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इन पांच वजहों के चलते मुलायम हुए नर्म, छोड़ सकते हैं सपा पर दावा



समाजवादी पार्टी में छिड़े दंगल का आज फैसले का दिन है, कुछ ही समय में चुनाव आयोग में मामले की सुनवाई शुरू होने वाली है. पार्टी पर अपना अधिकार बताते हुए दोनों पक्ष (मुलायम और अखिलेश) के लोग आज चुनाव आयोग के सामने अपनी बात रखेंगे.

एक ओर जहां मुलायम सिंह चुनाव आयोग के सामने अपनी बात खुद रखने की तैयारी में हैं तो अखिलेश का पक्ष रामगोपाल रखेंगे. कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि चुनाव आयोग के साथ पहली सुनवाई में ही मुलायम सिंह यादव सपा पर अपना दावा छोड़ सकते हैं. आइए जानते हैं ऐसी क्या वजहें हैं जो मुलायम सिंह यादव जैसे नेता को अपना फैसला बदलने पर मजबूर कर रहा है.

मुलायम के दावा छोड़ने की 5 बड़ी वजहें

अखिलेश की जनस्वीकृत

समाजवादी दंगल के पहले दिन से लगातार अखिलेश यादव का खेमा मजबूत होता गया है. आज आलम यह है कि उनके पास करीब 224 विधायक और 50 से अधिक एमएलसी के एफिडेविट मौजूद हैं. इसके अलावा तमाम पार्टी नेता भी अखिलेश के साथ हैं.

मुलायम के वफादरों ने छोड़ा साथ

किरणमयनंदा, रेवती रमण सिंह और बलराम यादव जैसे वरिष्ठ समाजवादी नेता जो मुलायम सिंह के साथ शुरुआती दौर से थे अब अखिलेश खेमे में हैं. इन सभी ने 1 जनवरी को आपातकालीन राष्ट्रीय अधिवेशन में भाग लिया था और अखिलेश को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर बधाई भी दी थी.

पारिवारिक दबाव

पार्टी ही नहीं सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव पर परिवार का भी दबाव है कि वे बेटे अखिलेश की बात मान लें और पार्टी में संरक्षक की भूमिका में काम करें. सैफई से परिवार के कई बुजुर्ग मुलायम और अखिलेश से व्यक्तिगत रुप से बात कर चुके हैं.

पार्टी नहीं टूटने देना चाहते मुलायम

पिछले दिनों गठबंधन और टिकट वितरण पर अखिलेश के रुख से यह साफ हो चुका है कि वे पीछे पिछड़ने वाले नहीं हैं वहीं मुलायम कुछ नरम जरूर नजर आ रहे हैं. वे लगातार कहते रहे हैं कि मैं पार्टी नहीं टूटने दूंगा. दिल्ली निकलने से पूर्व भी मुलायम ने कहा था कि पार्टी मैंने बहुत लड़ाई लड़कर खड़ी की है इसे टूटने नहीं दूंगा.

अखिलेश के साथ ही जीत सकते हैं चुनाव

मुलायम सिंह यह बात जानते हैं कि अखिलेश ही वह चेहरा हैं जो आगामी विधानसभा चुनावों में सपा को सत्ता वापस दिला सकते हैं. मुलायम ने इस बात का जिक्र भी किया था कि हमने ही अखिलेश को मुख्यमंत्री बनाया था और फिर बनाएंगे. इसके अलावा आजतक द्वारा उत्तर प्रदेश में कराए गए सर्वे में भी अखिलेश ही जनता की पहली पसंद बनकर उभरे थे.

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