: "width=1100"' name='viewport'/> बदायूँ एक्सप्रेस | तेज रफ़्तार : 12/23/16

PM मोदी नीति आयोग के साथ मिलकर करेंगे अर्थव्यवस्था की समीक्षा, मंगलवार को बुलाई बैठक

 

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्थव्यवस्था की स्थिति का जायजा लेने तथा विशेष रूप से नोटबंदी के बाद नकदी की कमी समेत अन्य मुद्दों पर विचार के लिए नीति आयोग की मंगलवार को बैठक बुलाई है।

प्रधानमंत्री कार्यालय में उच्च पदस्थ सूत्र ने कहा कि मोदी ने नीति आयोग के सदस्यों, अर्थशास्त्रियों तथा संबद्ध मंत्रालयों विशेषकर वित्त एवं वाणिज्य के शीर्ष अधिकारियों की राय जानने के लिए बैठक बुलाई है। सूत्र के अनुसार सरकार अर्थव्यवस्था में नकदी की कमी को देखते हुए अर्थव्यवस्था विशेषकर असंगठित क्षेत्र पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव से निपटने के लिए रणनीति बनाने को लेकर गंभीर है।

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आठ नवंबर 2016 के बाद नोटबंदी से नकदी की कमी के कारण असंगठित क्षेत्र में लोगों की नौकरियां गई हैं।
विभिन्न एजेंसियों तथा रिजर्व बैंक द्वारा चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि के अनुमान को घटाए जाने के लिहाज से यह बैठक अहम है।
रिजर्व बैंक ने इस महीने की शुरुआत में मौद्रिक नीति समीक्षा में आर्थिक वृद्धि के अनुमान को 7.6 प्रतिशत से घटाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया।
वहीं एडीबी ने नोटबंदी के प्रभाव को देखते हुए वृद्धि अनुमान को कम कर 7.0 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले 7.4 प्रतिशत था।
देश की आर्थिक वृद्धि दर 2016-17 की पहली और दूसरी तिमाही में क्रमश: 7.1 प्रतिशत तथा 7.3 प्रतिशत रही।

फाइटर पायलट बन किसान का बेटा करेगा देश की रक्षा




रुड़की के एक किसान के बेटे ने फाइटर पायलट बन देश में दूसरा स्‍थान प्राप्त किया है। बालचंदवाला गांव के हिमांशु ने अपनी मेहनत और लगन के बल पर देश में दूसरा स्‍थान प्राप्‍त किया है।हिमांशु के पिता राजदेव किसान हैं। हिमांशु के फाइटर पायलट बनने की खबर से गांव और परिवार में खुशी का माहौल है।
दादा सौरण सिंह का कहना ‌है कि फाइटर पायलट बन हिमांशु ने परिवार का रोशन किया है। उसके देश सेवा के इस जज्बे पर हमें गर्व है।हिमांशु बचपन से ही पढ़ने में होनहार रहा है। हिमांशु ने कक्षा दस में 96% और इंटर में 90 % अंक प्राप्त किए। उन्होंने दून इंटर कॉलेज से पढ़ाई की है।
हिमांशु और अक्षय दो भाई हैं। बड़े भाई अक्षय ने नेवी का 6 माह कोर्स थाईलैंड से किया है। लेकिन घर परिवार खेती के काम में दिक्कत आ रही थी।जिस कारण अक्षय ने नेवी छोड़ दी। अब अक्षय शुगर मिल में सुपरवाईजर के पद पर नौकरी कर रहा है।

अतीक अहमद ने अखिलेश को दी खुली चुनौती, मेरा टिकट कटा तो मैं खुद बना लूंगा अपना टिकट




इलाहाबाद के बाहुबली पूर्व सांसद अतीक अहमद ने सीएम अखिलेश यादव को खुली चुनौती दी है। कानपुर में सभा को संबोधित करते हुए अतीक अहमद ने कहा कि यदि मेरा टिकट कटा तो मैं अपना टिकट खुद बना लूंगा। माफिया अतीक अहमद ने रैली में ये भी कहा कि मैं निर्दलीय विधायक भी रहा हूं।

 अतीक अहमद का कहना है कि मुझे मुलायम सिंह पर पूरा भरोसा है। वो मेरा टिकट नहीं काटेंगे। बता दें कि अतीक अहमद की छवि एक बाहुबली की है। वह अक्सर अपने बाहुबल से चर्चे में बने रहते हैं।

ट्रंप के फैसले से डरे नोएडा के हजारों कॉलसेंटर कर्मी





नोएडा। एनसीआर में चल रहे काॅलसेटरों में नोटबंदी का असर बेसक नहीं पड़ा हो, लेकिन कर्मचारियों में एक माह बाद ट्रंप के शपथ ग्रहण करने के बाद आने वाले फैसलों का डर जरूर बना हुआ है। दरअसल, अमेरिका में प्रेसिडेंट चुने के जाने के बाद ट्रंप ने बाहर के देशों में चल रही सभी यूएस काॅलसेंटर आैर कंपनियों को वापस लौटने का फरमान सुनाया है। हालांकि, अभी तक ट्रंप ने शपथ नहीं ली है। वह जनवरी में के लास्ट वीक में शपथ ले सकते हैंं। एेसे में शपथ लेने के बाद उनका क्या रुख होगा। क्या काॅलसेंटर आैर यूएस कंपनियां वापस चली जाएंंगी। एेसे में रोजगार छिनने के डर से हजारों काॅलसेंटर कर्मियों में इसका डर बना हुआ है। काॅलसेंटर कर्मियों का यह डर उनसे बात करने में नजर आया। एक यूएस बेस्ट काॅलसेंटर कर्मचारी ने बताया कि अब तक तो सब कुछ अच्छा चल रहा है, लेकिन जनवरी में क्या होगा। इसका डर बना हुआ है। इसका कारण अमेरिका में नवनिर्वाचित प्रेसिडेंट डोनल्ड ट्रंप की वह घोषणा है, जो उन्होंने चुनाव जीतने के तुरंत बाद देश से बाहर सभी यूएस कंपनियों को अपने देश लौटने का सुनाया है। अभी तक इसका कंपनी पर कोर्इ असर नहीं है, लेकिन उनके शपथ लेने आैर इस संबंध में कोर्इ बड़ा फैसला लेने पर कंपनी वापस जा सकती है। एेसे में यहां काम कर रहे लोगोंं की नौकरी चली जाएगी। इससे यहां काम कर रहे हजारों लोग बेरोजगार हो सकते हैं। नोएडा के सेक्टर-58 स्थित इंटरनेशनल काॅलसेंटर कर्मी अंकित ने बताया कि नोटबंदी पर उनके यहां कोर्इ असर नहीं हुआ है। उनके यहां पहले से ही अकाउंट में सैलरी आती है। उसके साथ ही हमारा सब काम आउटसोर्स है। एेसे में न तो काम पर कोर्इ असर आैर न ही सैलरी या छंंटनी जैसी कोर्इ बात है। सब कुछ अच्छा चल रहा है, लेकिन जनवरी माह के बाद क्या होगा। इसका थोड़ा सा डर जरूर बना हुआ है।

2017 में भारतीय बाज़ार में कदम रखेंगे ये नए स्कूटर, जानिए इनकी खासियत



भारतीय टू-व्हील इंडस्ट्री के लिए साल 2016 अच्छा बीता और अब कंपनियों को उम्मीद है कि 2017 भी इंडस्ट्री के लिए अच्छा रहेगा। इस साल स्कूटर सेगमेंट में कई नई एंट्री हुई जिसमें एप्रिलिया एसआर150, वेस्पा 946 एम्पोरियो अरमानी एडिशन शामिल है। आइए जानते हैं कि 2017 में कौन कौन से स्कूटर भारतीय बाज़ार में दस्तक देने वाले हैं और इनकी खासियत क्या है?
1. एथर एस340

एथर एस340
(एथर एस340)

आने वाले समय में ज़ीरो-एमिशन व्हीकल्स का का बाज़ार बड़ा होने वाला है। कई घरेलू कंपनियां भी इलेक्ट्रिक व्हीकल के निर्माण में लग गई हैं। एथर एनर्जी ने भी इस दिशा में अपने कदम बढ़ाए हैं। ये एक स्टार्ट-अप कंपनी है जिसकी स्थापना आईआईटी मद्रास के छात्र रहे स्वनिल जैन ने साल 2013 में की थी। तीन साल के प्रयास के बाद कंपनी ने अपनी पहला प्रोडक्ट एथर एस340 को पेश किया है।

एथर एस340 एक इलेक्ट्रिक स्कूटर है जिसे कई अत्याधुनिक तकनीकों से लैस किया गया है। इस स्कूटर को 90 फीसदी निर्माण भारत में किया गया है। सिर्फ इस स्कूटर में लगे लिथियम-इऑन बैटरी को इंपोर्ट किया गया है। स्कूटर का वज़न 90 किलोग्राम है। इस स्कूटर में लगा इंजन 3KW (इकोनॉमी मोड में) और 5KW (स्पोर्ट मोड) में पावर देता है। स्कूटर की टॉप स्पीड 72 किलोमीटर प्रति घंटे की है और एक बार चार्ज करने के बाद ये 100 किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है। स्कूटर के बैटरी को 1 घंटे में 80 फीसदी चार्ज किया जा सकता है।

2. हीरो डुएट ई

हीरो डुएट ई
(हीरो डुएट ई)


हीरो डुएट ई को 2016 दिल्ली ऑटो एक्सपो में शोकेस किया गया था। हीरो ई एक इलेक्ट्रिक स्कूटर है जिसे मौजूदा हीरो डुएट की तर्ज पर तैयार किया गया है। इस ई-स्कूटर में इलेक्ट्रिक मोटर लगाया गया है जो 5KW का पावर और 14Nm का टॉर्क देगा। दावे के मुताबिक ये स्कूटर 0 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार 6.5 सेकेंड में पकड़ लेती है। कंपनी के मुताबिक, एक बार चार्ज करने के बाद ये स्कूटर 65 किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है।

हालांकि, अभी तक इस स्कूटर के प्रोडक्शन मॉडल के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है लेकिन, उम्मीद है कि कंपनी इसे 2017 में कभी भी लॉन्च कर सकती है।
3. टीवीएस एनटॉर्क 210 कॉन्सेप्ट

टीवीएस एनटॉर्क 210 कॉन्सेप्ट
(टीवीएस एनटॉर्क 210 कॉन्सेप्ट)

टीवीएस मोटर कंपनी ने ऑटो एक्सपो में एक स्पेशल कॉनसेप्ट स्कूटर को पेश किया था। इस स्कूटर को टीवीएस एनटॉर्क 210 नाम दिया गया है। ऑटो एक्सपो के दौरान इस स्कूटर को काफी लोगों ने पसंद किया। बताया जा रहा है कि कंपनी बहुत जल्द इस स्कूटर के प्रोडक्शन मॉडल का निर्माण शुरू करने की तैयारी कर रही है।

टीवीएस एनटॉर्क 210 को न्यू जेनेरेशन प्लेटफॉर्म टेक्नोलॉजी पर तैयार किया गया है। इस स्कूटर में रेडियल ट्यूबलेस टायर्स, रोटो पेटल डिस्क ब्रेक और एबीएस सिस्टम भी लगा होगा। इसके अलावा स्कूटर में एडवांस एलईडी लाइटिंग, जीपीएस नेविगेशन, ऑनलाइन कनेक्टिविटी फीचर्स जैसे अत्याधुनिक फीचर्स भी दिए जाएंगे।

स्कूटर में 212.5 सीसी, ऑल अल्युमीनियम, लिक्विड कूल्ड, फ्यूल इंजेक्टेड इंजन लगा होगा जिसे एडवांस वेरियोमेटिक ट्रांसमिशन गियरबॉक्स से लैस किया जाएगा। स्कूटर का टॉप स्पीड 120 किलोमीटर प्रति घंटे का होगा और इसमें 8.5-लीटर का फ्यूल टैंक लगा होगा।

4. टीवीएस एनटॉर्क 125

टीवीएस एनटॉर्क 125
(टीवीएस एनटॉर्क 125)
टीवीएस एनटॉर्क 210 की ही तर्ज पर कंपनी टीवीएस एनटॉर्क 125 सीसी वर्जन का भी निर्माण करेगी। बताया जा रहा है कि इस वर्जन का नाम एनटॉर्क 125 रखा जाएगा। इस स्कूटर का मुकाबला होंडा एक्टिवा, सुजुकी एक्सेस जैसे स्कूटर्स से होगा। इस स्कूटर में 125 सीसी इंजन लगा होगा जिसे सीवीटी से लैस किया जाएगा। साथ ही इसमें 8.5-लीटर का फ्यूल टैंक लगा होगा। कंपनी इस स्कूटर को 2017 में भारतीय बाज़ार में लॉन्च कर सकती है।

5. वेस्पा जीटीएस 300
वेस्पा जीटीएस 300
(वेस्पा जीटीएस 300)

इटालियन कंपनी पियाजियो बहुत जल्द भारत में वेस्पा जीटीएस 300 प्रीमियम स्कूटर को लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। ये देश के महंगे स्कूटरों में से एक होगी और इसे सीबीयू रूट के ज़रिए भारत लाया जाएगा। इस स्कूटर में 278 सीसी, सिंगल-सिलिंडर इंजन लगा होगा जो 21 बीएचपी का पावर और 22.3Nm का टॉर्क देगा। स्कूटर में एनालॉग इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, एलसीडी डिस्प्ले, ट्रैक्शन कंट्रोल और एबीएस जैसे अत्याधुनिक फीचर्स दिए जाएंगे। भारत में इसकी अनुमानित कीमत 4 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) के आसपास बताई जा रही है।

6. हीरो ज़ेडआईआर
हीरो ज़ेडआईआर
(हीरो ज़ेडआईआर)

हीरो ज़ेडआईआर 150 सीसी सेगमेंट में कंपनी का सबसे पावरफुल स्कूटर होगा। हीरो ज़ेडआईआर को 2017 में लॉन्च किया जाएगा। इस स्कूटर को स्पोर्टी लुक दिया गया है। स्कूटर में 157 सीसी, सिंगल-सिलिंडर, लि

राजनीतिक दलों को चुनावी चंदा कहां से आता है



काले धन के खिलाफ नोटबंदी से शुरू की गई मुहिम की सफलता के लिए जरूरी है कि राजनीतिक दल चुनाव आयोग की सलाह का पालन करते हुए सियासी चंदे में पारर्शिता के कानूनी उपाय अमल में लाएं। हालांकि कानपुर में हुई रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आयोग के सुझाव का समर्थन किया, लेकिन उन्होंने चले आ रहे दोष के लिए पूरी तरह उस जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 को दोषी ठहरा दिया जिसके तहत बीस हजार रुपए से कम के चंदे के स्रोत बताने की छूट मिली हुई है। जबकि मोदी सरकार पूर्ण बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में है, ऐसे में उसे चाहिए कि नोटबंदी की तरह दृढ़ता दिखाते हुए वह कानून में संशोधन का प्रस्ताव संसद में लाए।

दरअसल, निर्वाचन आयोग ने नकद चंदे की अधिकतम सीमा बीस हजार से घटा कर दो हजार रुपए करने की सिफारिश की है। आयोग ने इसके लिए जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में संशोधन का सुझाव दिया है। फिलहाल दलों को मिलने वाला चंदा आय कर अधिनियम, 1961 की धारा 13 (ए) के अंतर्गत आता है। इसके तहत दलों को बीस हजार रुपए से कम के नकद चंदे का स्रोत बताना जरूरी नहीं है। इसी झोल का लाभ उठा कर पार्टियां बड़ी धनराशि को बीस हजार रुपए से कम की राशियों में सच्चे-झूठे नामों से बही-खातों में दर्ज कर कानून को ठेंगा दिखाती रहती हैं। इसके साथ ही पार्टियों को आवासीय संपत्ति से आय, बैंकों में जमा-पूंजी के ब्याज और स्वैछिक योगदान से आमदनी तथा अन्य कई स्रोतों से होने वाली आय पर भी कर-छूट मिली हुई है।

हाल ही में चुनाव आयोग ने बताया है कि भारत में उन्नीस सौ पंजीकृत राजनीतिक दल हैं। इनमें से चार सौ से भी ज्यादा ऐसे दल हैं, जिन्होंने कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा है। ऐसे में आयोग ने आशंका जताई है कि ये दल संभव है काले धन को सफेद में बदलने का माध्यम बनते हों। आयोग ने अब ऐसे दलों की पहचान कर उनको अपनी सूची से हटाने व उनका चुनाव चिह्न जब्त करने की कवायद शुरू कर दी है। आयोग ने आय कर विभाग को भी ऐसे कथित दलों की आय कर छूट समाप्त करने को कहा है।

असल में ये दल और आय कर कानून, 1961 की धारा 13 (ए) भ्रष्टाचार और काली कमाई को छिपाने तथा सफेद करने में बेइंतहा मदद करते हैं। इसीलिए आयोग ने वास्तविक दलों को ही कर-छूट देने का परामर्श दिया है। यदि ऐसा हो जाता है तो इससे भी चुनाव में गुप्त धन की भूमिका कम होगी और पारदार्शिता की दिशा में एक सार्थक पहल होगी। विमुद्रीकरण के बाद से केंद्र सरकार ऑनलाइन भुगतान-व्यवस्था पर जोर दे रही है, वहीं भाजपा समेत देश के सभी राजनीतिक दल ऑनलाइन चंदा लेने से कतरा रहे हैं। साल 2004 से 2015 के बीच हुए विधानसभा चुनावों में विभिन्न राजनीतिक दलों को इक्कीस सौ करोड़ रुपए का चंदा मिला हैं। इसका तिरसठ प्रतिशत नकदी के रूप में लिया गया है। इसके अलावा, पिछले तीन लोकसभा चुनावों में चौवालीस फीसद चंदे की राशि नकदी के रूप में ली गई थी। राजनीतिक दल उस पचहत्तर फीसद चंदे का हिसाब देने को तैयार नहीं हैं, जिसे वे अपने खातों में अज्ञात स्रोतों से आया दर्शा रहे हैं।
लोकतांत्रिक सुधारों के लिए काम करने वाले संगठन एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार, 2014-15 में व्यापारिक घरानों के चुनावी न्यासों से दलों को 177.40 करोड़ रुपए चंदे के रूप में मिले हैं। इनमें सबसे ज्यादा चंदा 111.35 करोड़ भाजपा को, फिर 31.6 करोड़ रु. कांग्रेस को, 5 करोड़ रु. राकांपा को, 6.78 करोड़ रु. बीजू जनता दल को, 3 करोड़ रु. आम आदमी पार्टी को, 5 करोड़ इंडियन नेशनल लोक दल को और अन्य दलों को 14.34 करोड़ रुपए मिले हैं। दरअसल, राजनीतिक दलों और औद्योगिक घरानों के बीच लेन-देन में पारदर्शिता के नजरिए से 2013 में यूपीए सरकार ने कंपनियों को चुनावी ट्रस्ट बनाने की अनुमति दी थी। ये आंकड़े उसी के परिणाम हैं।

क्षेत्रीय दल भी चंदे में पीछे नहीं रहे हैं। 2004 से 2015 के बीच हुए 71 विधानसभा चुनावों के दौरान क्षेत्रीय राजनीतिक दलों ने कुल 3368.06 करोड़ रुपए चंदा लिया है। इसमें तिरसठ फीसद हिस्सा नकदी के रूप में आया। वहीं 2004, 2009 और 2014 में हुए लोकसभा चुनावों में क्षेत्रीय दलों को तेरह सौ करोड़ रुपए चंदे में मिले। इसमें पचपन प्रतिशत राशि के स्रोत ज्ञात रहे, जबकि पैंतालीस फीसद राशि नकदी में थी, जिसके स्रोत अज्ञात रहे।

2004 और 2015 के विधानसभा चुनावों के दौरान चुनाव आयोग के पास जमा किए गए चुनावी खर्चों के विवरण में बताया गया है कि समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, शिरोमणि अकाली दल, शिवसेना और तृणमूल कांग्रेस को सबसे ज्यादा चंदा मिला है। इन आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि औद्योगिक घराने चंदा देने में चतुराई बरतते हैं। उनका दलीय विचारधारा में भरोसा होने के बजाय, सत्ताधारी दलों की ताकत में भरोसा होता है। लिहाजा, कांगे्रस और भाजपा को लगभग समान रूप से चंदा मिलता है।
जिस राज्य में जिस क्षेत्रीय दल की सत्
राजनीति को पारदर्शी बनाने की दृष्टि से केंद्रीय सूचना आयोग राज्यसभा सचिवालय के माध्यम से सभी सांसदों से आग्रह कर चुका है कि वे अपने निजी व अन्य कारोबारी हितों को सार्वजनिक करें और अपनी चल-अचल संपति का खुलासा करें। लेकिन आयोग का आग्रह नक्कारखाने में तूती की आवाज साबित हुआ। ज्यादातर सांसदों ने पारदर्शिता के आग्रह को ठुकरा दिया। जिस ब्रिटेन से हमने संसदीय संरचना उधार ली है, उस ब्रिटेन में परिपाटी है कि संसद का नया कार्यकाल शुरू होने पर सरकार मंत्रियों और सांसदों की संपत्ति की जानकारी और उनके व्यावसायिक हितों को सार्वजानिक करती है। अमेरिका में तो राजनेता हर तरह के प्रलोभन से दूर रहें, इस दृष्टि से और मजबूत कानून है। वहां सीनेटर बनने के बाद व्यक्ति को अपना व्यावसायिक हित छोडऩा बाध्यकारी होता है। जबकि भारत में यह पारिपाटी उलटबांसी के रूप में देखने में आती है। यहां सांसद और विधायक बनने के बाद राजनीति धंधे में तब्दील होने लगती है। ये धंधे भी प्राकृतिक संपदा के दोहन, भवन निर्माण, सरकारी ठेके, टोल टैक्स, शराब ठेके और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के राशन का गोलमाल कर देने जैसे गोरखधंधों से जुड़े होते हैं। अब तो शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी राजनीतिकों का कब्जा बढ़ता जा रहा है। यही कारण है कि अब तक जितने भी बड़े घोटाले सामने आए हैं, वे सब ऐसे ही काले कारोबार से जुड़े पाए गए हैं।

इस लिहाज से यह जरूरी हो जाता है कि देश के अवाम को यह जानने का अधिकार मिले कि जिन पर विकास, लोक कल्याण और प्रजातंत्र का दायित्व है, उन्हें एकाएक मिल जाने वाले धन के स्रोत कहां हैं। यानी राजनीतिक दल पारदर्शिता की खातिर आरटीआई के दायरे में आएं। राजनेता अक्सर जनसाधारण को तो ईमानदारी और पारदार्शिता की नसीहत देते रहते हैं, लेकिन स्वयं उदाहरण कम ही बनते हैं। राजनीति में ऐसे विशेषाधिकार प्राप्त करने की कोशिश चलती रहती है, जिससे काली कमाई के अज्ञात स्रोतों पर पर्दा पड़ा रहे। लिहाजा, यह जरूरी है कि सरकार और निर्वाचन आयोग मिल कर इस पर अंकुश लगाने की प्रभावी पहल करें।

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