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March 31, 2017

मीट विक्रेता चाय बेचने को मजबूर



मुजफ्फरनगर
अवैध स्लॉटरहाउस और मीट की दुकानों पर कार्रवाई के बाद बेरोजगार हुए मीट कारोबारियों ने परिवार के भरण पोषण के लिए दूसरा काम शुरू कर दिया है। बीजेपी सरकार बनने से पहले मुजफ्फरनगर में जो लोग मीट का कारोबार करते थे आज चाय और परचून की दुकान चलाने के लिए मजबूर हैं। इनका कहना है कि मीट का कारोबार बंद होने के बाद परिवार चलाने के लिए कुछ तो करना पड़ेगा। मुजफ्फरनगर में रहने वाले नजाकत ने कहा, 'मेरी मीट की दुकान को जबरन बंद कर दिया गया, मेरे पास लाइसेंस भी था। इसकी वजह से मुझे चाय बेचने को मजबूर होना पड़ा।' एक अन्य मीट दुकानदार की भी यही शिकायत है। वह कहते हैं कि प्रशासन ने जानबूझकर उनकी दुकान पर ताला लगा दिया।मीट कारोबारी रहे कलीम का कहना है कि हमारी मीट की दुकान थी। हमारे पास इसका लाइसेंस भी था। योगी जी ने मीट की दुकान बंद करा दी। परिवार चलाने के लिए हमने परचून की दुकान खोल ली।


दिलशाद नाम के एक ग्राहक भी मीट कारोबारियों के लिए चिंतित हैं। उनका कहना है कि मीट दुकानदार इन दिनों चाय बेचने को मजबूर हैं, उनके पास कोई अन्य विकल्प नहीं है। उन्हें इस काम का कोई अनुभव भी नहीं है।'ग्राहक ने आगे कि कहा बूचड़खाने बंद किए जाने से कई परिवार मुश्किल में हैं, कई कारोबारियों ने अपना बिजनस ही बदल लिया है। पूरे प्रदेश में योगी सरकार के इस फैसले से बड़ी संख्या में लोगों पर असर डाला है। मीट के कारोबार पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है और इस कारोबार से जुड़े लोगों ने पैसे कमाने के अन्य जरिए तलाशने शुरू कर दिए हैं। शुरुआत में प्रदेश सरकार ने लोगों की सेहत और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अवैध बूचड़खानों को बंद करने के निर्देश जारी किए थे। इसके बाद बूचड़खानों के मालिक और मीट कारोबारी हड़ताल पर चले गए। खबरें मिल रही हैं कि बूचड़खानों के मालिक और रीटेलर निगम और पुलिस द्वारा डाले जा रहे छापों का भी विरोध कर रहे हैं। उनकी शिकायत है कि लाइसेंस होने के बाद भी छापे डाले जा रहे हैं।

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