्य को देखते हुए सेना प्रमुख बनाया गया है।

- अशांत (लड़ाई वाले) इलाकों में काम करने का जबर्दस्त अनुभव।

- तीन दशकों में कई अहम जिम्मेदारियां संभाल चुके।

- कई बड़े सैन्य अभियानों की कमान संभाली।

- पाक सीमा, चीन से जुड़ी वास्तविक नियंत्रण रेखा और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में ऑपरेशनल जिम्मेदारियां निभाईं।

यह है प्रावधान

- सैद्धांतिक रूप से सरकार किसी को भी सेना प्रमुख नियुक्त करने के लिए स्वतंत्र है।

- सेना अध्यक्ष की नियुक्ति में हमेशा ही वरिष्ठता के सिद्धांत का पालन किया जाता है।

जब हुई अनदेखी

- इससे पहले 1983 में सेना प्रमुख की नियुक्ति में वरिष्ठता क्रम की अनदेखी की गई थी।

- तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने लेफ्टिनेंट जनरल एसके सिन्हा की जगह जनरल एएस वैद्य को सेना प्रमुख बनाया था।

'सेना में वरिष्ठता बहुत अहम होती है। सरकार ने इसे तोड़ा है तो क्या राजनीति नहीं है।' - मनीष तिवारी, कांग्रेस नेता

30 दिसंबर तक पुराने नोट में 5000 से ज्यादा की रकम एक बार में ही जमा होगी




नई दिल्ली. बंद हुए पुराने नोटों में 5000 रुपए से ज्यादा का अमाउंट 30 दिसंबर तक एक खाते में सिर्फ एक बार ही जमा कर सकते हैं। जिसके खाते में पैसा जमा हो रहा है, उसे बैंक को यह भी बताना होगा कि यह रकम अब तक जमा क्यों नहीं की गई थी। रकम जमा कराने वाले को दो अफसरों के सामने जवाब भी देना होगा कि यह रकम अब तक जमा क्यों नहीं कराई गई। बैंक उसके जवाब से संतुष्ट होगा, तभी रकम जमा की जाएगी। Q&A में समझें नए एलान के बाद क्या होगा...
क्या है नया एलान?
- 500 या 1000 के पुराने नोटों के रूप में 5000 से ज्यादा की रकम आप अपने एक अकाउंट में एक बार में ही जमा कर सकते हैं।
कब से लागू हो रहा है नया नियम?
- फाइनेंस मिनिस्‍ट्री के एलान के बाद रिजर्व बैंक की ओर से सोमवार को इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया गया। सोमवार से ही यह फैसला लागू हो गया है।
5000 से कम कई रकम किस्तों में जमा करें तो क्या होगा?
- अलग-अलग किस्तों में जमा कराई गई रकम का कुल अमाउंट जैसे ही 5 हजार से ज्यादा होगा, उस खाते में 30 दिसंबर तक आगे कोई रकम जमा नहीं कराई जा सकेगी।
- इस कंडीशन में भी 5000 की लिमिट क्रॉस होने पर दो बैंक अधिकारियों की मौजूदगी में जमा करने वाले से पूछताछ होगी।
- इस पूछताछ की रिकॉर्डिंग रखी जाएगी, जिसे ऑडिट ट्रायल के दौरान पेश किया जा सकेगा।
5000 रुपए तक जमा करें तो क्या होगा?
- 5000 रुपए या इससे कम रकम जमा कराने पर कोई पूछताछ नहीं हाेगी।
5000 रुपए से कितनी ज्यादा रकम जमा कर सकते हैं।
- आरबीआई ने यह लिमिट तय नहीं की है। बस इतना है कि यह एक बार में ही जमा होगी।
रकम दो अकाउंट में जमा करें तो क्या होगा?
- अगर आप 5000 रुपए से ज्यादा की रकम दो अलग-अलग अकाउंट में जमा करते हैं तो आपसे पूछताछ नहीं होगी।
क्या दूसरे शख्स के अकाउंट में जमा करा सकते हैं रकम?
- नोटिफिकेशन के मुताबिक, दूसरे के खाते में पुराने नोट जमा कराने के लिए अकाउंट होल्डर को लिखित में देना होगा।
नए फैसले से किन लोगों पर असर पड़ा?
- जो लोग थोड़ा-थोड़ा जमा करके ब्लैकमनी को व्हाइट करने में लगे थे, वे अब ऐसा नहीं कर पाएंगे।
PMGKY के तहत रकम डिक्लेयर करने पर क्या कोई असर होगा?
- नहीं। आप प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेवाय) 2016 के तहत कितनी भी रकम डिक्लेयर कर सकते हैं। नए फैसले से इस पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
- आरबीआई ने साफ किया है कि यह पाबंदी पीएमजीकेवाय 2016 के तहत डिपॉजिट बढ़े इसलिए लगाई गई है।
क्या है पीएमजीकेवाय?
- सरकार ने इस स्‍कीम के तहत 50% पेनल्‍टी देकर ब्‍लैकमनी को व्‍हाइट करने का एक और मौका दिया है।
- कुल रकम का 25% आपको तुरंत वापस कर दिया जाएगा। बाकी 25% रकम पीएमजीकेवाय में 4 साल के लिए जमा होगी। इस पर मिलने वाले ब्याज की रकम गरीब कल्याण पर खर्च की जाएगी।
- इस स्‍कीम के तहत 31 मार्च तक ब्‍लैकमनी जमा कराई जा सकेगी।
- ईमेल- blackmoneyinfo@incometax.gov.in पर कोई भी शख्स ब्लैकमनी की जानकारी दे सकता है। उसकी पहचान उजागर नहीं की जाएगी।
क्या नोट बदल सकते हैं?
- 500-1000 के पुराने नोट अब बैंकों से नहीं बदले जा सकते। इस पर पहले ही राेक लगाई जा चुकी है।
- इन्हें अब या तो बैंक में जमा किया जा सकता है या आरबीआई से बदला जा सकता है।
बाजार में इस्तेमाल होगा क्या पुराना नोट?
- इस पर तो 15 दिसंबर के बाद से ही पूरी तरह रोक लगाई जा चुकी है।

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