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बीएसपी आगे, सपा में सस्पेंस




नोएडा : जिला गौतमबुद्ध नगर की तीनों विधानसभा सीटों नोएडा, दादरी और जेवर पर 11 फरवरी को वोटिंग होगी। 17 जनवरी को अधिसूचना जारी होते ही नॉमिनेशन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इन चुनावी तैयारियों में बीएसपी सबसे आगे निकली। वह तीनों सीट के लिए कैंडिडेट घोषित कर चुकी है जबकि सपा प्रत्याशियों को लेकर अभी भी सस्पेंस है। देश की दोनों बड़ी राजनीतिक पार्टियां कांग्रेस और बीजेपी अभी तक अपने प्रत्याशियों का चयन नहीं कर पाई है। खास बात यह है चूंकि जिले में पहले चरण में ही वोटिंग होगी, लिहाजा यहां प्रचार करने का सबसे कम मौका प्रत्याशियों को मिलेगा। यदि बीजेपी और कांग्रेस अपने प्रत्याशियों के नाम की घोषणा 20 जनवरी तक भी करती हैं तो उन्हें 21 दिन ही प्रचार के लिए मिल पाएंगे।

एक साल से कैंडिडेट तय
सभी राजनीतिक दल वैसे तो विधानसभा चुनाव की तैयारियां छह-सात महीने से कर रहे थे लेकिन इस मामले में बीएसपी फिलहाल लीड ले चुकी है। बीएसपी ने दादरी विधानसभा सीट से सतबीर गुर्जर और जेवर सीट पर वेदराम भाटी को एक साल पहले ही अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है। ये दोनों मौजूदा विधायक हैं। नोएडा विधानसभा सीट से रविकांत मिश्रा को चार महीने पहले बीएसपी ने अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया था। तब से बीएसपी नोएडा में जनसंपर्क में जुटी हुई है। दादरी से बीएसपी कैंडिडेट सतबीर गुर्जर का कहना है कि उनकी पार्टी यह चुनाव बीएसपी के विकास कार्यों के अजेंडे पर लड़ेगी। उन्होंने बताया कि जिले की दो सीटें बीएसपी के कब्जे में हैं। सतबीर ने कहा कि, 'हमारा टारगेट है कि इस चुनाव में जिले की तीनों सीटें बीएसपी की झोली में डाली जाएं। हम हर बूथ तक कार्यकर्ताओं को तैनात कर चुके हैं। हर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम, वॉर्ड व सेक्टरों तक में संपर्क कर चुके हैं।'
सपा का दंगल
नोएडा सीट से समाजवादी पार्टी के कैंडिडेट अशोक चौहान लंबे समय से चुनाव प्रचार कर रहे थे। एसपी में प्रदेश अध्यक्ष के रूप में शिवपाल यादव तैनात हुए तो उन्होंने जेवर से बेवन नागर और दादरी से रविंद्र भाटी को पार्टी प्रत्याशी बना दिया। अब लड़ाई प्रत्याशियों की सूची पर जाकर टिक गई है। वहीं मुलायम सिंह को अखिलेश ने जो सूची सौंपी थी उसमें नोएडा से सुनील चौधरी, दादरी से राजकुमार भाटी और जेवर से नरेंद्र नागर के नाम हैं। चुनावों की घोषणा के बीच इन छह प्रत्याशियों में से तीन का सिलेक्शन होना है। ये सभी अभी तक सस्पेंस में हैं। जो हालात नजर आ रहे हैं इससे तय है कि कई प्रत्याशी बदले जाने हैं। इनमें किसका पलड़ा भारी है, यह तो समय बताएगा लेकिन यह साफ है कि पहले वे पार्टी में अपनी तस्वीर क्लीयर करेंगे। इसके बाद संगठन से कोआर्डिनेशन के बाद वोटर से नाता जोड़ने का काम करेंगे। समय बेहद कम है ऐसे में जनसंपर्क नए प्रत्याशी के लिए चुनौती भरा हो सकता है।
नाम तय नहीं हुए
बीजेपी और कांग्रेस की हालत बेहद नाजुक है। दोनों पार्टियों ने नोएडा, दादरी व जेवर सीट पर अभी तक किसी का नाम तय नहीं किया है। जब तक पार्टी अपना प्रत्याशी का नाम तय नहीं करेगी तब तक चुनावी मैदान में हलचल कम ही नजर आएगी। यह बात अलग है कि बीजेपी के नेता नवाब सिंह नागर का कहना है कि पार्टी का संगठन बूथ लेवल पर तेजी से काम कर रहा है। इसमें कहीं कोई संदेह नहीं होना चाहिए। कांग्रेस अभी गठबंधन के सस्पेंस में फंसी है। उनकी सीएम फेस शीला दीक्षित गठबंधन का समर्थन कर रही हैं, जबकि प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर सपा के साथ गठबंधन के पक्षधर नहीं हैं।
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