: "width=1100"' name='viewport'/> बदायूँ एक्सप्रेस | तेज रफ़्तार : 01/06/17

बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक शुरू, रणनीतियों पर होगी चर्चा




नई दिल्ली। बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक आज से शुरू हो गई है। दिल्ली के नई दिल्ली नगर पालिका परिषद कनवेंशन सेंटर में ये बैठक हो रही है । उत्तर प्रदेश, पंजाब समेत पांच राज्यों में चुनावी तारीखों का ऐलान हो चुका है। ऐसे में बीजेपी कार्यकारिणी की ये बैठक पार्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह बैठक में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व में हो रही है। इस दौरान आर्थिक और राजनीतिक प्रस्ताव पारित किए जाएंगे। बैठक के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कार्यकारिणी के सदस्यों को संबोधित करेंगे।
उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर के लिए चुनाव आयोग ने तारीखों का ऐलान कर दिया है। जाहिर है कि नोटबंदी के बाद ये पहले विधानसभा चुनाव हैं, जहां बीजेपी के सामने चुनाव जीतने की बड़ी चुनौती है। ऐसे में चुनावी रणभेरी के बीच पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी भी बेहद महत्वपूर्ण है।
शुक्रवार सुबह दस बजे के करीब पार्टी पदाधिकारियों की बैठक होगी और शाम चार बजे के करीब कार्यकारिणी की बैठक औपचारिक रूप से शुरू होगी। इसकी शुरुआत पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के भाषण के साथ होगी। शनिवार को अगले दिन की बैठक की शुरुआत होने के बाद आर्थिक और राजनीतिक प्रस्ताव पेश किए जाएंगे। आर्थिक प्रस्ताव में नोटबंदी से होने वाले फायदों, किसानों और गरीबों के लिए शुरू की गई योजनाओं का जिक्र किया जाएगा। नोटबंदी को लेकर विपक्ष के आरोपों को भी खारिज करने का काम इसमें किया जाएगा। राजनीतिक हालत में देश के वर्तमान राजनीतिक हालत की चर्चा की जाएगी।
सूत्रों का कहना है कि उरी हमले के बाद पाकिस्तान पर हुए सर्जिकल स्ट्राईक का इसमें खासतौर से जिक्र किया जाएगा। इसे सीमा पार से होने वाले आतंकवाद के खिलाफ सरकार की बड़ी उपलब्धि के तौर पर बताते हुए ऐतिहासिक कदम बताया जाएगा। शनिवार को ही चार बजे के करीब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समापन भाषण देंगे।
सूत्रों का कहना है कि चुनावी बेला में हो रही इस कार्यकारिणी में यूं तो सभी राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों पर चर्चा होगी। लेकिन उत्तर प्रदेश की राजनीतिक महत्ता देखते हुए उस पर खास ध्यान रहेगा। कार्यकारिणी में आए हुए नेताओं से सरकार की उपलब्धियों, खासतौर से किसानों, दलितों, गरीबों के लिए शुरू की गई योजनाओं की जानकारी लेकर जनता के बीच जोरदार तरीके से जाने को कहा जाएगा। इसके अलावा पार्टी को साफ लगता है कि नोटबंदी के जरिए सरकार ने काला धन कारोबारियों, भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। जनता ने भी इस मसले पर सरकार का पूरा साथ दिया है। पर जनता को हुई परेशानियों को देखते हुए उनके बीच इसके फायदे और जोरदार तरीके से पहुंचाने को कहा जाएगा।
बैठक में आने वाले आम बजट के लिए सदस्यों के सुझाव भी लिए जाएंगे और सरकार को उन पर चर्चा करने के लिए भेजा जाएगा। इस बैठक में बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों, प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व अध्यक्ष समेत करीब साढ़े तीन सौ सदस्य हिस्सा लेंगे।

IIT खड़गपुर में 23 साल बाद पहुंचे गूगल के CEO, स्टूडेंट्स से की बातचीत




नई दिल्ली
गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई 23 साल बाद गुरुवार को आईआईटी खड़गपुर गए, जहां से उन्होंने पढ़ाई की थी। वहां कैंपस में उन्होंने 3,500 से ज्यादा लोगों को संबांधित किया। इंफोएज के सीईओ हितेश ओबरॉय के साथ बातचीत में पिचाई ने कहा, 'मैं अच्छा वक्त बिताने की उम्मीद के साथ कॉलेज आया था।' इंफोएज के पास नौकरी, 99एकड़ और जीवनसाथी जैसी वेबसाइट्स में बहुमत हिस्सेदारी है।

यह पूछे जाने पर कि 'गूगल जैसी कोई कंपनी' अब तक इंडिया से क्यों नहीं निकली है और भारतीय स्टार्टअप्स को किन बातों पर ध्यान देना चाहिए, पिचाई ने कहा कि भारत में जो मार्केट डिवेलप हो रहा है, उसकी पूरी क्षमता सामने आने में अभी कुछ और साल लगेंगे।

उन्होंने कहा, 'उम्मीद के मुताबिक, भारतीय कंपनियों की नजर इस दिशा में है और वे इंडोनेशिया, वितयनाम और थाईलैंड को टारगेट कर रही हैं। मुझे लगता है कि वे मार्केट डिवेलप्ड हैं और वहां इनके कुछ प्रॉडक्ट्स का प्रदर्शन अच्छा रह सकता है। इन कंपनियों को अपना लक्ष्य और ऊंचा करना चाहिए।'

यह पूछे जाने पर कि गूगल में इनोवेशन की प्रेरणा कहां से आती है, पिचाई ने कहा कि सोच यह रहती है कि ऊंचा लक्ष्य रखा जाए और ऐसा सलूशन निकाला जाए, जो अरबों लोगों के काम आ सके और उनके लिए किसी असल समस्या को हल कर सके।

पिचाई ने कहा, 'लैरी (पेज) का कहना है कि अगर आप वाकई मुश्किल चीजों पर काम करेंगे तो बेहतर स्थिति में रहेंगे क्योंकि उसमें आपके सामने कॉम्पिटिशन नहीं होगा। अगर आप फेल भी हो जाएं तो उस प्रक्रिया में आप कुछ नया और अलग काम कर चुके होंगे। यही वह फिलॉसफी है, जिसने हमें इतने वर्षों से प्रेरित किया है।'

पिचाई ने मशीन लर्निंग और आर्टफिशल इंटेलिजेंस के बारे में गूगल की प्रतिबद्धता दोहराई, जिस पर कंपनी कुछ समय से फोकस कर रही है। इस दिशा में आगे बढ़ने से गूगल को अपने ट्रांसलेट प्रॉडक्ट पर अनुवादों को बेहतर ढंग से पेश करने में मदद मिली है। हालांकि पिचाई ने आईआईटी खड़गपुर में हिंदी को लेकर अपनी शुरुआती मुश्किलों के बारे में भी जानकारी दी।

उन्होंने ओबरॉय से कहा, 'मैंने स्कूल लेवल पर हिंदी पढ़ी थी, लेकिन कभी इसमें ज्यादा बातचीत नहीं की थी। यहां शुरुआती दिनों में मुझे लगता था कि लोगों को अबे साले कहकर भी बुलाया जाता है। तो एक दिन मैंने मेस में किसी को यही कहकर बुला दिया था।' पिचाई ने कहा कि वह भी क्लास बंक किया करते थे। उन्होंने यह भी कहा कि यह सुनकर शॉक लग जाता है कि बच्चे आठवीं क्लास से ही आईआईटी की तैयारी कर रहे हैं।

पिचाई की पत्नी का नाम अंजलि है, जिनसे उनकी मुलाकात कैंपस में हुई थी। पिचाई ने कहा कि उन दिनों रोमांस करना मुश्किल था क्योंकि गर्ल्स हॉस्टल में जाना आसान नहीं था। उन्होंने कहा, 'किसी को बाहर खड़े होकर जोर से बोलना पड़ता था कि अंजलि, सुंदर यहां है।'

अमीर-गरीब सबके खाते में पैसे भेजेगी सरकार




नई दिल्ली। मोदी सरकार नोटबंदी के बाद देशभर के लोगों को बड़ा तोहफा दे सकती है। इसके तहत देश के हर नागरिक को हर महीने आमदनी के तौर पर एक तयशुदा रकम मिलेगी। सूत्रों के मुताबिक, आर्थिक सर्वे और आम बजट में इसका ऐलान हो सकता है। यह भी कहा जा रहा है कि अगर सबके लिए नहीं तो सरकार कम-से-कम उन जरूरतमंदों के लिए यह स्कीम लागू करेगी, जिनके पास कमाई का जरिया नहीं है। हर अकाउंट में 500 रूपये डाल कर योजना की शुरूआत हो सकती है। इससे देश भर के करीब 20 करोड़ जरूरतमंदों को फायदा मिल सकता है।

यह प्रस्ताव लंदन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर गाय स्टैंडिंग ने तैयार किया है। जिनीवा से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार से जुड़े एक जिम्मेदार शख्स ने कन्फर्म किया है कि बजट में इसका ऐलान मुमकिन है। प्रोफेसर गाय ने संकेत दिया कि सरकार इसे फेज वाइज लागू कर सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने मध्य प्रदेश की एक पंचायत में पायलट प्रॉजेक्ट के तौर पर ऐसी स्कीम पर काम किया था, जहां बेहद साकारत्मक नतीजे आए थे। मैंने अपने प्रपोजल में अमीर-गरीब सबके लिए निश्चित आमदनी की बात कही है। प्रोफेयर गाय पूरी दुनिया में यूनिवर्सल बेसिक इनकम की पुरजोर वकालत करते रहे हैं। वैसे सरकारी सूत्रों ने बजट में इस स्कीम के बारे में कुछ भी बताने से इनकार कर दिया, लेकिन प्रोफेसर गाय ने इस मसले पर विस्तार से बात की। पढि़ए इस बातचीत के अहम अंश :
<मोदी सरकार बजट में यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम की घोषणा करेगी इस बारे में आपको क्या जानकारी है?
—मुझे पिछले दिनों सरकार के टॉप अधिकारियों की ओर से बताया गया कि वो बजट सर्वे में मेरी रिपोर्ट को शामिल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार इसकी घोषणा करेगी। यह नरेंद्र मोदी का बहुत बोल्ड डिसीजन होगा और देश के इतिहास में गेमचेंजर हेागा।
<फिर भी कोई ठोस संकेत तो मिला होगा। आपकी इस मुद्दे पर मोदी से
बात हुई?
—आपको बता दूं कि यूनिर्वसल बेसिक इनकम स्कीम पर पेश रिसर्च को इकनॉमिक सर्वे रिपोर्ट में शामिल किया गया है और नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविन्द पनगढिय़ा ने मुझसे इस बारे में बात की थी और जानकारी दी।
<इस स्कीम के तहत किसे फायदा मिले, किसे नहीं मिले, यह कैसे तय होगा?
—योजना तभी सफल होगी जब अमीर-गरीब का भेद किए बिना हर नागरिक को खास इनकम हर महीने मिले। इसमें भेद किया तो फिर स्कीम अपने मूल रूप में नहीं रहेगी। करप्शन बढ़ेगा। हां, एक बार सभी को पैसे देने के बाद जो गरीबी के दायरे से बाहर आएं उनसे सब्सिडी वापस लें या दूसरे तरीके से राशि वापसी का सिस्टम बनाएं। सभी को आधार नंबर से जोड़कर यह लाभ मिलेगा।
<ऐसी स्कीम के लिए बहुत बड़े फंड की जरूरत होती है। क्या सरकार के पास फंड है?
—मैंने अपनी रिपोर्ट में फंड के बारे में भी स्थिति स्पष्ट कर दी है। मेरे हिसाब से अगर स्कीम को पूरे देश में लागू किया जाता है तो जीडीपी का 3 से 4 फीसदी खर्च आएगा, जबकि अभी कुल जीडीपी का 4 से 5 फीसदी सरकार सब्सिडी में खर्च कर रही है। हां, इस स्कीम को लागू करने के बाद सरकार को चरणबद्ध तरीके से सब्सिडी समाप्त करने की दिशा मे भी कदम उठाना पड़ेगा।
यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम और सब्सिडी दोनों साथ-साथ नहीं चल सकतीं। इसके अलावा इस स्कीम के लिए सरकार माइनिंग और बड़े प्रॉजेक्ट पर अलग से सरचार्ज निकालकर राशि जुटा सकती है। मुझे नहीं लगता है कि कहीं से फंड की कमी होगी।
<अभी मोदी सरकार ने नोटबंदी का फैसला लिया था। क्या यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम और नोटबंदी के बीच कुछ संबंध है?
—नहीं। जहां तक मेरे प्रॉजेक्ट का सवाल है, दोनों का आपस में कोई संबंध नहीं है। लेकिन नोटबंदी बहुत साहसिक फैसला है। नोटबंदी के बाद जो राशि आएगी उसका उपयोग सरकार इसमें कर सकती है, बस इतना संबंध है। हां, नोटबंदी के फैसले के बाद इतना जरूर संकेत मिला कि मोदी और बड़े जोखिम भरे फैसले कर सकते हैं।
<ऐसे फैसले का राजनीतिक असर कैसा होगा? क्या मोदी इस स्कीम को लागू करने का राजनीतिक जोखिम ले सकते हैं?
—नागरिकों के कल्याण और देश के आर्थिक विकास के लिए जरूरी स्कीम को राजनीति की नजरों से देखने की जरूरत नहीं है। लेकिन मोदी अगर इसे लागू करते हैं तो उन्हें राजनीतिक रूप से भी बहुत बड़ा लाभ होगा। नोटबंदी के बाद वह गरीबों के हितैषी माने जा रहे हैं और यह स्कीम भारत जैसे देश जहां सबसे बड़ी ऐसी आबादी है जिसका हर महीने की कोई निश्चित आय नहीं है, उनके लिए यह जादू होगा।
<आपने भारत में जो पायलट प्रॉजेक्ट किया उसके क्या नतीजे रहे?
—हमने इंदौर के 8 गांवों की 6,000 आबादी के बीच 2010 से 2016 के बीच इस स्कीम का प्रयोग किया। इसमें पुरूष-महिला को 500 और बच्चे को हर महीने 150 रूपये दिए गए। इन पांच सालों में इनमें अधिकतर ने इस स्कीम का लाभ मिलने के बाद अपनी आय बढ़ा दी। दिल्ली में लगभग दो सौ लोगों के बीच प्रयोग सफल रहा। इनकी केस स्टडी को सरकार ने देखने-समझने के बाद ही आगे बढऩे का मन बनाया।
<आलोचकों का मानना है कि ऐसी स्कीम से लोगों को कुछ न करने की अधिक प्रेरणा देगी?
—यह गलत धारणा है। दरअसल मध्य वर्ग पूर्वग्रह ऐसी सोच के पीछे है। मध्य प्रदेश सहित विश्व के तमाम दूसरे इलाकों में हमने जब पायलट प्रॉजेक्ट पर काम किया तो पाया कि दरअसल इस स्कीम के बाद तो उनमें कुछ करने की अधिक प्रेरणा जगी। जब महीने की एक निश्चित इनकम के बारे में गरीबों को गारंटी मिली तो खुद को अपग्रेड करने और उससे अधिक कमाने की प्रेरणा अधिक मिली।
<आलोचक यूनिर्वसल बेसिक इनकम स्कीम को लेफ्ट आधारित पॉपुलिस्ट स्कीम के तौर पर भी देखते हैं। ऐसे में आर्थिक सुधार के हिमायती माने जाने वाली मोदी सरकार ऐसी स्कीम पर आगे बढऩे को कैसे तैयार हो गई?
—यह गलत सोच है कि यह स्कीम लेफ्ट केंद्रित है। वैसे भी, मुझे न कांग्रेस, न ही मोदी की नीतियों को अलग करके देखने की जरूरत है। कांग्रेस के शासन के दौरान भी इस स्कीम के बारे में सरकार ने मुझसे संपर्क किया था। लेकिन तब सरकार इसे लागू करने की हिम्मत नहीं कर सकी।

बीएसपी आगे, सपा में सस्पेंस




नोएडा : जिला गौतमबुद्ध नगर की तीनों विधानसभा सीटों नोएडा, दादरी और जेवर पर 11 फरवरी को वोटिंग होगी। 17 जनवरी को अधिसूचना जारी होते ही नॉमिनेशन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इन चुनावी तैयारियों में बीएसपी सबसे आगे निकली। वह तीनों सीट के लिए कैंडिडेट घोषित कर चुकी है जबकि सपा प्रत्याशियों को लेकर अभी भी सस्पेंस है। देश की दोनों बड़ी राजनीतिक पार्टियां कांग्रेस और बीजेपी अभी तक अपने प्रत्याशियों का चयन नहीं कर पाई है। खास बात यह है चूंकि जिले में पहले चरण में ही वोटिंग होगी, लिहाजा यहां प्रचार करने का सबसे कम मौका प्रत्याशियों को मिलेगा। यदि बीजेपी और कांग्रेस अपने प्रत्याशियों के नाम की घोषणा 20 जनवरी तक भी करती हैं तो उन्हें 21 दिन ही प्रचार के लिए मिल पाएंगे।

एक साल से कैंडिडेट तय
सभी राजनीतिक दल वैसे तो विधानसभा चुनाव की तैयारियां छह-सात महीने से कर रहे थे लेकिन इस मामले में बीएसपी फिलहाल लीड ले चुकी है। बीएसपी ने दादरी विधानसभा सीट से सतबीर गुर्जर और जेवर सीट पर वेदराम भाटी को एक साल पहले ही अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है। ये दोनों मौजूदा विधायक हैं। नोएडा विधानसभा सीट से रविकांत मिश्रा को चार महीने पहले बीएसपी ने अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया था। तब से बीएसपी नोएडा में जनसंपर्क में जुटी हुई है। दादरी से बीएसपी कैंडिडेट सतबीर गुर्जर का कहना है कि उनकी पार्टी यह चुनाव बीएसपी के विकास कार्यों के अजेंडे पर लड़ेगी। उन्होंने बताया कि जिले की दो सीटें बीएसपी के कब्जे में हैं। सतबीर ने कहा कि, 'हमारा टारगेट है कि इस चुनाव में जिले की तीनों सीटें बीएसपी की झोली में डाली जाएं। हम हर बूथ तक कार्यकर्ताओं को तैनात कर चुके हैं। हर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम, वॉर्ड व सेक्टरों तक में संपर्क कर चुके हैं।'
सपा का दंगल
नोएडा सीट से समाजवादी पार्टी के कैंडिडेट अशोक चौहान लंबे समय से चुनाव प्रचार कर रहे थे। एसपी में प्रदेश अध्यक्ष के रूप में शिवपाल यादव तैनात हुए तो उन्होंने जेवर से बेवन नागर और दादरी से रविंद्र भाटी को पार्टी प्रत्याशी बना दिया। अब लड़ाई प्रत्याशियों की सूची पर जाकर टिक गई है। वहीं मुलायम सिंह को अखिलेश ने जो सूची सौंपी थी उसमें नोएडा से सुनील चौधरी, दादरी से राजकुमार भाटी और जेवर से नरेंद्र नागर के नाम हैं। चुनावों की घोषणा के बीच इन छह प्रत्याशियों में से तीन का सिलेक्शन होना है। ये सभी अभी तक सस्पेंस में हैं। जो हालात नजर आ रहे हैं इससे तय है कि कई प्रत्याशी बदले जाने हैं। इनमें किसका पलड़ा भारी है, यह तो समय बताएगा लेकिन यह साफ है कि पहले वे पार्टी में अपनी तस्वीर क्लीयर करेंगे। इसके बाद संगठन से कोआर्डिनेशन के बाद वोटर से नाता जोड़ने का काम करेंगे। समय बेहद कम है ऐसे में जनसंपर्क नए प्रत्याशी के लिए चुनौती भरा हो सकता है।
नाम तय नहीं हुए
बीजेपी और कांग्रेस की हालत बेहद नाजुक है। दोनों पार्टियों ने नोएडा, दादरी व जेवर सीट पर अभी तक किसी का नाम तय नहीं किया है। जब तक पार्टी अपना प्रत्याशी का नाम तय नहीं करेगी तब तक चुनावी मैदान में हलचल कम ही नजर आएगी। यह बात अलग है कि बीजेपी के नेता नवाब सिंह नागर का कहना है कि पार्टी का संगठन बूथ लेवल पर तेजी से काम कर रहा है। इसमें कहीं कोई संदेह नहीं होना चाहिए। कांग्रेस अभी गठबंधन के सस्पेंस में फंसी है। उनकी सीएम फेस शीला दीक्षित गठबंधन का समर्थन कर रही हैं, जबकि प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर सपा के साथ गठबंधन के पक्षधर नहीं हैं।

दबतोरी में महिला ने ट्रेन से कटकर खुदकुशी की




पति से झगड़ा होने के बाद एक महिला ने आत्मघाती कदम उठा लिया। उसने ट्रेन से कटकर खुदकुशी कर ली। परिवार वालों ने शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया है। पुलिस को भी खबर नहीं दी है।

बिसौली कोतवाली के पपगांव निवासी रामलली (40) का किसी बात पर अपने पति से झगड़ा हो गया था। इसके बाद वह दबतोरी रेलवे स्टेशन के आउटर पर पहुंची। यहां उसने मालगाड़ी के आगे कूद गई। इससे उसके दोनों पैर कट गए। ट्रेन के गार्ड ने इसकी सूचना स्टेशन मास्टर सुनील कुमार को दी। स्टेशन मास्टर ने तुरंत ही एंबुलेंस को बुलाया। महिला को एंबुलेंस से अस्पताल लाया जा रहा था। उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। इसके बाद परिवार वाले शव रास्ते से ही वापस गांव ले गए। पुलिस को कोई खबर नहीं दी गई है।

जिले का पहला डिजिटल गांव बना नौशेरा



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने भाषणों में ही सिर्फ डिजिटलाइजेशन की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि जमीनी स्तर पर भी डिजिटलाइजेशन योजना पर कार्य शुरू हो गया है। जिले में पहला डिजिटल गांव नौशेरा को बनाया गया है, जिसमें सभी परिवारों के बैंक खाते खोले जाने के साथ आधार कार्ड से लिंक भी किए जा चुके हैं। इससे गांव का कोई भी परिवार बैंक खाते से विहीन नहीं बचा है। इसी गांव में पीएनबी का ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आर-सेटी) खोला जाएगा।
 
जिले की अग्रणी बैंक पंजाब नेशनल बैंक की ओर से उझानी ब्लॉक में स्थित नौशेरा गांव को पहला डिजिटल गांव बनाने के तय किया। इसके तहत वहां पर ग्रामीणों को प्रशिक्षित करने के लिए वित्तीय जागरूकता शिविर लगाए गए। इसमें बीते माह में लगाए गए पांच दिवसीय वित्तीय जागरूकता शिविर में आठ सौ लोगों के बैंक खाते खोले गए। नौशेरा गांव की आबादी करीब सात हजार है। इसमें 5600 लोगों के बैंक खाते खोले जा चुके हैं। इससे सभी परिवारों के बैंक खाते संचालित हैं। यही नहीं इन सभी बैंक खातो को आधार कार्ड से लिंक किया जा चुका है, जिन परिवारों के बैंक खाते खुले हैं, उनको रुपे कार्ड दिया जा रहा है, जिससे वे ऑनलाइन बैंकिंग कर सकेंगे। साथ ही गांव के तमाम लोगों को इसके लिए प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।
नौसेरा गांव में खोले जा रहे पीएनबी के ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आर-सेटी) का शिलान्यास पीएनबी के जोनल मैनेजर (आगरा मंडल) एसके बहल 13 जनवरी को करेंगे। इसकी तैयारियां बैंकिंग अधिकारी कर रहे हैं।

ऐसे आसान होगी डिजिटल बैंकिंग
बदायूं। बैंक खाताधारकों को आधार कार्ड से जोड़े जाने के बाद डिजिटल बैंकिंग आसानी से की जा सकती है। इस बारे में पीएनबी के वित्तीय साक्षरता केंद्र संचालक डीके चड्ढा का कहना है कि आधार कार्ड से बैंक खाते लिंक होने के बाद डिजिटल की श्रेणी में आ जाते हैं। यह सभी बैंक खाताधारक ऑनलाइन ट्रांक्जेशन करने के साथ बायोमीट्रिक के जरिए खरीदारी करके उसका भुगतान भी कर सकते हैं। इसके लिए दुकानदारों को पॉस या स्वाइप मशीन रखना होगा।

केंद्र सरकार की डिजिटलाइजेशन योजना के अंतर्गत नौशेरा गांव को डिजिटल किया जा चुका है। अब दूसरे गांव का चयन किया जाएगा, जिसे डिजिटल किया जाएगा।
अनुराग रमन, लीड बैंक मैनेजर, पीएनबी

जिले भर में उतरवाए गए होर्डिंग्स बैनर




विधानसभा चुनाव की घोषणा होने के बाद चुनाव आचार संहिता का पालन करते हुए प्रशासन ने शहर में राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों की ओर से लगाए गए होर्डिंग्स,  बैनर, पोस्टर, वॉल पेंटिंग समेत तमाम चुनाव प्रचार सामग्री हटवाने का जो कार्य बुधवार को शुरू हुआ था, वो रात भर जारी रहा। गुरुवार को दिन भर भी चलता रहा। शहर सहित जिले में लगी अधिकांश चुनाव प्रचार सामग्री प्रशासन ने हटवा दी।

बिसौली में डीएम पवन कुमार एवं एसएसपी महेंद्र यादव ने एक दो जगह होर्डिंग्स दिखने पर नाराजगी जताई तो तुरंत होर्डिंग्स उतरवा दिए गए। डीएम एवं एसएसपी ने एसडीएम और सीओ के साथ बैठक करके चुनाव शांतिपूर्ण कराने के लिए दिशानिर्देश दिए। अधिकारियों ने शस्त्र जमा कराने, असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई करने, बूथों पर सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद करने के अलावा प्रत्याशियों द्वारा आचार संहिता का सख्ती से पालन कराने को लेकर कड़े निर्देश जारी किए।
उझानी में पालिका  प्रशासन और पुलिस ने दूसरे दिन भी प्रत्याशियों और उनके समर्थकों  के पोस्टर और होर्डिंग्स उतरवाने का काम जारी रखा। मेन मार्केट से ईओ संजय  कुमार तिवारी और सफाई निरीक्षक संजीव कुमार ने होर्डिंग्स उतरवाकर पालिका  कार्यालय में इकट्ठे करा लिए। कोतवाल गोपींचद्र यादव ने बुर्रा और संजरपुर  रोड पर झंडे-पोस्टर हटवा दिए। उघैती में भारत निवार्चन अयोग द्वारा चुनाव आचार सहिता लागू होते ही प्रशासन ने कस्बा एवं मेन मार्केट में लगे राजनैतिक पार्टीयों के बैनर व पोस्टर हटा कर अपने कब्जे में ले लिया। नाधा में चुनाव आचार संहिता लगते ही ग्रामीण क्षेत्र में भी पुलिस ने बुधवार दिन के साथ रात में पार्टियों के होर्डिंग्स उतरवा दिए। गुरुवार को डीएम एवं एसएसपी महेंद्र यादव के नाधा पहुंचने पर बाकी होर्डिंग्स भी उतरवा दिए गए।

बैंक मैनेजर बताकर खाते से निकाले पचास हजार



इस्लामनगर में खुद को पीएनबी बैंक का मैनेजर बताकर ठग ने एक व्यक्ति के खाते से पचास हजार रुपये निकाल लिए। पीड़ित ने थाना पुलिस को तहरीर दी है। थाना क्षेत्र के गांव मौजुद्दीनगर निवासी राजेश यादव ने बताया कि उसके मोबाइल नंबर 9759489983 पर 8873539434 से कॉल आई कि मैं पंजाब नेशनल बैंक का मैनेजर बोल रहा हूं तुम्हारा खाता बंद हो गया है जिसको चालू रखने के लिए आधार कार्ड, एटीएम का सीरियल नंबर की बताओ। जिस पर राजेश ने अपने आधार कार्ड का नंबर और एटीएम कार्ड का सीरियल नंबर बता दी। बस क्या था कि थोड़ी देर बाद ही उसके मोबाइल पर पचास हजार रुपये निकलने का मैसेज आ गया तभी राजेश खाते से रुपये निकलने की जानकारी लेने बैंक पहुंचा तो बैंक में बताया गया कि यहां से कोई भी रुपया तुम्हारे खाते से नहीं निकला है।  

यूपी जीतने के लिए मोदी की टीम में शामिल हुए 26 ‘चाणक्य’




आचार संहिता लगते ही यूपी में चुनावी मैदान सज चुका है। इसके मद्देनजर भाजपा ने एक-दो नहीं पूरे 26 चाणक्यों की फील्डिंग सजाई है। जो यूपी जीतने के लिए चुनाव की दशा देख पार्टी की दिशा तय करेंगे। रणनीति तय करने का दारोमदार इन्हीं के कंधे पर होगा। पार्टी ने इस टीम को यूपी चुनाव की कोर कमेटी का नाम दिया है। मोदी और शाह की इस टीम में राष्ट्रीय से लेकर प्रदेश स्तर के दिग्गज नेता शुमार हैं। प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य कहते हैं कि कोर कमेटी ही यूपी चुनाव लड़ने का पूरा खाका तय करेगी।

राजनाथ से लेकर रीता बहुगुणा तक शामिल

भाजपा की ओर से गठित इस कोर कमेटी में जहां केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह पहले नंबर पर हैं तो प्रदेश प्रभारी ओम  माथुर के अलावा भी कई दिग्गज शामिल हैं। इसमें केंद्रीय मंत्री ,कलराज मिश्र, लखनऊ मेयर दिनेश शर्मा, सुनील बंसल, विनय कटियार,  एलके बाजपेयी, रमापति राम त्रिपाठी, ब्रजेश पाठक आदि शामिल हैं। महिलाओं में दो चेहरे इसमें स्थान पाए हैं। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल रीता बहुगुणा जोशी और स्वाति सिंह भी चुनावी रणनीति बनाने में अहम भूमिका निभाएंगी।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव कार्यक्रम में हुए बदलाव



उत्तर प्रदेश में होने जा रहे विधानसभा चुनाव के लिए निर्वाचन आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम में आंशिक बदलाव हुआ है। कुछ चरणों के लिए चुनाव की अधिसूचना और नामांकन की अंतिम तिथि में बदलाव किया गया है हालांकि सभी चरणों में मतदान की तारीखों में कोई फेरबदल नहीं हुआ है।

प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार छठवें चरण के चुनाव की अधिसूचना सात फरवरी और सातवें चरण की नौ फरवरी को जारी होगी। पहले छठवें चरण की अधिसूचना आठ फरवरी और सातवें चरण की 11 फरवरी को जारी करने का एलान हुआ था। छठवें चरण के लिए नामांकन की आखिरी तारीख अब 14 फरवरी और सातवें चरण के लिए 16 फरवरी होगी। पहले छठवें चरण के लिए नामांकन की आखिरी तारीख 15 फरवरी और सातवें चरण के लिए 18 फरवरी घोषित की गई थी।

स्नातक कोटे की तीन और शिक्षक क्षेत्र दो विधान परिषद की सीटों के चुनाव की तिथियां भी घोषित कर दी गयी हैं। पांच सीटों के लिए इन चुनाव में राज्य के 39 जिले प्रभावित होंगे, इन जिलों में भी आदर्श आचार संहिता लागू कर दी गयी है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी टी वेंकटेश के मुताबिक विधान परिषद की इन पांच सीटों के लिए 10 जनवरी को अधिसूचना जारी की जाएगी। 17 जनवरी तक नामांकन किये जा सकेंगें। 20 जनवरी तक नाम वापस लिये जा सकेंगे।



मतदान तीन फरवरी को और मतगणना छह फरवरी को होगी। देवेन्द्र प्रताप सिंह (गोरखपुर-फैजाबाद खंड स्नातक क्षेत्र), अरुण पाठक (कानपुर खंड) और डॉ.जय पाल सिंह व्यस्त (बरेली-मुरादाबाद) का कार्यकाल 16 नवंबर को खत्म हो गया था। इसी तरह इलाहाबाद-झांसी खंड शिक्षक क्षेत्र के सुरेश कुमार त्रिपाठी व कानपुर खंड के शिक्षक राज बहादुर चंदेल का कार्यकाल 16 नवंबर खत्म हो गया था।

सपा में घमासान: पिता-पुत्र में सुलह की कोशिशें तेज, साइकिल चुनाव चिन्ह पर असमंजस बरकरार





लखनऊ:  समाजवादी पार्टी में मचे घमासान को शांत कराने में अब पूरा सैफई परिवार जुट गया है. कल देर रात तक सुलह की कोशिशों के लिए बैठकों का दौर चलता रहा. हालांकि फिलहाल अखिलेश और मुलायम खेमे की दरार भरती नज़र नहीं आ रही है. इधर पार्टी की कमान अपने हाथ में ले चुके अखिलेश ने संगठन में तब्दीलियां करनी भी शुरु कर दी हैं.

नहीं शांत हो रहा समाजवादी पार्टी में मचा घमासान

गुरुवार देर रात जब शिवपाल यादव और अमर सिंह, मुलायम सिंह यादव से मिलकर वापस लौट रहे थे, बाहर मीडिया को उम्मीद थी कि बैठक में क्या हुआ इसकी जानकारी शिवपाल या अमर ज़रूर देंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. गाड़ी मुलायम सिंह यादव के घर से बाहर निकली और बिना रुके सीधी निकल गई.

समाजवादी पार्टी में अब अखिलेश की ही चलेगी ?

जैसे-जैसे दिन बीतते जा रहे हैं, अखिलेश गुट का दावा मज़बूत होता जा रहा है. अखिलेश यादव की अपने विधायकों के साथ मीटिंग के बाद तो यही लग रहा है कि समाजवादी पार्टी में अब अखिलेश यादव की ही चलेगी.

बैठक में आए विधायकों से अखिलेश ने कहा कि यहां मौजूद किसी भी विधायक का टिकट नहीं कटेगा और अपने दम पर चुनाव लड़ेंगे.  अपनी दावेदारी मज़बूत करने के लिए अखिलेश यादव के बनाए प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने सात और ज़िलाध्यक्षों को भी बदल दिया है. सातों ज़िलाध्यक्ष शिवपाल गुट के बताए जाते हैं.

यदुवंश में सुलह की सारी कोशिशें अब तक नाकाम ?

पार्टी और परिवार में जारी दंगल को खत्म करने के लिए गुरुवार को सुबह से लेकर देर रात तक बैठकों का दौर जारी रहा,  सूत्रों से मिल रही खबरों के मुताबिक, ना तो अखिलेश गुट ही झुकने को तैयार है और ना ही मुलायम गुट.

परिवार को टूट से बचाने के लिए राजनीति से दूर रहने वाले मुलायम सिंह यादव के भाई अभय राम यादव और राजपाल यादव भी अचानक लखनऊ पहुंचे.पहले मुलायम से लंबी बातचीत की फिर अखिलेश यादव से भी जाकर मिले, इस बीच सुलह की कोशिशों में लगे आज़म खान दूसरी बार अखिलेश यादव से मिले. आज़म को अभी भी उम्मीद है कि पिता-पुत्र में सुलह हो जाएगी.

साइकिल चुनाव चिन्ह पर असमंजस बरकरार

हालांकि चुनाव चिन्ह साइकिल किस गुट के पास जाएगा इस पर अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है, क्योंकि चुनाव आयोग में दोनों में से किसी भी गुट ने साइकिल चुनाव चिन्ह पर अपना दावा नहीं ठोका है.

बॉलीवुड के मशहूर एक्टर ओम पुरी का हार्ट अटैक से निधन




नई दिल्ली: बॉलीवुड के मशहूर एक्टर ओम पुरी का हार्ट अटैक से निधन हो गया है. ओम पुरी 66 साल के थे. आज सुबह ओम पुरी ने आखिरी सांस ली. ये खबर से पूरा बॉलीवुड सदमे में है. बॉलीवुड एक्टर रजा मुराद ने एबीपी न्यूज़ से कहा है कि ये खबर सुनकर वो सुन्न हो गए हैं. अभिनेता अनुपम खेर ने भी ट्वीट करके इस पर दुख जताया है

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