: "width=1100"' name='viewport'/> बदायूँ एक्सप्रेस | तेज रफ़्तार : सपा में घमासान: पिता-पुत्र में सुलह की कोशिशें तेज, साइकिल चुनाव चिन्ह पर असमंजस बरकरार

सपा में घमासान: पिता-पुत्र में सुलह की कोशिशें तेज, साइकिल चुनाव चिन्ह पर असमंजस बरकरार





लखनऊ:  समाजवादी पार्टी में मचे घमासान को शांत कराने में अब पूरा सैफई परिवार जुट गया है. कल देर रात तक सुलह की कोशिशों के लिए बैठकों का दौर चलता रहा. हालांकि फिलहाल अखिलेश और मुलायम खेमे की दरार भरती नज़र नहीं आ रही है. इधर पार्टी की कमान अपने हाथ में ले चुके अखिलेश ने संगठन में तब्दीलियां करनी भी शुरु कर दी हैं.

नहीं शांत हो रहा समाजवादी पार्टी में मचा घमासान

गुरुवार देर रात जब शिवपाल यादव और अमर सिंह, मुलायम सिंह यादव से मिलकर वापस लौट रहे थे, बाहर मीडिया को उम्मीद थी कि बैठक में क्या हुआ इसकी जानकारी शिवपाल या अमर ज़रूर देंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. गाड़ी मुलायम सिंह यादव के घर से बाहर निकली और बिना रुके सीधी निकल गई.

समाजवादी पार्टी में अब अखिलेश की ही चलेगी ?

जैसे-जैसे दिन बीतते जा रहे हैं, अखिलेश गुट का दावा मज़बूत होता जा रहा है. अखिलेश यादव की अपने विधायकों के साथ मीटिंग के बाद तो यही लग रहा है कि समाजवादी पार्टी में अब अखिलेश यादव की ही चलेगी.

बैठक में आए विधायकों से अखिलेश ने कहा कि यहां मौजूद किसी भी विधायक का टिकट नहीं कटेगा और अपने दम पर चुनाव लड़ेंगे.  अपनी दावेदारी मज़बूत करने के लिए अखिलेश यादव के बनाए प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने सात और ज़िलाध्यक्षों को भी बदल दिया है. सातों ज़िलाध्यक्ष शिवपाल गुट के बताए जाते हैं.

यदुवंश में सुलह की सारी कोशिशें अब तक नाकाम ?

पार्टी और परिवार में जारी दंगल को खत्म करने के लिए गुरुवार को सुबह से लेकर देर रात तक बैठकों का दौर जारी रहा,  सूत्रों से मिल रही खबरों के मुताबिक, ना तो अखिलेश गुट ही झुकने को तैयार है और ना ही मुलायम गुट.

परिवार को टूट से बचाने के लिए राजनीति से दूर रहने वाले मुलायम सिंह यादव के भाई अभय राम यादव और राजपाल यादव भी अचानक लखनऊ पहुंचे.पहले मुलायम से लंबी बातचीत की फिर अखिलेश यादव से भी जाकर मिले, इस बीच सुलह की कोशिशों में लगे आज़म खान दूसरी बार अखिलेश यादव से मिले. आज़म को अभी भी उम्मीद है कि पिता-पुत्र में सुलह हो जाएगी.

साइकिल चुनाव चिन्ह पर असमंजस बरकरार

हालांकि चुनाव चिन्ह साइकिल किस गुट के पास जाएगा इस पर अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है, क्योंकि चुनाव आयोग में दोनों में से किसी भी गुट ने साइकिल चुनाव चिन्ह पर अपना दावा नहीं ठोका है.

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