: "width=1100"' name='viewport'/> बदायूँ एक्सप्रेस | तेज रफ़्तार : 01/13/17

ऐसे तो केंद्र के सर्वे में फेल हो जाएगा बदायूं



स्वच्छ भारत मिशन के तहत संचालित स्वच्छता कार्यक्रमों की हकीकत जानने के लिए केेंद्र सरकार यूपी के जिन 62 शहरों में सर्वेक्षण कराएगा, उनमें बदायूं भी शामिल है। सर्वेक्षण के लिए तय किए गए कार्यक्रम के मुताबिक क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया यानी क्यूसीआई की टीम शहर में दो फरवरी को आएगी। सर्वेक्षण में केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय से मैनेजमेंट ऑफ सॉलिड वेस्ट रूल्स- 2016 के तहत शहर में कूड़ा निस्तारण की स्थिति, शुद्ध पेयजल, खुले में शौच मुक्त कार्यक्रम के अलावा साफ-सफाई की स्थिति देखी जाएगी और उसके आधार पर टीम अंक देगी। इससे तय होगा कि बदायूं केंद्र की परीक्षा में पास होगा या फेल, लेकिन शहर में स्वच्छता की जो मौजूदा स्थिति है, उसको देखकर कोई नहीं कह सकता कि बदायूं इस सर्वेक्षण में पास हो जाएगा। अमर उजाला ने शहर में स्वच्छता और कूड़ा निस्तारण की स्थिति की पड़ताल की तो वास्तविक तस्वीर सामने आई-

शहर में कूड़े का सही ढंग से निस्तारण नहीं हो रहा है।
 कई घरों में अभी भी स्वच्छ शौचालय नहीं हैं। पालिका की ओर से खरीदे गए 10 सीटर दो मोबाइल टॉयलेट भी बाजारों में खड़े नजर नहीं आते हैं। कुछ मोहल्लों में शुष्क शौचालय संचालित हो रहे हैं, जिससे कुछ स्वच्छकार शौच उठाने का कार्य कर रहे हैं।

 गली और नुक्कड़ पर कूड़े के ढेर नजर आते हैं। कूड़े के निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है। शहर की गलियों से कूड़ा उठाया तो जाता है, लेकिन उसे शेखूपुर, दातागंज, बिसौली एवं अन्य सड़कों के किनारे डाल दिया जाता है। नगर पालिका कर्मचारी यह कहकर अपना बचाव करते हैं कि वे लोग ककराला रोड पर रसूलपुर गांव के पास स्थित 7500 वर्ग मीटर के डंपिंग ग्राउंड में डालते हैं। कूड़ा निस्तारित करने के लिए यह कहकर बचाव किया जाता है कि अभी तक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट ही शुरू नहीं हुआ है।

वाटर वर्क्स में रखे करीब 200 कूड़ेदान
बीते वर्ष नगर पालिका परिषद की ओर से लगाए गए प्लास्टिक के कूड़ेदान चंद महीनों में ही खत्म गए थे। इसके बाद लोहे के कूड़ेदान करीब 125 स्थानों पर लगे हैं, लेकिन अधिकांश शहरी उनमें कूड़ा न डालकर खुले में डालते हैं। वहीं, स्वच्छ भारत मिशन के तहत खरीदे के करीब 200 कूड़ेदार वाटर वक्र्स में रखे हुए हैं, जिन्हें अब तक नहीं लगाया गया है।

पांच सौ परिवारों में शौचालय नहीं
स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए जा रहे शौचालयों के लिए ऑनलाइन आवेदन किए जा रहे हैं। इसमें गुरुवार तक 1521 लोगों ने आवेदन किया था, जिसमें 1443 लोगों को सत्यापन किया गया तो सत्यापन के दौरान 708 लोग पात्र पाए गए, जबकि 735 लोगों को अपात्र घोषित कर दिया गया। इसमें 78 लोगों का सत्यापन अभी तक नहीं किया गया। पात्र 252 लोगों में नगर पालिका परिषद की ओर से घरों में शौचालय बनाने के लिए प्रथम किश्त की धनराशि भेजी जा चुकी है, जबकि अब भी करीब पांच सौ परिवार शौचालयविहीन हैं।

स्वच्छ भारत मिशन के तहत संचालित हो रहे कार्यक्रमों का सही ढंग से क्रियान्वयन कराने में जुटे हैं। शहर को साफ-सफाई, पेयजल एवं अन्य तमाम व्यवस्थाओं को एकदम दुरुस्त कराया जाएगा।
-लालचंद्र भारती, ईओ, नगर पालिका परिषद

इन पांच वजहों के चलते मुलायम हुए नर्म, छोड़ सकते हैं सपा पर दावा



समाजवादी पार्टी में छिड़े दंगल का आज फैसले का दिन है, कुछ ही समय में चुनाव आयोग में मामले की सुनवाई शुरू होने वाली है. पार्टी पर अपना अधिकार बताते हुए दोनों पक्ष (मुलायम और अखिलेश) के लोग आज चुनाव आयोग के सामने अपनी बात रखेंगे.

एक ओर जहां मुलायम सिंह चुनाव आयोग के सामने अपनी बात खुद रखने की तैयारी में हैं तो अखिलेश का पक्ष रामगोपाल रखेंगे. कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि चुनाव आयोग के साथ पहली सुनवाई में ही मुलायम सिंह यादव सपा पर अपना दावा छोड़ सकते हैं. आइए जानते हैं ऐसी क्या वजहें हैं जो मुलायम सिंह यादव जैसे नेता को अपना फैसला बदलने पर मजबूर कर रहा है.

मुलायम के दावा छोड़ने की 5 बड़ी वजहें

अखिलेश की जनस्वीकृत

समाजवादी दंगल के पहले दिन से लगातार अखिलेश यादव का खेमा मजबूत होता गया है. आज आलम यह है कि उनके पास करीब 224 विधायक और 50 से अधिक एमएलसी के एफिडेविट मौजूद हैं. इसके अलावा तमाम पार्टी नेता भी अखिलेश के साथ हैं.

मुलायम के वफादरों ने छोड़ा साथ

किरणमयनंदा, रेवती रमण सिंह और बलराम यादव जैसे वरिष्ठ समाजवादी नेता जो मुलायम सिंह के साथ शुरुआती दौर से थे अब अखिलेश खेमे में हैं. इन सभी ने 1 जनवरी को आपातकालीन राष्ट्रीय अधिवेशन में भाग लिया था और अखिलेश को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर बधाई भी दी थी.

पारिवारिक दबाव

पार्टी ही नहीं सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव पर परिवार का भी दबाव है कि वे बेटे अखिलेश की बात मान लें और पार्टी में संरक्षक की भूमिका में काम करें. सैफई से परिवार के कई बुजुर्ग मुलायम और अखिलेश से व्यक्तिगत रुप से बात कर चुके हैं.

पार्टी नहीं टूटने देना चाहते मुलायम

पिछले दिनों गठबंधन और टिकट वितरण पर अखिलेश के रुख से यह साफ हो चुका है कि वे पीछे पिछड़ने वाले नहीं हैं वहीं मुलायम कुछ नरम जरूर नजर आ रहे हैं. वे लगातार कहते रहे हैं कि मैं पार्टी नहीं टूटने दूंगा. दिल्ली निकलने से पूर्व भी मुलायम ने कहा था कि पार्टी मैंने बहुत लड़ाई लड़कर खड़ी की है इसे टूटने नहीं दूंगा.

अखिलेश के साथ ही जीत सकते हैं चुनाव

मुलायम सिंह यह बात जानते हैं कि अखिलेश ही वह चेहरा हैं जो आगामी विधानसभा चुनावों में सपा को सत्ता वापस दिला सकते हैं. मुलायम ने इस बात का जिक्र भी किया था कि हमने ही अखिलेश को मुख्यमंत्री बनाया था और फिर बनाएंगे. इसके अलावा आजतक द्वारा उत्तर प्रदेश में कराए गए सर्वे में भी अखिलेश ही जनता की पहली पसंद बनकर उभरे थे.

Live: SP साइकिल सिंबल के मसले पर चुनाव आयोग में सुनवाई शुरू, चुनाव चिह्न पर अखिलेश-मुलायम में तकरार



नई दिल्‍ली: चुनाव आयोग में सपा के साइकिल निशान पर सुनवाई चालू हो गई है. मुलायम सिंह यादव आयोग पहुंच चुके हैं. वहीं दूसरी तरफ अखिलेश खेमे की तरफ से रामगोपाल यादव, किरणमय नंदा और नरेश अग्रवाल पहुंचे. सूत्रों के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच सिंबल के मसले पर वहां तकरार हुई. आयोग के बाहर मुलायम समर्थक उनके पक्ष में नारे लगा रहे हैं. आयोग में अखिलेश खेमे का पक्ष कपिल सिब्‍बल रखेंगे.

उल्‍लेखनीय है कि आज चुनाव आयोग में ट्रिब्‍यूनल की तर्ज यानी अदालत की तरह मामले की सुनवाई हो रही है.सुनवाई के दौरान तीनों चुनाव आयुक्तों के साथ चुनाव आयोग के कानूनी सलाहकार भी मौजूद रहेंगे. इस दौरान दोनों पक्षों से अपनी बात सबूतों के आधार पर रखने को कहा जाएगा. मामले की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जा सकती है.

ससे पहले मुलायम सिंह यादव ने अपने पक्ष में आयोग को मुख्य रूप से तीन दस्तावेज दिए हैं-
1. समाजवादी पार्टी का संविधान.
2. रामगोपाल यादव की बर्खास्तगी की चिट्ठी.
3. एक पत्र जिसमें कहा गया है कि रामगोपाल ने जो सम्मेलन बुलाया वह असंवैधानिक है.

उधर जवाब में दूसरे पक्ष के याचिकाकर्ता रामगोपाल यादव (अखिलेश यादव के खेमे से) ने  आयोग से कहा है कि सम्मेलन बुलाने के लिए उन्हें अधिकृत किया गया था. 55 प्रतिशत सदस्यों ने सम्मेलन के लिए सहमति दी थी जबकि संविधान के मुताबिक 40 प्रतिशत से अधिक सदस्य लिखित में दें तो पार्टी संविधान के हिसाब से आपात अधिवेशन बुलाया जा सकता है. साथ ही रामगोपाल यादव ने 200 से अधिक विधायकों और 15 से अधिक सांसदों के समर्थन की चिट्ठी भी दी है.
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इस बात की संभावना भी है कि अगर आयोग दोनों पक्षों की दलीलों से संतुष्ट नहीं होता या दोनों की दलीलों में दम लगता है तो वह चुनाव चिन्ह को जब्त भी कर सकता है. ऐसे में दोनों ही पक्षों को अगले चुनाव में साइकिल के अलावा कोई और चुनाव चिन्ह लेना होगा.

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