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January 6, 2017

IIT खड़गपुर में 23 साल बाद पहुंचे गूगल के CEO, स्टूडेंट्स से की बातचीत




नई दिल्ली
गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई 23 साल बाद गुरुवार को आईआईटी खड़गपुर गए, जहां से उन्होंने पढ़ाई की थी। वहां कैंपस में उन्होंने 3,500 से ज्यादा लोगों को संबांधित किया। इंफोएज के सीईओ हितेश ओबरॉय के साथ बातचीत में पिचाई ने कहा, 'मैं अच्छा वक्त बिताने की उम्मीद के साथ कॉलेज आया था।' इंफोएज के पास नौकरी, 99एकड़ और जीवनसाथी जैसी वेबसाइट्स में बहुमत हिस्सेदारी है।

यह पूछे जाने पर कि 'गूगल जैसी कोई कंपनी' अब तक इंडिया से क्यों नहीं निकली है और भारतीय स्टार्टअप्स को किन बातों पर ध्यान देना चाहिए, पिचाई ने कहा कि भारत में जो मार्केट डिवेलप हो रहा है, उसकी पूरी क्षमता सामने आने में अभी कुछ और साल लगेंगे।

उन्होंने कहा, 'उम्मीद के मुताबिक, भारतीय कंपनियों की नजर इस दिशा में है और वे इंडोनेशिया, वितयनाम और थाईलैंड को टारगेट कर रही हैं। मुझे लगता है कि वे मार्केट डिवेलप्ड हैं और वहां इनके कुछ प्रॉडक्ट्स का प्रदर्शन अच्छा रह सकता है। इन कंपनियों को अपना लक्ष्य और ऊंचा करना चाहिए।'

यह पूछे जाने पर कि गूगल में इनोवेशन की प्रेरणा कहां से आती है, पिचाई ने कहा कि सोच यह रहती है कि ऊंचा लक्ष्य रखा जाए और ऐसा सलूशन निकाला जाए, जो अरबों लोगों के काम आ सके और उनके लिए किसी असल समस्या को हल कर सके।

पिचाई ने कहा, 'लैरी (पेज) का कहना है कि अगर आप वाकई मुश्किल चीजों पर काम करेंगे तो बेहतर स्थिति में रहेंगे क्योंकि उसमें आपके सामने कॉम्पिटिशन नहीं होगा। अगर आप फेल भी हो जाएं तो उस प्रक्रिया में आप कुछ नया और अलग काम कर चुके होंगे। यही वह फिलॉसफी है, जिसने हमें इतने वर्षों से प्रेरित किया है।'

पिचाई ने मशीन लर्निंग और आर्टफिशल इंटेलिजेंस के बारे में गूगल की प्रतिबद्धता दोहराई, जिस पर कंपनी कुछ समय से फोकस कर रही है। इस दिशा में आगे बढ़ने से गूगल को अपने ट्रांसलेट प्रॉडक्ट पर अनुवादों को बेहतर ढंग से पेश करने में मदद मिली है। हालांकि पिचाई ने आईआईटी खड़गपुर में हिंदी को लेकर अपनी शुरुआती मुश्किलों के बारे में भी जानकारी दी।

उन्होंने ओबरॉय से कहा, 'मैंने स्कूल लेवल पर हिंदी पढ़ी थी, लेकिन कभी इसमें ज्यादा बातचीत नहीं की थी। यहां शुरुआती दिनों में मुझे लगता था कि लोगों को अबे साले कहकर भी बुलाया जाता है। तो एक दिन मैंने मेस में किसी को यही कहकर बुला दिया था।' पिचाई ने कहा कि वह भी क्लास बंक किया करते थे। उन्होंने यह भी कहा कि यह सुनकर शॉक लग जाता है कि बच्चे आठवीं क्लास से ही आईआईटी की तैयारी कर रहे हैं।

पिचाई की पत्नी का नाम अंजलि है, जिनसे उनकी मुलाकात कैंपस में हुई थी। पिचाई ने कहा कि उन दिनों रोमांस करना मुश्किल था क्योंकि गर्ल्स हॉस्टल में जाना आसान नहीं था। उन्होंने कहा, 'किसी को बाहर खड़े होकर जोर से बोलना पड़ता था कि अंजलि, सुंदर यहां है।'

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